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चोरी में जानकार जरूर था शामिल, दोनों कैमरों के काट दिए थे कनेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Updated Fri, 30 Nov 2018 01:50 AM IST
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प्रयागराज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो,प्रयागराज
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मम्फोर्डगंज में एटीएम से 16.61 लाख रुपये उड़ाने की वारदात को बड़े ही प्रोफेशनल तरीके से अंजाम दिया गया। इससे एक बात तय मानी जा रही है कि इसमें कोई ऐसा व्यक्ति जरूर शामिल था जिसे एटीएम के बारे में काफी जानकारी थी। यही वजह रही कि केबिन के साथ एटीएम में लगे कैमरे को भी वारदात से पहले बंद कर दिया गया था।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में कोई गार्ड तैनात नहीं था। पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की तो केबिन के भीतर सीसीटीवी कैमरा लगा मिला। हालांकि फुटेज खंगालने पर पता चला कि वारदात से पहले ही इसका कनेक्शन काट दिया गया था। सबसे खास बात यह है कि इस कैमरे के साथ ही एटीएम मशीन में लगेे कैमरे को भी बंद कर दिया गया था। यही वजह है कि पुलिस अफसरों का कहना है कि वारदात में कोई एटीएम का जानकार जरूर शामिल था। एक और खास बात यह कि कैमरे को बंद करने के लिए उनके तार नहीं काटे लए थे। बल्कि डीवीआर में लगी लीड निकाल दी गई थी। पुलिस का कहना है कि आमतौर पर इस तरह की वारदातों में बदमाश कैमरों के तार काट देते हैं लेकिन इस घटना में ऐसा नहीं हुआ। साफ है कि चोर गिरोह में एटीएम व सर्विलांस सिस्टम का कोई जानकार जरूर शामिल था।
जांच पड़ताल के दौरान पुलिस को मौके से ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिससे चोरोें तक पहुंचा जा सके। कोई औजार भी नहीं मिला। हालांकि तलाशी के दौरान उसे केबिन के भीतरी कक्ष में रखा डीवीआर मिल गया। पुलिस अफसरों का मानना है कि कैमरे बंद करने के बाद चोर बेफिक्र हो गए होंगे। उन्हें मालूम था कि डीवीआर से भी पुलिस को कुछ हासिल नहीं हो पाएगा। यही वजह रही कि वह अपने साथ डीवीआर नहीं ले गए।
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सूचना पर बैंक अफसर भी मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि जिस तरह से मशीन को काटा गया है, वह किसी आम वेल्डर का काम नहीं। दरअसल मशीन के अंदर कैशबॉक्स की प्लेटें बेहद संवेदनशील होती हैं। एक खास बात यह है कि गैस कटर के संपर्क में आते ही प्लेटें जल जाती हैं जिससे नोट भी राख हो जाते हैं। हालांकि इस घटना में इतनी सफाई से काम किया गया है कि काटी गई कि प्लेटों को जरा भी नुकसान नहीं पहुंचा। ऐसा लगता है जैसे कटर का इस्तेमाल करने वाला यह जानता था कि प्लेटों को बचाकर ही काटना है और इसीलिए उसने ठीक ऐसा ही किया।
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यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में कोई गार्ड तैनात नहीं था। पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की तो केबिन के भीतर सीसीटीवी कैमरा लगा मिला। हालांकि फुटेज खंगालने पर पता चला कि वारदात से पहले ही इसका कनेक्शन काट दिया गया था। सबसे खास बात यह है कि इस कैमरे के साथ ही एटीएम मशीन में लगेे कैमरे को भी बंद कर दिया गया था। यही वजह है कि पुलिस अफसरों का कहना है कि वारदात में कोई एटीएम का जानकार जरूर शामिल था। एक और खास बात यह कि कैमरे को बंद करने के लिए उनके तार नहीं काटे लए थे। बल्कि डीवीआर में लगी लीड निकाल दी गई थी। पुलिस का कहना है कि आमतौर पर इस तरह की वारदातों में बदमाश कैमरों के तार काट देते हैं लेकिन इस घटना में ऐसा नहीं हुआ। साफ है कि चोर गिरोह में एटीएम व सर्विलांस सिस्टम का कोई जानकार जरूर शामिल था।
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जांच पड़ताल के दौरान पुलिस को मौके से ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिससे चोरोें तक पहुंचा जा सके। कोई औजार भी नहीं मिला। हालांकि तलाशी के दौरान उसे केबिन के भीतरी कक्ष में रखा डीवीआर मिल गया। पुलिस अफसरों का मानना है कि कैमरे बंद करने के बाद चोर बेफिक्र हो गए होंगे। उन्हें मालूम था कि डीवीआर से भी पुलिस को कुछ हासिल नहीं हो पाएगा। यही वजह रही कि वह अपने साथ डीवीआर नहीं ले गए।
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सूचना पर बैंक अफसर भी मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि जिस तरह से मशीन को काटा गया है, वह किसी आम वेल्डर का काम नहीं। दरअसल मशीन के अंदर कैशबॉक्स की प्लेटें बेहद संवेदनशील होती हैं। एक खास बात यह है कि गैस कटर के संपर्क में आते ही प्लेटें जल जाती हैं जिससे नोट भी राख हो जाते हैं। हालांकि इस घटना में इतनी सफाई से काम किया गया है कि काटी गई कि प्लेटों को जरा भी नुकसान नहीं पहुंचा। ऐसा लगता है जैसे कटर का इस्तेमाल करने वाला यह जानता था कि प्लेटों को बचाकर ही काटना है और इसीलिए उसने ठीक ऐसा ही किया।