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हड़ताल खत्म, सोमवार से होगा काम

Sun, 20 May 2018 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 20 May 2018 01:10 AM IST
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Strike ends, will work from Monday
इलाहाबाद क्राइम - फोटो : self
अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव की हत्या के विरोध में पिछले दस दिनों से हड़ताल पर चल रहे वकीलों ने अपना आंदोलन और हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया है। जिला न्यायालय के प्रशासनिक जज न्यायमूर्ति बीके नारायण के आश्वासन पर वकीलों ने सोमवार से न्यायिक कार्य शुरू करने की घोषणा की है।
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इस संबंध में शनिवार को  जिला अधिवक्ता संघ ने आम सभा कर वकीलों को ताजा स्थिति और निर्णय से अवगत कराया। अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव की हत्या के बाद शूटरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जिला न्यायालय के वकील विगत दस दिनों से हड़ताल पर थे। संघ के मंत्री कृष्ण चंद्र मिश्र बऊ ने बताया कि सभा में प्रशासनिक न्यायमूर्ति के साथ हुई वार्ता से वकीलों को अवगत कराया गया और कहा गया कि प्रशासनिक न्यायमूर्ति के आश्वासन पर हड़ताल स्थगित की जाती है। संघ ने घटना की निगरानी हाईकोर्ट की देखरेख में होनेे और मृतक अधिवक्ता की पत्नी को सरकारी नौकरी तथा अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने के लिए हाईकोर्ट में एक पीआईएल दाखिल करने का निर्णय लिया है। सभा में यह निर्णय भी लिया गया कि अधिवक्ता सोमवार से न्यायिक कार्य करेंगे। सभा में मंत्री मनोज सिंह लोकेश, अमित निगम, लक्ष्मीकांत मिश्र, नितिन दुबे, बृजेश कुमार ओझा, मनोज त्रिपाठी, जफर अहमद और कार्यकारिणी के सदस्यों के अलावा संघ के पूर्व अध्यक्ष केबी तिवारी, राजेन्द्र श्रीवास्तव, गिरीश तिवारी, राकेश तिवारी, पूर्व मंत्री दिनेश श्रीवास्तव, अनिल तिवारी, कौशलेश सिंह, प्रमोद सिंह नीरज, राधा रमण मिश्र, देवेन्द्र मिश्र लारा, रेवती रमण सोहगौरा, संतोष यादव, कुश पांडेय, राकेश दुबे और छविराम यादव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं उपस्थित थे।
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अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव हत्याकांड में  माइकल पर शक गहराता जा रहा है। उसके दोनों मोबाइल बंद हैं। उसकी तलाश में एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की टीमों को भी लगाया गया है। उसके घर वालों से लगातार पूछताछ हो रह ीहै।
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शिवकुटी के स्वराज नगर में रहने वाले माइकल का हुलिया और चेहरा बाइक पर पीछे बैठे शूटर से काफी हद तक मिल रहा है। उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस ने जब छापा मारा तो पता चला कि वह फरार है। पुलिस के साथ एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की टीमें भी उसकी तलाश में लगाई गई हैं। प्रतापगढ़ और जौनपुर समेत उसके कई ठिकानों पर पुलिस ने दबिश दी है लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस का कहना है कि घर वालों ने उसके दो मोबाइल नंबर बताए है। दोनों घटना के बाद से बंद हैं, इसलिए उस पर शक गहराया है। लोकेशन से पता चला है कि उसने अपने दोनों मोबाइल नंबर इलाहाबाद में बंद किए हैं। अब वह यहीं कहीं छिपा है या फिर बाहर भाग निकला। इसी बात का पता लगाना है।

अधिवक्ता राजेश कुमार श्रीवास्तव हत्याकांड की जांच में अब लखनऊ एसटीएफ भी लग गई है। इसी के तहत लखनऊ एसटीएफ की एक टीम ने शहर आकर घटनास्थल का जायजा लिया। साथ ही घटना के संबंध में कुछ तथ्य भी एकत्रित किए।

लखनऊ एसटीएफ की टीम शुक्रवार को अधिवक्ता हत्याकांड की जांच करने शहर पहुंची। यहां आकर टीम ने सबसे पहले एसटीएफ की स्थानीय इकाई से संपर्क कर इस घटना से जुड़े तमाम पहलुओं पर जानकारी हासिल की। इसके बाद टीम ने कर्नलगंज में मनमोहन पार्क चौराहे के करीब स्थित घटनास्थल पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। इस दौरान आसपास की दुकानों-मकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी खंगाली। सूत्रों की मानें तो चार सदस्यीय टीम ने कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर चिह्नित किए हैं जिन्हें सर्विलांस पर लगाकर मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी गई है। टीम ने दिन भर शहर में रहकर हत्याकांड से संबंधित जानकारियां एकत्रित कीं। हालांकि इस मामले में अफसर कुछ भी बोलने से साफ मना करते रहे।
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