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चौकी 500 मीटर दूर, पुलिस को भनक लगी सुबह
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 31 Mar 2018 01:27 AM IST
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दारागंज स्थित बख्शीबांध रोड पर दो युवकों की हत्या कर शव जलाए जाने की घटना से इलाके में सनसनी है। हर जुबान पर यही सवाल है कि आखिर कैसे इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देकर अपराधी भाग निकले और पुलिस को भनक तक नहीं ली। वह भी तब जब रात-दिन घटनास्थल से 500 मीटर की दूरी पर बख्शीबांध चौकी की पुलिस मौजूद रहती है। बख्शीबांध रोड पर जिस जगह घटना हुई, वहां से लगभग 500 मीटर की दूरी पर ही बख्शीबांध पुलिस चौकी है। इन दिनों चौकी के नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। वर्तमान में चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी सामने स्थित हनुमान मंदिर में रहते हैं। जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि युवकों ने खुद को बचाने की कोशिश की होगी। यह भी माना जा रहा है कि जान पर खतरा देख दोनों चीखे भी होंगे तो आखिर कैसे पुलिसवालों को नहीं सुनाई दिया।
बख्शीबांध रोड पर जिस जगह दोनों लाशें मिलीं, वहीं पर पास में ही सिंचाई विभाग की ओर से बाढ़ पंप लगवाने का काम कराया जा रहा है। यह काम ठेके पर चल रहा है और आसपास के क्षेत्रों के साथ ही बाहर के जिलों से भी आकर मजदूर इसमें काम करते हैं। इनमें से कुछ यहीं रहते हैं जबकि बाकी काम खत्म होेने पर शाम को लौट जाते हैं।
घटना के बाद शुक्रवार दोपहर में वहां मौजूद मजदूर दहशत में दिखे। पूछने पर उन्होंने कहा कि रात में खाना खाकर सभी सो गए थे। इसके बाद क्या हुआ, उन्हें कुछ पता नहीं। बहादुरपुर कछार के रहने वाले मोहित ने बताया कि वह शाम को काम खत्म होने के बाद घर चला गया था। उधर हनुमना रीवां के प्रदीप, प्रधुमभन साकेत व वीरेंद्र, कानपुर जाजमऊ के धीरज ने बताया कि खाना खाने के बाद सभी सो गए थे। रात में किसी की चीख सुनाई देने या कोई वाहन आदि देखने के सवाल पर उन्होंने साफ इंकार कर दिया।
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बख्शीबांध रोड पर जिस जगह दोनों लाशें मिलीं, वहीं पर पास में ही सिंचाई विभाग की ओर से बाढ़ पंप लगवाने का काम कराया जा रहा है। यह काम ठेके पर चल रहा है और आसपास के क्षेत्रों के साथ ही बाहर के जिलों से भी आकर मजदूर इसमें काम करते हैं। इनमें से कुछ यहीं रहते हैं जबकि बाकी काम खत्म होेने पर शाम को लौट जाते हैं।
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घटना के बाद शुक्रवार दोपहर में वहां मौजूद मजदूर दहशत में दिखे। पूछने पर उन्होंने कहा कि रात में खाना खाकर सभी सो गए थे। इसके बाद क्या हुआ, उन्हें कुछ पता नहीं। बहादुरपुर कछार के रहने वाले मोहित ने बताया कि वह शाम को काम खत्म होने के बाद घर चला गया था। उधर हनुमना रीवां के प्रदीप, प्रधुमभन साकेत व वीरेंद्र, कानपुर जाजमऊ के धीरज ने बताया कि खाना खाने के बाद सभी सो गए थे। रात में किसी की चीख सुनाई देने या कोई वाहन आदि देखने के सवाल पर उन्होंने साफ इंकार कर दिया।
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