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बेइज्जती का बदला लेने को भतीजे ने रची थी साजिश, तीन गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Updated Fri, 26 Oct 2018 01:31 AM IST
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सोरांव में सातसितंबर की रात हुई एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या मामले का खुलासा हो गया। पुलिस का दावा है कि मामले की साजिश मृतका पीडब्लयूडी कर्मचारी के भतीजे व दामाद ने रची। उनकी नीयत हत्या कराने की नहीं थी लेकिन शराब के नशे में धुत बदमाशों ने एक के बाद एक परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किर लिया गया है जबकि एक बदमाश की तलाश जारी है।
एसएसपी नितिन तिवारी ने बृहस्पतिवार को मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे मामले की साजिश मृतका पीडब्ल्यूडी कर्मचारी कमलेश के भतीजे मनोज पांडेय व दामाद अमर ने रची थी। मनोज को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि प्रतापनारायण मेजा के औंता का रहने वाला था लेकिन वह लंबे समय से ससुराल बिगहिया आकर रहने लगा था। ससुराल की संपत्ति पर उसका अकेले कब्जा होने लगा था। इसके अलावा मनोज के साथ ही साढ़ू अमर को वह कई बार बेइज्जत कर चुका था। इसी से खुन्नस खाकर मनोज व अमर ने प्रतापनारायण को सबक सिखाने की ठानी। इसके लिए उसने राहुल पासी निवासी थरवई से संपर्क साधा। दो सितंबर को एक लाख रुपये में प्रतापनारायण को सबक सिखाने का सौदा तय किया। साथ ही 10 हजार रुपये खर्च के लिए दिए।
एसएसपी ने बताया कि मनोज के बाद पुलिस ने अमर व राहुल को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरी कहानी सामने आ गई। राहुल ने बताया कि चारों हत्याएं उसने अपने साथियों ननका पासी, लोकई पासी व बाबा पासी के साथ मिलकर कीं। घटना से पूर्व बिगहिया स्थित दुकान से दो बोतल शराब खरीदकर चारों ने पी। इसके बाद तीन बजे के करीब पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस की मानें तो राहुल ने भी कबूल किया है कि वह प्रतापनारायण को सबक सिखाने पहुंचा था लेकिन वहां स्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि परिवार के चारों लोगों की हत्या करनी पड़ी। घटना में शामिल लोकई व बाबा पासी कुछ दिनों पहले ही खुल्दाबाद में हिस्ट्रीशीटर मनीष की हत्या के मामले में जेल भेजे जा चुके हैं। बाबा पासी की तलाश की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि मामले में नामजद कराए गए ओमप्रकाश, अमर के पिता व लल्ले पांडेय की संलिप्तिता नहीं पाई गई है।
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क्या था मामला
बिगहिया में रहने वाली पीडब्ल्यूडी कर्मचारी कमलेश देवी(55), उनकी बड़ी बेटी रिंकी उर्फ किरन(32), दामाद प्रतापनारायण मिश्रा(35) व पोते विराट(8) की छह सितंबर की रात घर के भीतर ही बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। धारदार हथियार से हमला कर सभी को मौत के घाट उतारा गया था। प्रतापनारायण के परिजनों की तहरीर पर उसके साढ़ू अमर उर्फ शरद कुमार पांडेय, उसके पिता सुनील पांडेय, चचिया ससुर ओमप्रकाश, उसके बेटे मनोज व लल्ले पांडेय के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि संपत्ति के विवाद में मृतका कमलेश के दूसरे दामाद अमर ने अपने पिता व पट्टीदारों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।
इन सवालों का नहीं मिला जवाब
पुलिस भले ही मामले का खुलासा करने का दावा कर रही हो लेकिन उसकी कहानी में कई झोल भी हैं। ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब अब तक नहीं मिल सके हैं। ऐसे ही कुछ सवाल यह हैं..
1- पुलिस मनोज को मामले की साजिश रचने का आरोपी बता रही है लेकिन उसके पास इस बात का जवाब नहीं है क कमलेश व प्रतानारायण की हत्या से मनोज को क्या फायदा होता?
2- पुलिस की एक थ्योरी यह भी है कि बेइज्जती का बदला लेने के लिए मनोज ने अपराधियों को ठेका दिया। हालांकि पुलिस का यह भी कहना है कि वह हत्या नहीं कराना चाहता था। अब सवाल यह उठता है कि केवल मारपीट करने के लिए कोई एक लाख रुपये का ठेका क्यों देगा?
3- राहुल पासी को अगर सिर्फ सबक सिखाने को कहा गया था, तो उसने एक नहीं बल्कि चार-चार लोगों की हत्याएं क्यों की?
4- प्रतापनारायण को सबक ही सिखाना था तो राहुल व उसके साथी आधी रात के बाद प्रतापनारायण के घर क्यों गए? वह उसे दिन में या शाम के वक्त कहीं भी मारपीट सकते थे?
5- सबसे अहम बात यह है कि राहुल जानता था कि उसे हत्या नहीं करनी। फिर वह और उसके साथी मृतकों के घर में धारदार हथियार लेकर क्यों गए?
6- पुलिस मामले के खुलासे का दावा तो कर रही है लेकिन वारदात में प्रयुक्त आला ए कत्ल वह अब तक बरामद नहीं कर सकी है।
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एसएसपी नितिन तिवारी ने बृहस्पतिवार को मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे मामले की साजिश मृतका पीडब्ल्यूडी कर्मचारी कमलेश के भतीजे मनोज पांडेय व दामाद अमर ने रची थी। मनोज को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि प्रतापनारायण मेजा के औंता का रहने वाला था लेकिन वह लंबे समय से ससुराल बिगहिया आकर रहने लगा था। ससुराल की संपत्ति पर उसका अकेले कब्जा होने लगा था। इसके अलावा मनोज के साथ ही साढ़ू अमर को वह कई बार बेइज्जत कर चुका था। इसी से खुन्नस खाकर मनोज व अमर ने प्रतापनारायण को सबक सिखाने की ठानी। इसके लिए उसने राहुल पासी निवासी थरवई से संपर्क साधा। दो सितंबर को एक लाख रुपये में प्रतापनारायण को सबक सिखाने का सौदा तय किया। साथ ही 10 हजार रुपये खर्च के लिए दिए।
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एसएसपी ने बताया कि मनोज के बाद पुलिस ने अमर व राहुल को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरी कहानी सामने आ गई। राहुल ने बताया कि चारों हत्याएं उसने अपने साथियों ननका पासी, लोकई पासी व बाबा पासी के साथ मिलकर कीं। घटना से पूर्व बिगहिया स्थित दुकान से दो बोतल शराब खरीदकर चारों ने पी। इसके बाद तीन बजे के करीब पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस की मानें तो राहुल ने भी कबूल किया है कि वह प्रतापनारायण को सबक सिखाने पहुंचा था लेकिन वहां स्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि परिवार के चारों लोगों की हत्या करनी पड़ी। घटना में शामिल लोकई व बाबा पासी कुछ दिनों पहले ही खुल्दाबाद में हिस्ट्रीशीटर मनीष की हत्या के मामले में जेल भेजे जा चुके हैं। बाबा पासी की तलाश की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि मामले में नामजद कराए गए ओमप्रकाश, अमर के पिता व लल्ले पांडेय की संलिप्तिता नहीं पाई गई है।
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क्या था मामला
बिगहिया में रहने वाली पीडब्ल्यूडी कर्मचारी कमलेश देवी(55), उनकी बड़ी बेटी रिंकी उर्फ किरन(32), दामाद प्रतापनारायण मिश्रा(35) व पोते विराट(8) की छह सितंबर की रात घर के भीतर ही बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। धारदार हथियार से हमला कर सभी को मौत के घाट उतारा गया था। प्रतापनारायण के परिजनों की तहरीर पर उसके साढ़ू अमर उर्फ शरद कुमार पांडेय, उसके पिता सुनील पांडेय, चचिया ससुर ओमप्रकाश, उसके बेटे मनोज व लल्ले पांडेय के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि संपत्ति के विवाद में मृतका कमलेश के दूसरे दामाद अमर ने अपने पिता व पट्टीदारों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।
इन सवालों का नहीं मिला जवाब
पुलिस भले ही मामले का खुलासा करने का दावा कर रही हो लेकिन उसकी कहानी में कई झोल भी हैं। ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब अब तक नहीं मिल सके हैं। ऐसे ही कुछ सवाल यह हैं..
1- पुलिस मनोज को मामले की साजिश रचने का आरोपी बता रही है लेकिन उसके पास इस बात का जवाब नहीं है क कमलेश व प्रतानारायण की हत्या से मनोज को क्या फायदा होता?
2- पुलिस की एक थ्योरी यह भी है कि बेइज्जती का बदला लेने के लिए मनोज ने अपराधियों को ठेका दिया। हालांकि पुलिस का यह भी कहना है कि वह हत्या नहीं कराना चाहता था। अब सवाल यह उठता है कि केवल मारपीट करने के लिए कोई एक लाख रुपये का ठेका क्यों देगा?
3- राहुल पासी को अगर सिर्फ सबक सिखाने को कहा गया था, तो उसने एक नहीं बल्कि चार-चार लोगों की हत्याएं क्यों की?
4- प्रतापनारायण को सबक ही सिखाना था तो राहुल व उसके साथी आधी रात के बाद प्रतापनारायण के घर क्यों गए? वह उसे दिन में या शाम के वक्त कहीं भी मारपीट सकते थे?
5- सबसे अहम बात यह है कि राहुल जानता था कि उसे हत्या नहीं करनी। फिर वह और उसके साथी मृतकों के घर में धारदार हथियार लेकर क्यों गए?
6- पुलिस मामले के खुलासे का दावा तो कर रही है लेकिन वारदात में प्रयुक्त आला ए कत्ल वह अब तक बरामद नहीं कर सकी है।