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शिक्षा विभाग के कर्मचारी की हत्या, शव सेवइत स्टेशन पर मिला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 17 May 2018 01:17 AM IST
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Crime
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शिक्षा विभाग के एक लिपिक की मंगलवार की रात हत्या कर दी गई। उनका शव बुधवार की सुबह सेरांव के सेवइत रेलवे स्टेशन के पास मिला तो हड़कंप मच गया। उनके पास से मिली डायरी के आधार शिनाख्त की गई। उनके बेटों ने शिक्षा माफियाओं पर हत्या का आरोप लगाया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। वह जिनके साथ लखनऊ में प्रांतीय प्रदर्शन के बाद कार से वापस आए थे, उनसे पूछताछ की जाएगी। पुलिस मोबाइल कॉल डीटेल्स से भी जानकारी का प्रयास कर रही है।
प्रीतम नगर के रहने वाले रामचंद्र पटेल शिक्षा विभाग (सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी) में लिपिक थे। मंगलवार को लखनऊ में लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों का प्रांतीय प्रदर्शन था। रामचंद्र उसी में शरीक होने लखनऊ गए थे। रात में लौटते समय वे शिक्षा विभाग के विजय शंकर पांडेय और प्रमिल कुमार श्रीवास्तव के साथ उनकी कार में बैठ गए। विजय और प्रमिल के मुताबिक रात में दो बजे वे मेयाहाल चौराहे के पास पहुंचे। यहां पर रामचंद्र उतर गए और घर जाने की बात कहकर निकल गए। सुबह सोरांव के सेवइत रेलवे स्टेशन के पास रामचंद्र की लाश मिली। उनके सिर में गहरी चोट थी। आस पास के लोगों की सूचना पर पुलिस पहुंची। उनके पास मिली डायरी में घर वालों और आफिस के तमाम नंबर लिखे थे। पुलिस ने सूचना दी तो घर वाले घबराकर पहुंच गए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इंस्पेक्टर सोरांव सुरेंद्र नाथ ने बताया कि सिर पर चोट के निशान साफ दिख रहे हैं। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि मेयोहाल चौराहे से रामचंद्र आखिर सेवइत स्टेशन तक कैसे पहुंचे। वे जिनके साथ लखनऊ से आए थे। उनसे पूछताछ की जाएगी। मोबाइल कॉल डीटेल्स से भी जानकारी का प्रयास किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से काफी कुछ साफ हो जाएगा।
घर वालों का आरोप शिक्षा माफियाओं ने की हत्या
रामचंद्र पटेल के तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा विजय औरैया स्थित जिला पंचायत में इंजीनियर है। छोटे सुनील और सचिन घर पर मां के साथ रहते हैं। विजय के साढू नीरज तहसीलदार हैं। सभी लोग पोस्टमार्टम हाउस में यह आरोप लगा रहे थे कि रामचंद्र की हत्या शिक्षा माफियाओं ने कराई है। उन्होंने तमाम आरोप लगाए हैं कि किस तरह शिक्षा माफिया उन्हें परेशान कर रहे थे। वे जल्द ही पुलिस को पूरी बात बताएंगे।
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प्रीतम नगर के रहने वाले रामचंद्र पटेल शिक्षा विभाग (सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी) में लिपिक थे। मंगलवार को लखनऊ में लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों का प्रांतीय प्रदर्शन था। रामचंद्र उसी में शरीक होने लखनऊ गए थे। रात में लौटते समय वे शिक्षा विभाग के विजय शंकर पांडेय और प्रमिल कुमार श्रीवास्तव के साथ उनकी कार में बैठ गए। विजय और प्रमिल के मुताबिक रात में दो बजे वे मेयाहाल चौराहे के पास पहुंचे। यहां पर रामचंद्र उतर गए और घर जाने की बात कहकर निकल गए। सुबह सोरांव के सेवइत रेलवे स्टेशन के पास रामचंद्र की लाश मिली। उनके सिर में गहरी चोट थी। आस पास के लोगों की सूचना पर पुलिस पहुंची। उनके पास मिली डायरी में घर वालों और आफिस के तमाम नंबर लिखे थे। पुलिस ने सूचना दी तो घर वाले घबराकर पहुंच गए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इंस्पेक्टर सोरांव सुरेंद्र नाथ ने बताया कि सिर पर चोट के निशान साफ दिख रहे हैं। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि मेयोहाल चौराहे से रामचंद्र आखिर सेवइत स्टेशन तक कैसे पहुंचे। वे जिनके साथ लखनऊ से आए थे। उनसे पूछताछ की जाएगी। मोबाइल कॉल डीटेल्स से भी जानकारी का प्रयास किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से काफी कुछ साफ हो जाएगा।
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घर वालों का आरोप शिक्षा माफियाओं ने की हत्या
रामचंद्र पटेल के तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा विजय औरैया स्थित जिला पंचायत में इंजीनियर है। छोटे सुनील और सचिन घर पर मां के साथ रहते हैं। विजय के साढू नीरज तहसीलदार हैं। सभी लोग पोस्टमार्टम हाउस में यह आरोप लगा रहे थे कि रामचंद्र की हत्या शिक्षा माफियाओं ने कराई है। उन्होंने तमाम आरोप लगाए हैं कि किस तरह शिक्षा माफिया उन्हें परेशान कर रहे थे। वे जल्द ही पुलिस को पूरी बात बताएंगे।
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