फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   crime

‘खाकी’ को भी नहीं छोड़ रहे शोहदे

Tue, 03 Mar 2015 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Tue, 03 Mar 2015 11:41 PM IST
विज्ञापन
महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए पुलिस में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर तो दिया जा रहा है लेकिन यह नुस्खा ज्यादा कारगर होता नहीं दिख रहा। वर्दी वालियां दूसरों को बचाने के लिए क्या करेंगी, यह तो वक्त बताएगा लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि खाकी खुद उनकी भी सुरक्षा नहीं कर पा रही। महिला सिपाहियों को सार्वजनिक जगहों पर तो मनचलों को झेलना पड़ता ही है, पुलिस कंट्रोल रूम में भी उनको ऊटपटांग कॉल्स कर परेशान किया जाता है।
विज्ञापन


सिर्फ फरवरी में ही महिला सिपाहियों के पास एक लाख से अधिक कॉल्स आईं, जिसमें उनको दिल खो जाने, आप कैसी हैं, आज शाम को क्या कर रही हैं, आप शादीशुदा तो नहीं, आप कहां रहती हैं, आपका ब्वाय फ्रेंड तो नहीं है, जैसे सवालों को झेलना पड़ा। महिला सिपाहियों से ऐसी-ऐसी बातें भी की गईं, जिसका जिक्र नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन


जिले में हाईटेक कंट्रोल रूम बनने के बाद से कॉल्स की संख्या में भी तेजी आई है। जब जनवरी में हाईटेक कंट्रोल रूम प्रयोग के दौर से गुजर रहा था, तब 11 हजार से ज्यादा कॉल्स रिसीव की जा चुकी थीं। फरवरी में यह संख्या एक लाख 63 हजार तक पहुंच गई। आपको जानकर हैरत होगी कि सिर्फ 6500 सूचनाएं सही पाई गईं। 12 हजार कॉल्स पुलिस अफसरों द्वारा जानकारी के लिए या टेस्ट के लिए की गईं थीं। एक लाख 44 हजार से अधिक कॉल्स सिर्फ पुलिस को परेशान करने के लिए की गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन



महिला सिपाहियों को परेशान करने वालों की पहचान का काम शुरू हो गया है। पुलिस ने दो हजार मोबाइल नंबर चिह्नित किए हैं। इन नंबरों से कई बार कॉल की गई। एक ऐसे मनचले का भी पता लगाया गया है जिसने सिर्फ फरवरी में एक ही नंबर से 49 बार कॉल की। हालांकि वह कोई कॉल रिसीव नहीं कर रहा है। इसके बारे में और जानकारी जुटाने के लिए एसपी कंट्रोल रूम प्रदीप कुमार ने एसपी क्राइम को पत्र लिखा है।


फर्जी कॉल करने वालों की पुलिस ने खबर लेनी भी शुरू कर दी है। फर्जी सूचना देने वाले नंबरों पर जब वापस कॉल की जाती है तो लोगों का जवाब होता है कि बच्चे ने गलती से मिला दिया होगा, अब ऐसा नहीं होगा।



सूचनाओं की संख्या का भी महिला सिपाहियों से गहरा कनेक्शन है। रात में पुरुष पुलिस कर्मियों के फोन संभालने के बाद सूचनाओं की रफ्तार 20 फीसदी से भी कम हो जाती है। बीबी शर्मा, आईजी जोन ने बताया ‘कंट्रोल रूम पर फर्जी कॉल कर परेशान करने वालों को चिह्नित करने का निर्देश दिया गया है। गलत सूचनाएं देने वाले या अश्लील बात करने वालों के खिलाफ कड़ी धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने को कहा गया है।’
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed