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रिटायर्ड इंस्पेक्टर की तलाश में सीबीआई पहुंची पीएचक्यू
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 25 Jun 2017 01:42 AM IST
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सीबीअाई
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राजू पाल हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई टीम रिटायर्ड इंस्पेक्टर जीतेंद्र शाही के बारे में तहकीकात करने पीएचक्यू पहुंची। इस मामले में अन्य सभी विवेचकों का बयान लिया जा चुका है। दो दिन पहले सीबीआई ने वाराणसी जाकर इस मामले में जांच अधिकारी रहे सुरेंद्र सिंह का भी बयान दर्ज कराया था।
सीबीआई टीम अब तक राजू पाल हत्याकांड के आरोपियों के साथ विवेचकों का बयान दर्ज कर चुकी है। पुनर्विवेचना करने वाले नारायण सिंह परिहार, वाराणसी में तैनात सुरेंद्र सिंह, परशुराम सिंह और सीबीसीआईडी में तैनात इंस्पेक्टर बीके आर्या और विजय भट्ट का बयान हो चुका है। अब सीबीआई के निशाने पर इस मामले के विवेचक रहे रिटायर्ड इंस्पेक्टर जीतेंद्र शाही हैं। वह कहां के रहने वाले हैं, इस बात की जानकारी अभी नहीं हो पाई है। उनके आवास का पता लगाने के लिए सीबीआई टीम शनिवार को पीएचक्यू पहुंची। यहां पर पेंशनर विभाग में टीम ने इंस्पेक्टर शाही के बारे में दरियाफ्त किया।
हालांकि पीएचक्यू की ओर से अभी उनका पता नहीं बताया गया। टीम से कहा गया कि वे लिखित रूप में आवेदन करें। इसके बाद उनके बारे में जानकारी दी जाएगी। सीबीआई टीम इस बारे में लिखा पढ़ी कर वापस लौट गई। जीतेंद्र शाही को कुछ समय के लिए विवेचना मिली थी। उन पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि उन्होंने कौशांबी के अब्दुल कवि का नाम हटा दिया था। बाद में जब नारायण सिंह परिहार ने पुनर्विवेचना की तो उन्होंने अब्दुल कवि समेत सात और लोगों को आरोपी बनाया था। सीबीआई यह जानना चाह रही है कि जीतेंद्र शाही ने आखिर किस आधार पर अब्दुल कवि का नाम हटाया। अब्दुल कवि ही वह शख्स है जिसे आज तक कभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका। सीबीआई का मानना है कि अब्दुल कवि कहीं न कहीं से जरूर शाही के संपर्क में रहा होगा।
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सीबीआई टीम अब तक राजू पाल हत्याकांड के आरोपियों के साथ विवेचकों का बयान दर्ज कर चुकी है। पुनर्विवेचना करने वाले नारायण सिंह परिहार, वाराणसी में तैनात सुरेंद्र सिंह, परशुराम सिंह और सीबीसीआईडी में तैनात इंस्पेक्टर बीके आर्या और विजय भट्ट का बयान हो चुका है। अब सीबीआई के निशाने पर इस मामले के विवेचक रहे रिटायर्ड इंस्पेक्टर जीतेंद्र शाही हैं। वह कहां के रहने वाले हैं, इस बात की जानकारी अभी नहीं हो पाई है। उनके आवास का पता लगाने के लिए सीबीआई टीम शनिवार को पीएचक्यू पहुंची। यहां पर पेंशनर विभाग में टीम ने इंस्पेक्टर शाही के बारे में दरियाफ्त किया।
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हालांकि पीएचक्यू की ओर से अभी उनका पता नहीं बताया गया। टीम से कहा गया कि वे लिखित रूप में आवेदन करें। इसके बाद उनके बारे में जानकारी दी जाएगी। सीबीआई टीम इस बारे में लिखा पढ़ी कर वापस लौट गई। जीतेंद्र शाही को कुछ समय के लिए विवेचना मिली थी। उन पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि उन्होंने कौशांबी के अब्दुल कवि का नाम हटा दिया था। बाद में जब नारायण सिंह परिहार ने पुनर्विवेचना की तो उन्होंने अब्दुल कवि समेत सात और लोगों को आरोपी बनाया था। सीबीआई यह जानना चाह रही है कि जीतेंद्र शाही ने आखिर किस आधार पर अब्दुल कवि का नाम हटाया। अब्दुल कवि ही वह शख्स है जिसे आज तक कभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका। सीबीआई का मानना है कि अब्दुल कवि कहीं न कहीं से जरूर शाही के संपर्क में रहा होगा।
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