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एसएसपी ऑफिस से 200 सौ मीटर दूर कानून का ‘कत्ल’
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 12 Feb 2018 01:25 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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बवाल का अंदेशा देखते हुए एसएसपी ने दिलीप हत्याकांड में तीन पुलिस वालों को निलंबित कर खुद का दामन साफ रखने की कोशिश जरूर की है लेकिन इस हत्याकांड में पुलिस भी कम दोषी नहीं। पुलिस का गिरता इकबाल ही है कि एसएसपी आफिस से महज 200 मीटर की दूरी पर दिल को दहला देने वाली वारदात हुई। सीसीटीवी फुटेज जिसने भी देखा, खौफ से दहल उठा। लोग सवाल कर रहे हैं, कहां थी पुलिस, क्या कर रही है 100 डायल? हाल यह है कि उच्चाधिकारियों तक घटना की जानकारी भी 36 घंटे तब पहुंची जब दिलीप की मौत हो गई।
दिलीप की हत्या ने कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अत्याधुनिक डायल 100 से लेकर अपाचे गाड़ी वाली फोर्स क्या दिखावा हैं। स्थानीय फोर्स या क्राइम ब्रांच का क्या कोई मतलब नहीं है। कम से कम बदमाशों की हरकतों से यही साबित हुआ है। सीसीटीवी फुटेज में कातिलों का बेखौफ अंदाज यह बता रहा है कि जैसे उन्हें पता था कि पुलिस नहीं आएगी और आई भी नहीं। जब घटना के बारे में पता चला तो भी वही टाल मटोल वाला रवैया। रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी। घटना को छोटा बनाने का प्रयास। इस घटना में उच्चाधिकारियों को तब सूचना दी गई जब उसकी मौत हो गई। 36 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस के लिए यह महज ‘सामान्य’ घटना थी। जहां एसएसपी डीएम रहते हैं। पास में ही उनके कार्यालय हों, वहां एक छात्र की ऐसी नृशंस हत्या, वह भी रेस्टोरेंट के अंदर से लेकर सड़क तक। इतनी बड़ी घटना की भरपाई में कुछ छोटे कर्मचारियों को नाप दिया गया है लेकिन बड़े अफसर कम जिम्मेदार नहीं।
दिलीप की हत्या से स्थानीय अधिकारियों पर क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जवाब इंस्पेक्टर से लेकर एसएसपी तक को देना है। डीजीपी ने दलित युवक की नृशंस हत्या पर रिपोर्ट मांगी है। एक पक्ष अधिकारियों पर साफ साफ आरोप लगा रहा है कि उनकी काहिलियत के कारण दिलीप नहीं रहा। आरोपों प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। एक अधिकारी पर आरोप है कि वे यहीं पढ़े, हास्टल में रहे और अब यहीं अधिकारी बनने के बाद लड़कों के साथ बैठक में व्यस्त रहते हैं। इस अधिकारी पर छात्रावासों में लड़कों के साथ मिलकर ‘बैठकी’ का भी आरोप है। एक और अधिकारी पर आरोप है कि उन्हें किसी घटना से कोई मतलब ही नहीं रहता। उनका कहना है कि उन्हें यहां ज्यादा नहीं रहना। इसलिए वे ज्यादा ‘इंटरेस्ट’ भी नहीं लेते।
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जब दिलीप पर जानलेवा हमला किया जा रहा था तो उसके दोस्त और रेस्टोरेंट के कुछ लोग लगातार डायल 100 पर कॉल कर रहे थे लेकिन काफी प्रयास के बाद भी फोन नहीं उठा। इससे डायल 100 की सेवाओं पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है कि अगर घटना के समय भी कंट्रोल रूम नहीं सुनेगा तो इस सेवा का मतलब क्या है।
शहर में पिछले दिनों लगातार ऐसी घटनाएं हो रही थीं जो कभी भी बड़ी हो सकती थीं। तीन दिन पहले ही राजापुर में मीडिया से जुड़े अमरजीत पर कुछ इसी अंदाज में हमला हुआ। सिविल लाइंस में कुछ दिन पहले एक युवक को घेरकर ऐसा पीटा गया, कि वह मरणासन्न हो गया था। धूमनगंज और नैनी में भी इसी तरह की घटनाएं हुईं। चूंकी हर घटना में सीसीटीवी फुटेज नहीं होती, हर घटना में मौत नहीं होती, इस कारण पुलिस ऐसी किसी घटना को गंभीरता से नहीं लेती। पिछले दस दिनों के दौरान बमों और तमंचों के साथ पकड़े गए युवकों की संख्या एक दर्जन से ज्यादा है। शायद ही उनसे पूछताछ हुई हो कि आखिर उन्होंने किसे मारने के लिए इन हथियारों को अपने पास रखा था।
बीजेपी सरकार बनने के बाद सीएम ने स्पष्ट आदेश जारी किया था कि कहीं पर भी रिपोर्ट दर्ज करने में कोताही नहीं की जानी चाहिए। रिपोर्ट सभी की दर्ज हो। गलत हो तो उसे खारिज कर दिया जाय लेकिन आज भी आम लोगों के लिए रिपोर्ट दर्ज कराना टेढ़ी खीर है। दिलीप को पीट पीटकर कोमा में पहुंचा दिया गया। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार की रात रिपोर्ट नहीं दर्ज की। घटना की शनिवार को रिपोर्ट दर्ज की गई। नियम यह है कि अगर रिपोर्ट दर्ज कराने वाला कोई नहीं है तो पुलिस खुद वादी बनकर एफआईआर करती है।
शहर में गिरती कानून व्यवस्था पर सोमवार को कांग्रेसी नेता एसएसपी आफिस पर धरना प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेसी नेता हसीब अहमद और मुकुंद तिवारी ने कहा कि योगी सरकार में कानून का ध्वस्त हो गया है। जिस तरह एक दलित छात्र की हत्या की गई है, उससे कानून व्यवस्था की पोल खुल गई है। दोनों नेताओं ने कहा कि वे सोमवार को धरना प्रदर्शन करेंगे।
दिलीप के कातिलों ने तालिबानियों की क्रूरता को भी पीछे छोड़ दिया। ऐसी नृशंसता शायद ही कभी देखने सुनने को मिली हो। दिलीप के मरणासन्न शरीर पर पत्थर और डंडे से वार करते हुए कातिलों को न झिझक हो रही थी न ही उन्हें कोई डर था। दिलीप के शरीर को घसीटते हुए वे रेस्टोरेंट से बाहर लाए थे। रेस्टोरेंट के अंदर दिलीप और उसके साथियों को जब घेर कर मारा जाने लगा तो वे बाहर भागे। दिलीप के दोस्त तो भाग निकले थे, वह कातिलों के हत्थे चढ़ गया। उसे चार पांच लोगों ने मिलकर रेस्टोरेंट के अंदर ही मारना शुरू कर दिया। उसके सिर पर कुर्सियों से इतना वार किया गया कि वह कोमा में चला गया। कोमा में जाने के बाद दिलीप के शरीर ने प्रतिक्रिया करना खत्म कर दिया। उसे लगातार मारा जा रहा था लेकिन न तो उसके शरीर में कोई हरकत हो रही थी न ही वह दर्द से चीख रहा था।
कातिल उसे घसीटते हुए बाहर ले आए। उसका आधा शरीर सीढ़ियों के ऊपर था और आधा नीचे। फुटेज में दिख रहा है कि दिलीप के मरणासन्न शरीर पर कातिल बाहर भी लात घूसों से वार कर रहे हैं। इतना ही नहीं एक ने डंडा उठाया और उसके पैरों में मारने लगा। इतनी तेज डंडा मारने के बाद दिलीप हिल डुल भी नहीं रहा था। इसके बाद तो हत्यारों के सिर खून सवार हो गया। एक ने बड़ा सा पत्थर उठाया और दिलीप के पेट में दे मारा। पत्थर इतनी तेज लगा था कि उसका आधा शरीर सीढ़ियों के नीचे लुढ़क गया लेकिन शरीर में कोई हरकत उस समय भी नहीं थी। एक युवक हत्यारे को रोकता दिख रहा है। इसके बाद एक ने पूरी ताकत से दिलीप के चेहरे पर पत्थर मार दिया। इसके बाद भी वैसे ही पड़ा रहा। इस फुटेज को देखकर अच्छे अच्छों के कलेजे कांप गए।
दिलीप की हत्या का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। कातिल को पकड़ने के लिए लोगों से अपील की जा रही है। फेसबुक और वाट्सएप पर कातिल का नाम और दिलीप के नाम के साथ बताया जा रहा है, इस घटना से शहर शर्मसार हो गया है। फेसबुक पर इस घटना को लेकर राज्य सरकार से लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन तक को दोषी ठहराया जा रहा है।
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दिलीप की हत्या ने कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अत्याधुनिक डायल 100 से लेकर अपाचे गाड़ी वाली फोर्स क्या दिखावा हैं। स्थानीय फोर्स या क्राइम ब्रांच का क्या कोई मतलब नहीं है। कम से कम बदमाशों की हरकतों से यही साबित हुआ है। सीसीटीवी फुटेज में कातिलों का बेखौफ अंदाज यह बता रहा है कि जैसे उन्हें पता था कि पुलिस नहीं आएगी और आई भी नहीं। जब घटना के बारे में पता चला तो भी वही टाल मटोल वाला रवैया। रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी। घटना को छोटा बनाने का प्रयास। इस घटना में उच्चाधिकारियों को तब सूचना दी गई जब उसकी मौत हो गई। 36 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस के लिए यह महज ‘सामान्य’ घटना थी। जहां एसएसपी डीएम रहते हैं। पास में ही उनके कार्यालय हों, वहां एक छात्र की ऐसी नृशंस हत्या, वह भी रेस्टोरेंट के अंदर से लेकर सड़क तक। इतनी बड़ी घटना की भरपाई में कुछ छोटे कर्मचारियों को नाप दिया गया है लेकिन बड़े अफसर कम जिम्मेदार नहीं।
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दिलीप की हत्या से स्थानीय अधिकारियों पर क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जवाब इंस्पेक्टर से लेकर एसएसपी तक को देना है। डीजीपी ने दलित युवक की नृशंस हत्या पर रिपोर्ट मांगी है। एक पक्ष अधिकारियों पर साफ साफ आरोप लगा रहा है कि उनकी काहिलियत के कारण दिलीप नहीं रहा। आरोपों प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। एक अधिकारी पर आरोप है कि वे यहीं पढ़े, हास्टल में रहे और अब यहीं अधिकारी बनने के बाद लड़कों के साथ बैठक में व्यस्त रहते हैं। इस अधिकारी पर छात्रावासों में लड़कों के साथ मिलकर ‘बैठकी’ का भी आरोप है। एक और अधिकारी पर आरोप है कि उन्हें किसी घटना से कोई मतलब ही नहीं रहता। उनका कहना है कि उन्हें यहां ज्यादा नहीं रहना। इसलिए वे ज्यादा ‘इंटरेस्ट’ भी नहीं लेते।
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जब दिलीप पर जानलेवा हमला किया जा रहा था तो उसके दोस्त और रेस्टोरेंट के कुछ लोग लगातार डायल 100 पर कॉल कर रहे थे लेकिन काफी प्रयास के बाद भी फोन नहीं उठा। इससे डायल 100 की सेवाओं पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है कि अगर घटना के समय भी कंट्रोल रूम नहीं सुनेगा तो इस सेवा का मतलब क्या है।
शहर में पिछले दिनों लगातार ऐसी घटनाएं हो रही थीं जो कभी भी बड़ी हो सकती थीं। तीन दिन पहले ही राजापुर में मीडिया से जुड़े अमरजीत पर कुछ इसी अंदाज में हमला हुआ। सिविल लाइंस में कुछ दिन पहले एक युवक को घेरकर ऐसा पीटा गया, कि वह मरणासन्न हो गया था। धूमनगंज और नैनी में भी इसी तरह की घटनाएं हुईं। चूंकी हर घटना में सीसीटीवी फुटेज नहीं होती, हर घटना में मौत नहीं होती, इस कारण पुलिस ऐसी किसी घटना को गंभीरता से नहीं लेती। पिछले दस दिनों के दौरान बमों और तमंचों के साथ पकड़े गए युवकों की संख्या एक दर्जन से ज्यादा है। शायद ही उनसे पूछताछ हुई हो कि आखिर उन्होंने किसे मारने के लिए इन हथियारों को अपने पास रखा था।
बीजेपी सरकार बनने के बाद सीएम ने स्पष्ट आदेश जारी किया था कि कहीं पर भी रिपोर्ट दर्ज करने में कोताही नहीं की जानी चाहिए। रिपोर्ट सभी की दर्ज हो। गलत हो तो उसे खारिज कर दिया जाय लेकिन आज भी आम लोगों के लिए रिपोर्ट दर्ज कराना टेढ़ी खीर है। दिलीप को पीट पीटकर कोमा में पहुंचा दिया गया। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार की रात रिपोर्ट नहीं दर्ज की। घटना की शनिवार को रिपोर्ट दर्ज की गई। नियम यह है कि अगर रिपोर्ट दर्ज कराने वाला कोई नहीं है तो पुलिस खुद वादी बनकर एफआईआर करती है।
शहर में गिरती कानून व्यवस्था पर सोमवार को कांग्रेसी नेता एसएसपी आफिस पर धरना प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेसी नेता हसीब अहमद और मुकुंद तिवारी ने कहा कि योगी सरकार में कानून का ध्वस्त हो गया है। जिस तरह एक दलित छात्र की हत्या की गई है, उससे कानून व्यवस्था की पोल खुल गई है। दोनों नेताओं ने कहा कि वे सोमवार को धरना प्रदर्शन करेंगे।
दिलीप के कातिलों ने तालिबानियों की क्रूरता को भी पीछे छोड़ दिया। ऐसी नृशंसता शायद ही कभी देखने सुनने को मिली हो। दिलीप के मरणासन्न शरीर पर पत्थर और डंडे से वार करते हुए कातिलों को न झिझक हो रही थी न ही उन्हें कोई डर था। दिलीप के शरीर को घसीटते हुए वे रेस्टोरेंट से बाहर लाए थे। रेस्टोरेंट के अंदर दिलीप और उसके साथियों को जब घेर कर मारा जाने लगा तो वे बाहर भागे। दिलीप के दोस्त तो भाग निकले थे, वह कातिलों के हत्थे चढ़ गया। उसे चार पांच लोगों ने मिलकर रेस्टोरेंट के अंदर ही मारना शुरू कर दिया। उसके सिर पर कुर्सियों से इतना वार किया गया कि वह कोमा में चला गया। कोमा में जाने के बाद दिलीप के शरीर ने प्रतिक्रिया करना खत्म कर दिया। उसे लगातार मारा जा रहा था लेकिन न तो उसके शरीर में कोई हरकत हो रही थी न ही वह दर्द से चीख रहा था।
कातिल उसे घसीटते हुए बाहर ले आए। उसका आधा शरीर सीढ़ियों के ऊपर था और आधा नीचे। फुटेज में दिख रहा है कि दिलीप के मरणासन्न शरीर पर कातिल बाहर भी लात घूसों से वार कर रहे हैं। इतना ही नहीं एक ने डंडा उठाया और उसके पैरों में मारने लगा। इतनी तेज डंडा मारने के बाद दिलीप हिल डुल भी नहीं रहा था। इसके बाद तो हत्यारों के सिर खून सवार हो गया। एक ने बड़ा सा पत्थर उठाया और दिलीप के पेट में दे मारा। पत्थर इतनी तेज लगा था कि उसका आधा शरीर सीढ़ियों के नीचे लुढ़क गया लेकिन शरीर में कोई हरकत उस समय भी नहीं थी। एक युवक हत्यारे को रोकता दिख रहा है। इसके बाद एक ने पूरी ताकत से दिलीप के चेहरे पर पत्थर मार दिया। इसके बाद भी वैसे ही पड़ा रहा। इस फुटेज को देखकर अच्छे अच्छों के कलेजे कांप गए।
दिलीप की हत्या का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। कातिल को पकड़ने के लिए लोगों से अपील की जा रही है। फेसबुक और वाट्सएप पर कातिल का नाम और दिलीप के नाम के साथ बताया जा रहा है, इस घटना से शहर शर्मसार हो गया है। फेसबुक पर इस घटना को लेकर राज्य सरकार से लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन तक को दोषी ठहराया जा रहा है।