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आईटीआई में कैंपस सेलेक्शन में पहुंचे प्रशिक्षुओं का हंगामा 21-17-30

Thu, 30 Aug 2018 02:20 AM IST
Updated Thu, 30 Aug 2018 02:20 AM IST
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आईटीआई में कैंपस सेलेक्शन में पहुंचे प्रशिक्षुओं का हंगामा 21-17-30
आईटीआई में कैंपस सेलेक्शन में पहुंचे प्रशिक्षुओं का हंगामा
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200 लड़कों के प्लेसमेंट में शामिल होने पहुंचे हजारों छात्र
संस्थान के प्रशासनिक विभाग के होश उड़े, कई थानों की फोर्स पहुंची
आज का प्लेसमेंट निरस्त, दोबारा टेस्ट होगा पांच सितंबर को
अमर उजाला ब्यूरो।
नैनी। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में बुधवार को कैंपस सेलेक्शन के लिए प्रशिक्षुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। उम्मीद से कई गुना प्रशिक्षुओं की भीड़ को देख संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सांसे फूल गईं। परीक्षार्थियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी, नतीजा प्रशिक्षु नाराज होकर हंगामा खड़ा कर दिए। पता चलने पर नैनी व औद्योगिक क्षेत्र थाने की पुलिस पहुंच गई। पुलिस वालों ने किसी तरह से समझा बुझाकर स्थिति को संभाला। उसके बाद आज का कैंपस सेलेक्शन निरस्त करके पांच सितंबर को कर दिया गया।
बुधवार, 29 अगस्त को नैनी स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) कालेज में मारुती सुजुकी गुड़गांव कंपनी के लोग आए थे। यहां उन्हें 200 प्रशिक्षुओं का कैंपस सेलेक्शन करना था। कंपनी के अधिकारी 1500 प्रशभनपत्र लेकर आए थे। उनका कहना था कि आईटीआई संस्थान इलाहाबाद के ही प्रशिक्षुओं को बुलाया गया था। जिसमें 1500 बच्चों का टेस्ट कराना था, जिसमें से 200 को सेलेक्ट करना था। कैंपस सेलेक्शन टीम में अमृतलाल साहू, एसपीएल श्रीवास्तव व राजेश कुमार श्रीवास्तव शामिल थे। कैंपस सेलेक्शन की सूचना सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई थी। जिसकी वजह से बुधवार को आईटीआई कालेज के प्रशिक्षुओं के अलावा कई प्राइवेट संस्थानों के साथ-साथ बिहार, झारखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा प्रांत के भी लड़के पहुंच गए। सुबह नौ बजे से टेस्ट होना था और सात बजे से ही लड़कों की भीड़ लग गई। तकरीबन आठ से दस हजार बच्चों की भीड़ देख संस्थान के प्रशासन तंत्र के होश पाख्ता हो गए। टेस्ट में देरी होने से छात्र नाराज हो गए। नाराज छात्रों ने संस्थान परिसर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। कई गमले तोड़ दिए। चावला हास्टल में तोड़फोड़ कर दी। मामला बढ़ता देख पुलिस बुलाई गई। नाराज लड़के नारेबाजी करने लगे। करीब दो बजे किसी तरह से समझा बुझाकर शांत कराया। प्रधानाचार्य अशोक कुमार कुशवाहा ने बताया कि चूंकि कंपनी के पास मात्र 1500 पेपर थे और छात्रों की संख्या हजारों में थी। इसी वजह से आज सेलेक्शन निरस्त हो गया। अब पांच सितंबर को फिर से मारुती सुजुकी कंपनी के लोग आऐंगे तो प्लेसमेंट होगा।
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साइड स्टोरी
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आईटीआई पहुंचे हजारों बच्चों ने भुगता गलत संदेश का खामियाजा
नैनी (ब्यूरो)। घर से तमाम तैयारियों के साथ निकले आईटीआई प्रशिक्षुओं ने रास्तेभर तमाम तरह की योजनाएं तय कर रखीं थीं। उन्हें क्या मालूम था कि जिस कैंपस सेलेक्शन के लिए इतनी दूर की यात्रा कर रहे हैं, वास्तव में वह उसके लिए पात्र ही नहीं हैं। या फिर यह कहा जाय कि उन्हें समुचित जानकारी ही नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर भेजे गई कैंपस सेलेक्शन की सूचना को फारवर्ड करने में घोर लापरवाही बरती गई। जिसका खामियाजा आज तकरीबन हजारों बच्चों ने भुगता।
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राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में बुधवार को जमा हुए प्रशिक्षुओं के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ वह न केवल गलत था, बल्कि इस प्रकरण जिम्मेदार लोगों की घोर लापरवाही थी। प्रशिक्षण संस्थान में आजमगढ़ से ट्रेन से आए प्रशिक्षु कुलदीप तोमर ने बताया कि उसके पिता किसान हैं। वह बड़ा बेटा है। नौकरी मिलने की उम्मीद जगी तो मंगवलार को बाबू ने एक हजार रुपये उधार लेकर इलाहाबाद भेजा था। तीन सौ रुपये आने में भाड़ा लग गया। तीन सौ जाने में लगेगा। 150 रुपये के आस-पास खाने पीने में चला गया। इस तरह से साढे़ सात सौ रुपये खर्च हो गए और यहां टेस्ट भी नहीं दे पाए। पिता पर एक हजार रुपये के कर्ज का बोझ अलग से लद गया। इसी में मीरजापुर से आए प्रशिक्षु सुभाष चंद्र पुत्र अलगूराम पैर से दिव्यांग है। वह बैसाखी के सहारे चलता है। वह भी आज भोर में बस से यहां पहुंचा था। प्लेसमेंट की तारीख आगे बढ़ने से दिव्यांग सुभाष चंद्र भी मायूस हो गया। इसी तरह से उड़ीसा से आए सौरव कुमार, राजस्थान के सुरेश बेड़िया, कामरान अख्तर, पटना से माणिकचंद्र, झारखंड से सौमित्र मंडल भी प्लेसमेंट निरस्त होने से हताश हुए और मायूस होकर लौटे। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर जो मैसेज वायरल हुआ था, उसमें यह नहीं बताया गया था कि कहां के प्रशिक्षुओं का प्लेसमेंट होना है। उसमें सिर्फ खुला सेलेक्शन लिखा था। जिसकी वजह से वह सब भागे-भागे यहां पहुंचे।

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