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Current lineman from death, fellow employees commotion
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 25 Jun 2015 01:55 AM IST
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इलाहाबाद ब्यूरो। बिजली पोल पर चढ़कर मरम्मत कर रहे लाइनमैन की करंट से झुलसकर मौत हो गई। अचानक करंट आ जाने और साथी लाइलाइनमैन की मौत के बाद बवाल हो गया। घटना से आक्रोशित साथी कर्मचारियों ने हंगामा कर दिया। इतना ही नहीं आक्रोशित कर्मचारियों ने म्योहाल से जुड़े बेली, म्योहाल समेत कई सब स्टेशनों की बिजली काट दी जिससे शहर उत्तरी के ज्यादातर इलाकों में गंभीर बिजली संकट खड़ा हो गया।
लाइनमैन की मौत और कर्मचारियों के हंगामे की जानकारी पाकर विभागीय अधिकारी मौकेपर पहुंचे और स्थिति को संभाला। समाचार लिखे जाने तक कर्मचारियों का हंगामा जारी था। कर्मचारी मृतक लाइनमैन के परिजनों को दस लाख की आर्थिक सहायता व घटना के दोषी अभियंताओं, कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। दूसरी ओर लाइनमैन की मौत के बाद घटना की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
रसूलाबाद निवासी रामगणेश बिजली विभाग में लाइनमैन था। घटनाक्रम के लाइनमैन रामगणेश बुधवार को चार बजे सलोरी रेलवे क्रासिंग केपास पोल पर चढ़कर मरम्मत कर रहा था। इसी बीच अचानक लाइन में करंट आ गया। करंट की गिरफ्त में आकर लाइनमैन रामगणेश झुलस गया और पोल से नीचे जा गिरा। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। दुर्घटना के बाद रामगणेश को तत्काल एसआरएन अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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लाइनमैन रामगणेश की करंट से झुलसकर मौत की जानकारी जैसे ही साथी लाइनमैनों को हुई तो उन्होंने हंगामा कर दिया।
लाइनमैनों ने म्योहाल, बेली, सब स्टेशनों की बिजली काट दी जिससे शहर उत्तरी के ज्यादातर हिस्सों में गंभीर बिजली संकट खड़ा हो गया। घटना की जानकारी विभागीय अधिकारियाें को दी गई तो अधीक्षण अभियंता, अधिशासी, सहायक अभियंता मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित कर्मचारियोें को समझाने बुझाने का प्रयास किया लेकिन कर्मचारी नहीं माने।
दूसरी ओर बिजली कटौती से हलाकान दर्जनों उपभोक्ताओं ने रात आठ बजे म्योहाल बिजली घर पर धावा बोल दिया। उपभोक्ताओं के हंगामे को देख बिजली घर पर तैनात कर्मचारी भाग निकले। बाद में सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला। आखिरकार बाद में बिजली घर पहुंचे अभियंताओं ने जैसे तैसे बिजली आपूर्ति बहाल करायी।
दूसरी ओर बिजली कटौती से आक्रोशित विवि छात्रों ने हिंदू हास्टल चौराहे पर चक्का जाम कर दिया जिससे यातायात बाधित हो गया। छात्रों के चक्का जाम और यातायात बाधित होने की जानकारी पुलिस को हुई तो मौकेपर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभाला। आखिरकार पुलिसकर्मियों के इस आश्वासन पर बिजली आपूर्ति बहाल की जा रही है तब जाकर छात्रों ने चक्का जाम समाप्त किया उसके बाद ही पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली।
करंट से झुलसकर रामगणेश की मौत ने विभाग में लाइनमैनों के सुरक्षा इंतजामों की भी कलई खोलकर रख दी है। सवाल उठता है कि जब लाइनमैन शट डाउन लेकर मरम्मत करने गया था तो भला कैसे करंट आ गया? ज्ञात हो कि इससे पहले भी कई लाइनमैनों की मौत इन्हीं परिस्थितियों में हो चुकी है। लेकिन विभागीय स्तर पर लाइन मैनों की सुरक्षा के कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब जबकि लाइन मैन रामगणेश की हादसे में मौत हो चुकी है तो विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
लाइनमैनों की सुरक्षा को लेकर अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी जिसमें लाइन मैनों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए गए थे। विभागीय लाइनमैन कितनी विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाइनमैनों के पास दस्ताना, जूता, सिक्योरिटी चेन, समेत कुछ भी नहीं है। यह स्थिति तब है जबकि उपकरणों की खरीद मद में बाकायदा बजट जारी किया जाता है। लाइनमैनों की ही मानें तो उनके पास सुरक्षा उपकरणों के नाम पर कुछ भी नही है। जबकि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को न जाने कितनी बार अवगत कराया जा चुका है।
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लाइनमैन की मौत और कर्मचारियों के हंगामे की जानकारी पाकर विभागीय अधिकारी मौकेपर पहुंचे और स्थिति को संभाला। समाचार लिखे जाने तक कर्मचारियों का हंगामा जारी था। कर्मचारी मृतक लाइनमैन के परिजनों को दस लाख की आर्थिक सहायता व घटना के दोषी अभियंताओं, कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। दूसरी ओर लाइनमैन की मौत के बाद घटना की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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रसूलाबाद निवासी रामगणेश बिजली विभाग में लाइनमैन था। घटनाक्रम के लाइनमैन रामगणेश बुधवार को चार बजे सलोरी रेलवे क्रासिंग केपास पोल पर चढ़कर मरम्मत कर रहा था। इसी बीच अचानक लाइन में करंट आ गया। करंट की गिरफ्त में आकर लाइनमैन रामगणेश झुलस गया और पोल से नीचे जा गिरा। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। दुर्घटना के बाद रामगणेश को तत्काल एसआरएन अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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लाइनमैन रामगणेश की करंट से झुलसकर मौत की जानकारी जैसे ही साथी लाइनमैनों को हुई तो उन्होंने हंगामा कर दिया।
लाइनमैनों ने म्योहाल, बेली, सब स्टेशनों की बिजली काट दी जिससे शहर उत्तरी के ज्यादातर हिस्सों में गंभीर बिजली संकट खड़ा हो गया। घटना की जानकारी विभागीय अधिकारियाें को दी गई तो अधीक्षण अभियंता, अधिशासी, सहायक अभियंता मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित कर्मचारियोें को समझाने बुझाने का प्रयास किया लेकिन कर्मचारी नहीं माने।
दूसरी ओर बिजली कटौती से हलाकान दर्जनों उपभोक्ताओं ने रात आठ बजे म्योहाल बिजली घर पर धावा बोल दिया। उपभोक्ताओं के हंगामे को देख बिजली घर पर तैनात कर्मचारी भाग निकले। बाद में सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला। आखिरकार बाद में बिजली घर पहुंचे अभियंताओं ने जैसे तैसे बिजली आपूर्ति बहाल करायी।
दूसरी ओर बिजली कटौती से आक्रोशित विवि छात्रों ने हिंदू हास्टल चौराहे पर चक्का जाम कर दिया जिससे यातायात बाधित हो गया। छात्रों के चक्का जाम और यातायात बाधित होने की जानकारी पुलिस को हुई तो मौकेपर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभाला। आखिरकार पुलिसकर्मियों के इस आश्वासन पर बिजली आपूर्ति बहाल की जा रही है तब जाकर छात्रों ने चक्का जाम समाप्त किया उसके बाद ही पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली।
करंट से झुलसकर रामगणेश की मौत ने विभाग में लाइनमैनों के सुरक्षा इंतजामों की भी कलई खोलकर रख दी है। सवाल उठता है कि जब लाइनमैन शट डाउन लेकर मरम्मत करने गया था तो भला कैसे करंट आ गया? ज्ञात हो कि इससे पहले भी कई लाइनमैनों की मौत इन्हीं परिस्थितियों में हो चुकी है। लेकिन विभागीय स्तर पर लाइन मैनों की सुरक्षा के कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब जबकि लाइन मैन रामगणेश की हादसे में मौत हो चुकी है तो विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
लाइनमैनों की सुरक्षा को लेकर अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी जिसमें लाइन मैनों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए गए थे। विभागीय लाइनमैन कितनी विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाइनमैनों के पास दस्ताना, जूता, सिक्योरिटी चेन, समेत कुछ भी नहीं है। यह स्थिति तब है जबकि उपकरणों की खरीद मद में बाकायदा बजट जारी किया जाता है। लाइनमैनों की ही मानें तो उनके पास सुरक्षा उपकरणों के नाम पर कुछ भी नही है। जबकि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को न जाने कितनी बार अवगत कराया जा चुका है।