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बंद फैक्ट्री मालिक ने मजदूरों को घर पहुंचाने की मांगी अनुमति
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लॉकडाउन में कारखानों तथा अन्य निर्माण इकाइयों पर फंसे मजदूरों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। कारखाना संचालक भी अब भोजन उपलब्ध कराने में असमर्थता जता रहे हैं। दो कंपनियों के संचालकों ने कंट्रोल रूम में फोन करके मजदूरों को पहुंचाने के लिए पास तथा भोजन की मांग की है।
छोटी कंपनियों, कारखानों तथा निर्माण इकाइयों पर सैकड़ों मजदूर फंसे हुए हैं। अभी इन्हें संचालकों की ओर भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के इंतजाम किए जा रहे हैं लेकिन एक महीने से भी अधिक अवधि बितने के बाद वे भी अब पीछे हटने लगे हैं। ऐसी ही एक कंपनी के प्रबंधक ने कंट्रोल रूम में फोन करके मजदूरों के लिए भोजन की मांग की। साथ में यह भी मांग की किए एक वाहन पास उपलब्ध करा दिया जाए। वह खुद मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था कर देंगे। ऐसे ही कंपनी के संचालक का कहना था कि कारखाना चलाने की अनुमति तो मिल गई है लेकिन शर्तों का पालन कठिन हैं। इसलिए कारखाना अभी शुरू कर पाना मुश्किल है। ऐसे में जो मजदूर घर नहीं जा पाए और कारखाना में फंसे हैं उनके खाना आदि का इंतजाम अब मुश्किल हो रहा है।
प्रयागराज के बजाय पहुंचे कहीं और
दूसरे राज्याें और जिलों में फंसे मजदूरों तथा अन्य लोगों को नई-नई समस्याआें का सामना करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में फंसे एक गांव के 13 लोग समस्याओं से आजिज आकर में प्रयागराज के लिए पैदल ही चल दिए लेकिन मुसीबतों ने यहां भी उनका साथ नहीं छोड़ा। वे रास्ता भटक गए और दूसरी तरफ निकल गए। बुधवार को उन लोगों ने यहां के कंट्रोल रूम में फोन करके अपनी समस्या बताई और घर पहुंचाने में मदद की गुहार लगाई लेकिन यहां के अफसरों ने असमर्थता जताई। उनसे वहीं के प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा गया।
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यहां फंसे हैं दूसरे राज्य, जिले चार हजार से अधिक मजदूर
जिले में दूसरे राज्य जिले से आकर फंसे मजदूरों की संख्या चार से अधिक है। यह वह संख्या है, जिनका विवरण श्रम विभाग ने तैयार कर लिया है। यह सूची केंद्र सरकार को भी भेज दी गई है। हालांकि, इनकी वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। अन्य मजदूरों का भी विवरण तैयार किया जा रहा है।
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छोटी कंपनियों, कारखानों तथा निर्माण इकाइयों पर सैकड़ों मजदूर फंसे हुए हैं। अभी इन्हें संचालकों की ओर भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के इंतजाम किए जा रहे हैं लेकिन एक महीने से भी अधिक अवधि बितने के बाद वे भी अब पीछे हटने लगे हैं। ऐसी ही एक कंपनी के प्रबंधक ने कंट्रोल रूम में फोन करके मजदूरों के लिए भोजन की मांग की। साथ में यह भी मांग की किए एक वाहन पास उपलब्ध करा दिया जाए। वह खुद मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था कर देंगे। ऐसे ही कंपनी के संचालक का कहना था कि कारखाना चलाने की अनुमति तो मिल गई है लेकिन शर्तों का पालन कठिन हैं। इसलिए कारखाना अभी शुरू कर पाना मुश्किल है। ऐसे में जो मजदूर घर नहीं जा पाए और कारखाना में फंसे हैं उनके खाना आदि का इंतजाम अब मुश्किल हो रहा है।
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प्रयागराज के बजाय पहुंचे कहीं और
दूसरे राज्याें और जिलों में फंसे मजदूरों तथा अन्य लोगों को नई-नई समस्याआें का सामना करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में फंसे एक गांव के 13 लोग समस्याओं से आजिज आकर में प्रयागराज के लिए पैदल ही चल दिए लेकिन मुसीबतों ने यहां भी उनका साथ नहीं छोड़ा। वे रास्ता भटक गए और दूसरी तरफ निकल गए। बुधवार को उन लोगों ने यहां के कंट्रोल रूम में फोन करके अपनी समस्या बताई और घर पहुंचाने में मदद की गुहार लगाई लेकिन यहां के अफसरों ने असमर्थता जताई। उनसे वहीं के प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा गया।
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यहां फंसे हैं दूसरे राज्य, जिले चार हजार से अधिक मजदूर
जिले में दूसरे राज्य जिले से आकर फंसे मजदूरों की संख्या चार से अधिक है। यह वह संख्या है, जिनका विवरण श्रम विभाग ने तैयार कर लिया है। यह सूची केंद्र सरकार को भी भेज दी गई है। हालांकि, इनकी वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। अन्य मजदूरों का भी विवरण तैयार किया जा रहा है।