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किरायेदारी से जुड़े दीवानी विवाद को आपराधिक मामला नहीं मान सकते : कोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jul 2026 02:12 AM IST
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Civil dispute related to tenancy cannot be treated as a criminal case: Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किरायेदारी से जुड़े दीवानी विवाद को आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने दिया है। कोर्ट ने बुलंदशहर निवासी याची कैशियर ललित कुमार उर्फ ललित आर्य की दीवानी विवाद में एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामले में जारी समन आदेश रद्द करने की मांग स्वीकार कर ली।
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मामला खुर्जा नगर क्षेत्र स्थित आर्य समाज मंदिर परिसर के पास दुकान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मंदिर के पास कमरा लेकर दुकान चलाता था। उसने मंदिर के कैशियर पर 12 मार्च 2023 को मारपीट करने और जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित करने का आरोप लगाया था। नौ अप्रैल 2024 को एफआईआर दर्ज कराई थी।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पुलिस को अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले और केवल ललित कुमार के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई। इसके आधार पर बुलंदशहर के विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) ने आठ जुलाई 2024 को समन आदेश जारी किया।
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एफआईआर में देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। साथ ही दोनों पक्षों के बीच मंदिर की दुकान की किरायेदारी को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। इसलिए दुर्भावना के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि पुलिस को दिए बयान के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच किरायेदारी संबंधी विवाद पहले से मौजूद था। एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध तभी बनता है, जब सार्वजनिक दृष्टि में केवल जाति के आधार पर अपमानित करने का स्पष्ट उद्देश्य हो। इस मामले में ऐसे आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं हुए।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के स्वर्ण सिंह, गोरीगे पेंटैया, हितेश वर्मा, इंदर मोहन गोस्वामी और गंगाधर कलिता मामलों के फैसलों का हवाला दिया। कहा, दीवानी विवादों में दबाव बनाने के लिए आपराधिक कार्यवाही का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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