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हाईकोर्ट : वाणिज्यिक और समझौते में धोखाधड़ी का केस लिखने से पहले सरकारी वकील की सलाह जरूरी, डीजीपी को निर्देश
Sat, 11 May 2024 01:06 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 11 May 2024 01:06 PM IST
सार
साथ ही कोर्ट ने निदेशक अभियोजन को भी निर्देश दिया कि वह संबंधित सभी सरकारी वकीलों को इस बारे में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें। यह भी कि इस आदेश का पालन किए बगैर पुलिस अधिकारी ने एफआईआर दर्ज की तो वह कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी।
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अदालत।
- फोटो : ANI
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट का कहना है कि वाणिज्यिक, नागरिक व समझौते से संबंधित विवाद में मुकदमा करने से पहले संबंधित जिलों के सरकारी वकील से सलाह लेनी चाहिए। न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान व न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की कोर्ट ने कानपुर के सोने लाल व अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान डीजीपी को निर्देश दिया कि वह प्रदेश के सभी एसएसपी को निर्देशित करें कि मुकदमा दर्ज करने से पहले जिस एफआईआर में सिविल/व्यावसायिक विवाद हो, वहां सरकारी वकील की राय जरूर लें।
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साथ ही कोर्ट ने निदेशक अभियोजन को भी निर्देश दिया कि वह संबंधित सभी सरकारी वकीलों को इस बारे में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें। यह भी कि इस आदेश का पालन किए बगैर पुलिस अधिकारी ने एफआईआर दर्ज की तो वह कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी।
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कोर्ट ने प्रदेश के सभी मजिस्ट्रेट को भी धारा 156 (3) के तहत एफआईआर दर्ज करने सहित शिकायत का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने के लिए कहा। यह भी कि निदेशक न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान, लखनऊ राज्य के सभी मजिस्ट्रेट को पालन की जाने वाली सही प्रक्रिया के बारे में जागरूक करें। इसके लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की सेवाएं लें।
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कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने सहित पुलिस महानिदेशक और निदेशक अभियोजन को अगली सुनवाई की तारीख से पहले आदेश के पालन में की गई कार्रवाई के बारे में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। कहा, उक्त आदेश का पालन 27 मई 2024 या उससे पहले नहीं किया जाता, तो पुलिस महानिदेशक और निदेशक अभियोजन 27 मई को दोपहर दो बजे न्यायालय में उपस्थित रहेंगे।