{"_id":"6603c390504621977c0c407d","slug":"ban-on-beautification-of-ram-janaki-and-budhenath-temple-petitioners-claim-temple-is-their-ancestral-proper-2024-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट : राम जानकी और बूढ़ेनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण पर रोक, याचियों का दावा - मंदिर उनकी पैतृक संपत्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट : राम जानकी और बूढ़ेनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण पर रोक, याचियों का दावा - मंदिर उनकी पैतृक संपत्ति
Wed, 27 Mar 2024 12:28 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 27 Mar 2024 12:28 PM IST
सार
मामला प्रयागराज के भारतगंज नगर पंचायत में स्थित राम जानकी मंदिर और बूढ़ेनाथ मंदिर पर हो रहे अवैध कब्जे का है। याचियों का दावा है कि उनकी पैतृक संपत्ति पर बने मंदिर पर कुछ लोग कब्जा करना चाहते हैं। नगर पंचायत भारतगंज की संस्तुति पर दोनों मंदिरों को लावारिस घोषित कर दिया गया और वंदन योजना के तहत सौंदर्यीकरण के लिए चयनित कर लगभग एक करोड़ छह लाख रुपये का बजट भी पास कर दिया गया।
विज्ञापन
अदालत।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी भूमि पर बने राम जानकी और बूढ़ेनाथ मंदिर को लावारिस घोषित कर वंदन योजना के तहत होने वाले सौंदर्यीकरण पर रोक लगाते हुए सरकार से चार हफ्ते में जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कृष्ण गोपाल और एक अन्य की ओर से उनकी पैतृक भूमि पर बने मंदिर को वंदन योजना के तहत सौंदर्यीकरण के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया।
विज्ञापन
मामला प्रयागराज के भारतगंज नगर पंचायत में स्थित राम जानकी मंदिर और बूढ़ेनाथ मंदिर पर हो रहे अवैध कब्जे का है। याचियों का दावा है कि उनकी पैतृक संपत्ति पर बने मंदिर पर कुछ लोग कब्जा करना चाहते हैं। नगर पंचायत भारतगंज की संस्तुति पर दोनों मंदिरों को लावारिस घोषित कर दिया गया और वंदन योजना के तहत सौंदर्यीकरण के लिए चयनित कर लगभग एक करोड़ छह लाख रुपये का बजट भी पास कर दिया गया। जबकि यह जमीन याचियों के पूर्वजों के नाम वर्ष 1953 तथा 1953 से पहले के खसरे में दर्ज है।
विज्ञापन
यह भूमि राजा मांडा (तत्कालीन मांडा एस्टेट) ने उनके दादा वृंदावन को दी थी। तब से इस संपत्ति पर इनके पूर्वजों का कब्जा है। इस भूमि पर बने मंदिर की देखभाल के लिए एक केयर टेकर भी याचियों ने रखा था, उन्हें वेतन भी दिया जाता था। याचियों के वकील का कहना था कि निजी भूमि को लावारिस घोषित कर सरकार की वंदन योजना के तहत सौंदर्यीकरण का आदेश प्रशासन ने याचियों को सुनवाई का अवसर प्रदान किए बगैर पारित किया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने अपर जिलाधिकारी और जिलाधिकारी की ओर से वंदन योजना के तहत सौंदर्यीकरण के आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार से चार हफ्ते में जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 मई को होगी।