Approvel : माघ मेला 2024 में फिर इस्तेमाल किया जाएगा ऑस्ट्रेलिया का कीटनाशक स्प्रे
ऑस्ट्रेलिया की सेनजेंटा संस्था द्वारा तैयार लैमडा साइहेलोथ्रिन स्प्रे जलीय जीवों व मनुष्यों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। इसको छिड़कने से दाग लगने का डर नहीं रहता।
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तंबुओं की नगरी को मच्छर-मक्खी से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के लैमडा साइहेलोथ्रिन इंडोर स्प्रे का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पहले 2022 के माघ मेला में इस स्प्रे का प्रयोग किया गया था, जो असरकारी रहा। दूसरा प्रयोग सफल रहा तो 2025 के महाकुंभ में इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया की सेनजेंटा संस्था द्वारा तैयार लैमडा साइहेलोथ्रिन स्प्रे जलीय जीवों व मनुष्यों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। इसको छिड़कने से दाग लगने का डर नहीं रहता। आंखों में जलन पैदा नहीं होती और न ही दुर्गंध आती है। मेला क्षेत्र में लगने वाले सभी टेंटों में साइहेलोथ्रिन स्प्रे किया जाएगा। अन्य स्थानों पर फॉगिंग होगी। एक बार स्प्रे होने के बाद 90 दिनों तक टेंट के अंदर मच्छर-मक्खी व अन्य कीटों का प्रवेश नहीं हाे सकेगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा इस स्प्रे को पहले ही मान्यता दी जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो स्प्रे करने के बाद अगर बारिश होती है और स्प्रे रिसकर गंगा नदी में चला जाता है तो इसका इंसानों के शरीर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
एम्स में हो रहा इस्तेमाल
लैमडा साइहेलोथ्रिन स्प्रे का इस्तेमाल दिल्ली के एम्स अस्पताल, मुंबई महानगर पालिका, अहमदाबाद सहित कई अन्य राज्यों में हो रहा है। इन सभी जगहों पर इस कीटनाशक के परिणाम सकारात्मक देखने को मिले हैं।
इस स्प्रे से श्रद्धालुओं को मच्छर-मक्खी व अन्य कीटनाशकों से राहत मिलेगी। महाकुंभ से पहले इस स्प्रे का प्रयोग माघ मेला में किया जाएगा। यह जलीय जीवों व मनुष्यों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। - डॉ. वीके सिंह, संयुक्त निदेशक (स्वास्थ्य)