इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के प्रोफ़ेसर रजनीश कुमार श्रीवास्तव ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने में मदद करेगा। यह सॉफ्टवेयर मोबाइल फोन के जरिये आसानी से उपयोग में लाया जा सकता है। उन्होंने इस सॉफ्टवेयर को 'मोबाइल क्यू' का नाम दिया है।
प्रोफेसर चाहते हैं कि सरकार इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करे ताकि लोगों को एक जगह इकट्ठा होने से रोका जा सके। लॉक डाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए मोबाइल क्यू साफ्टवेयर काफी कारगर सबित हो सकता है। इसके उपयोग से अस्पतालों, राशन की दुकानों में भीड़ को इकट्ठा होने से रोका जा सकता है। प्रो. रजनीश के अनुसार इस साफ्टवेयर को किसी फोन पर अपलोड करने की जरूरत नहीं है। इसके केवल एक जगह अपलोड करना है और इसके बाद सभी को इसका फायदा मिलेगा।
उदाहरण के तौर पर अगर ओपीडी में बैठे किसी डॉक्टर के कंप्यूटर पर इस सॉफ्टेयर को अपलोड कर दिया जाता है तो मरीजों को लाइन नहीं लगानी होगी। उन्हें घर बैठे मालूम हो जाएगा कि उनका नंबर कब आएगा। इसी तरह राशन की दुकान में इकट्ठा हो रही भीड़ को भी रोका जा सकता है। सिर्फ दुकानदार के कंप्यूटर पर इस सॉफ्टवेयर को अपलोड करना होगा और ग्राहकों को घर बैठे पता चल जाएगा कि उनका नंबर कब आएगा और कितनी देर में उन्हें दुकान पहुंचना है।
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social distancing formula
- फोटो : amar ujala
यह साफ्टवेयर हर वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, सो घर बैठे मरीजों या ग्राहकों के मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से मैसेज आएगा। इसके लिए इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि इस साफ्टवेयर को अपग्रेड किया जा सकता है और व्हाट्स एप के माध्यम से भी सूचनाएं प्रेषित की जा सकती हैं।
इसके अलावा जब किसी कॉलोनी में कोई डिलेवरी वैन पहुंचती है तो वहां दूध, फल, सब्जी जैसे जरूरत के सामान खरीदने के लिए भीड़ लग जाती है। वहां भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने में यह सॉफ्टवेयर काफी मददगार साबित हो सकता है। प्रो. रजनीश का कहना है कि उन्होंने एक क्नीनिक में इसका सफल प्रयोग किया है। इसमें थोड़े बहुत सुधार की गुंजाइश है। सरकार चाहते तो सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने के लिए इस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सकती है।.