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प्रयागराज : कचहरी में दरोगा को दूसरी मंजिल से नीचे फेंकने की कोशिश, अशरफ के खिलाफ दर्ज कराने आया था बयान
Sat, 19 Nov 2022 11:49 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 19 Nov 2022 11:49 PM IST
सार
कचहरी परिसर में बयान देकर लौट रहे दरोगा नित्यानंद सिंह को दूसरी मंजिल से नीचे फेंकने की कोशिश की गई। इससे पहले धक्कामुक्की के साथ ही गालीगलौज करते हुए धमकाया भी गया।
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- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
कचहरी परिसर में बयान देकर लौट रहे दरोगा नित्यानंद सिंह को दूसरी मंजिल से नीचे फेंकने की कोशिश की गई। इससे पहले धक्कामुक्की के साथ ही गालीगलौज करते हुए धमकाया भी गया। भुक्तभोगी ने कर्नलगंज थाने में एक नामजद व चार अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कराई है। भुक्तभोेगी दरोगा मौजूदा समय में गोरखपुर में तैनात हैं। इससे पहले वह धूमनगंज थाने में तैनात रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि माफिया अतीक अहमद के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ पर कोर्ट के आदेश के अवमानना में 2019 में एक मुकदमा दर्ज किया गया था।
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इसी मुकदमे में वह बयान देने के लिए कचहरी परिसर आए थे। आरोप है कि शाम को बयान देकर लौटते वक्त लालजी उर्फ पिंटू तिवारी आया और धूमनगंज के एक पूर्व के मुकदमे को लेकर धक्कामुक्की करने लगा। यही नहीं दूसरे तल से नीचे फेंकने की भी कोशिश की।
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आरोपी ने गालीगलौज करने के साथ ही धमकी भी दी। इस दौरान कांस्टेबल पैरोकार धर्मेंद्र यादव व एक अधिवक्ता आए और उन्होंने बीचबचाव कर किसी तरह उन्हें बचाया। दरोगा का आरोप है कि आरोपी के साथ तीन-चार अन्य लोग भी थे। इंस्पेक्टर राममोहन राय ने बताया कि सरकारी काम में बाधा पहुंचाने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। जांच पड़ताल की जा रही है।
अंतिम रिपोर्ट लगने से था नाराज
भुक्तभोगी दरोगा ने बताया कि धूमनगंज में तैनाती के दौरान उन्होंने एक मुकदमे की विवेचना की थी। विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर ही उन्होंने अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। आरोप है कि लालजी ने पैरवी कर मुकदमे की पुनर्विवेचना कराई लेकिन दूसरे विवेचक ने भी एफआर लगाई। इसी को लेकर आरोपी उनसे नाराज था। इसी खुन्नस में उसने यह घटना की।
अंतिम रिपोर्ट लगने से था नाराज
भुक्तभोगी दरोगा ने बताया कि धूमनगंज में तैनाती के दौरान उन्होंने एक मुकदमे की विवेचना की थी। विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर ही उन्होंने अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। आरोप है कि लालजी ने पैरवी कर मुकदमे की पुनर्विवेचना कराई लेकिन दूसरे विवेचक ने भी एफआर लगाई। इसी को लेकर आरोपी उनसे नाराज था। इसी खुन्नस में उसने यह घटना की।