असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड भर्ती का मामला : अर्हता के मसले पर सुप्रीम कोर्ट जाएगा यूपीएचईएससी
प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या-51 के तहत बीएड विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की अर्हता को लेकर उच्च न्यायालय की ओर से जारी आदेश को उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा।
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प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या-51 के तहत बीएड विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की अर्हता को लेकर उच्च न्यायालय की ओर से जारी आदेश को उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। आयोग की ओर से जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी।
विज्ञापन संख्या-51 के तहत अशासकीय महाविद्यालयों में विभिन्न विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों पर भर्ती होनी है। इसके लिए अगस्त-2022 में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 1.14 लाख अभ्यर्थियों ने दावेदारी की है। बीएड विषय में अर्हता को लेकर पेच फंसा हुआ है। असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड की 93 सीटों पर भर्ती होनी है।
आयोग असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुसार करता है। एक अभ्यर्थी ने पिछले दिनों हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नेशनल काउंसिल टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) की ओर से निर्धारित मानकों के अनुसार कराई जाए।
इस मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि एनसीटीई से नियमों के तहत भर्ती कराई जाए और पूर्व में जारी विज्ञापन निरस्त करते हुए पुनर्विज्ञापन जारी किया जाएगा। साथ ही पूर्व में आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों के आवेदन शुल्क वापस किए जाएं। अब आयोग के सामने बड़ी संख्या ऑनलाइन आवेदन शुल्क लौटाने की है।
दरअसल, तमाम अभ्यर्थियों ने साइबर कैफे के माध्यम से ऑनलाइन शुल्क का भुगतान किया था। ऐसे में आयोग को आशंका है कि अगर शुल्क लौटाया जाता है तो वह सही अभ्यर्थी तक पहुंचेगा या नहीं। आयोग के उपसचिव शिवजी मालवीय का कहना है कि इस मसले पर आयोग ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में आयोग की ओर से याचिका दाखिल की जाएगी।