Prayagraj : इलाहाबाद विवि को मिला 1971 की लड़ाई का हिस्सा रहा टी-55 टैंक, कुलपति ने किया लोकार्पण
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के विज्ञान संकाय परिसर में स्थापित टी-55 टैंक का कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने स्वतंत्रता दिवस पर लोकार्पण किया। यह टैंक 1960 के दशक के अंत में भारतीय सेना को मिला था।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के विज्ञान संकाय परिसर में स्थापित टी-55 टैंक का कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने स्वतंत्रता दिवस पर लोकार्पण किया। यह टैंक 1960 के दशक के अंत में भारतीय सेना को मिला था। 1971 की लड़ाई समेत कई अहम मौकों पर इन टैंक ने देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने में अहम योगदान दिया था। इसके बाद इन टैंक को प्रशिक्षण और वॉर मेमोरियल के लिए संरक्षित कर दिया गया। टी-55 सोवियत युग का एक मध्यम टैंक है जिसे 1966 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था। इसने 1971 के भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और मई 2011 तक सेवा में रहा।
कई टी-55 टैंक अब युद्ध ट्रॉफी के रूप में या सैन्य स्टेशनों और शैक्षणिक संस्थानों सहित विभिन्न स्थानों पर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए स्थापित किए जाते हैं। प्रयागराज में भी कई जगह इस टैंक को स्थापित किया गया है। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि हमें चिंतन करना है कि देश के विकास में किस प्रकार अपना योगदान दें। शिक्षा संस्थान ऐसे स्थान होते हैं जहां पर नवीन सोच जन्म लेती है।
कुलपति ने कहा कि इविवि में सत्र 2025-2026 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह से लागू किया गया है। चतुर्थ वर्ष में केवल मेधावी विद्यार्थियों को ही मौका मिलेगा। ऐसे में खुद को बेहतर बनाने में लग जाएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में एक-दो विषय पढ़कर जीवन में सफलता नहीं मिल पा रही है। इविवि में एक पाठ्यक्रम के दौरान कई विषय पढ़ने का अवसर मिलेगा जिससे आपकी प्रतिभा निखरेगी।
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