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कोरोना काल में सिपाही के तबादले पर रोक
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allahabad highcourt news
-हाईकोर्ट ने कहा कांस्टेबल जहां काम कर रहा है, वहीं करता रहेगा
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के तेजी से हो रहे प्रसार के बीच पुलिस कांस्टेबल के तबादले के आदेश को सही न मानते हुए स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची जहां काम कर रहा है, वहीं करता रहेगा।
इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी तलब किया है। यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा ने पुलिस कांस्टेबल आशुतोष त्रिपाठी की याचिका पर दिया है। याची का तबादला आगरा से कासगंज सात मार्च 20 को कर दिया गया था। उसे पांच जून को रिलीव किया गया, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।
याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि सरकार ने 12 मई 20 को शासनादेश लाकर सभी प्रकार के तबादलों पर रोक लगा दी है। सरकार की मंशा है कि कोविड-19 महामारी के प्रसार को देखते हुए किसी भी प्रकार का आवागमन नहीं होना चाहिए। कहा गया कि प्रदेश में इस महामारी का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इस प्रकार के तबादलों से शासनादेश का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। संक्रमण का प्रसार खत्म होने तक तबादला नहीं करने के निर्णय पर अमल किया जाना चाहिए।
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याचिका में यह भी कहा गया था कि याची का स्थानांतरण शिकायत पर किया गया है । शिकायत की सत्यता को जांचे बिना तबादला करना दंड स्वरूप माना जाएगा तथा बिना सुनवाई का अवसर दिए स्थानांतरण करना गलत है। कोर्ट याचिका पर पांच सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।
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प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के तेजी से हो रहे प्रसार के बीच पुलिस कांस्टेबल के तबादले के आदेश को सही न मानते हुए स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची जहां काम कर रहा है, वहीं करता रहेगा।
इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी तलब किया है। यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा ने पुलिस कांस्टेबल आशुतोष त्रिपाठी की याचिका पर दिया है। याची का तबादला आगरा से कासगंज सात मार्च 20 को कर दिया गया था। उसे पांच जून को रिलीव किया गया, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।
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याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि सरकार ने 12 मई 20 को शासनादेश लाकर सभी प्रकार के तबादलों पर रोक लगा दी है। सरकार की मंशा है कि कोविड-19 महामारी के प्रसार को देखते हुए किसी भी प्रकार का आवागमन नहीं होना चाहिए। कहा गया कि प्रदेश में इस महामारी का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इस प्रकार के तबादलों से शासनादेश का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। संक्रमण का प्रसार खत्म होने तक तबादला नहीं करने के निर्णय पर अमल किया जाना चाहिए।
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याचिका में यह भी कहा गया था कि याची का स्थानांतरण शिकायत पर किया गया है । शिकायत की सत्यता को जांचे बिना तबादला करना दंड स्वरूप माना जाएगा तथा बिना सुनवाई का अवसर दिए स्थानांतरण करना गलत है। कोर्ट याचिका पर पांच सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।