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इलाहाबाद हाईकोर्ट : जमीन को लेकर दलाई लामा के खिलाफ जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने किया खारिज

Wed, 12 Jul 2023 04:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 12 Jul 2023 04:53 PM IST
सार

याची की ओर से कहा गया कि वह शिक्षिका हैं और रोटरी क्लब कुशीनगर की सक्रिय सदस्य हैं। समाचार पत्रों के माध्यम से उनको यह जानकारी प्राप्त हुई। उसने दलाई लामा के भारतीय नागरिक होने की जानकारी गृह मंत्रालय से मांगी।

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Allahabad High Court: High Court dismisses PIL against Dalai Lama regarding land
बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के खिलाफ यूपी राजस्व संहिता के तहत कुशीनगर जिले में उनके नाम पर संपत्ति अधिग्रहण की चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची यह बता पाने में असमर्थ रही कि दलाई लामा ने भूमि खरीदने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति नहीं ली। लिहाजा कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। शोभा सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ विचार कर रही थी।

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याची की ओर से कहा गया कि वह शिक्षिका हैं और रोटरी क्लब कुशीनगर की सक्रिय सदस्य हैं। समाचार पत्रों के माध्यम से उनको यह जानकारी प्राप्त हुई। उसने दलाई लामा के भारतीय नागरिक होने की जानकारी गृह मंत्रालय से मांगी। जवाब मिला कि वह भारतीय नागरिक नहीं है। याची ने कहा कि यूपी राजस्व संहिता 2006 की धारा 90 के साथ पठित जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 की धारा 154ए के तहत कोई विदेशी व्यक्ति भारत में संपत्ति का स्वामित्व नहीं हासिल कर सकता है।
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याची ने दलाई लामा के नाम अधिगृहीत भूमि को जनता के हित में निहित करने की मांग की। कोर्ट ने कहा है कि राजस्व संहित की धारा 90 के तहत एक प्रावधान है। जिसके तहत कोई विदेशी व्यक्ति राज्य सरकार से लिखित अनुमति प्राप्त करने के बाद किसी संपत्ति पर अधिकार प्राप्त कर सकता है।
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बताया गया कि याची द्वारा जिस जमीन की बात कही जा रही है, वह एक अनुयाई के बेटे ने दलाई लामा को दान में दी थी। रजिस्ट्री उनके नाम पर की गई थी और 2010 तक उक्त संपत्ति के लिए उनके द्वारा विधिवत कृषि कर भुगतान किया गया था। इसके बाद, राज्य सरकार ने क्षेत्र के किसानों को उनके बकाया कर का भुगतान करने से छूट दे दी।

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