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बाढ़ के खतरों से निपटने को बने ड्रेनेज योजना
Allahabad
Updated Sun, 10 Nov 2013 05:39 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। शहर में जलभराव की समस्या खत्म करने के लिए नगर निगम ने नौ अरब रुपये से अधिक की योजना तो बना ली लेकिन इसमें बाढ़ से होने वाले खतरों का ध्यान नहीं रखा गया। बाढ़ के दौरान जलस्तर खतरे के निशान 81 मीटर पर पहुंचते ही पंपिंग स्टेशनों के गेट बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में शहर का गंदा पानी पंपों के जरिए बाहर निकाला जाता है। जिला अनुश्रवण समिति एवं राष्ट्रीय नदी संरक्षण कार्यक्रम के सदस्य कमलेश सिंह ने इस योजना में कुछ खामियों को दूर करने को कहा है। उन्होंने बाढ़ के खतरे को देखते हुए योजना में संशोधन के संबंध में सुझाव भी दिए हैं।
नगर निगम ने इलाहाबाद में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के तहत दो चरणों की योजना बनाई है। जेएनएनयूआरएम के तहत होने वाले इस काम में सभी नालों को दुरुस्त करना, नए नालों का निर्माण, पंपिंग स्टेशनों को दुरुस्त और नए पंप लगाना, सहित अन्य काम होना है। पिछले दिनों नगर निगम कार्यकारिणी के समक्ष इसका प्रजेंटेशन हुआ। इसके बाद स्थलीय निरीक्षण के लिए टीम बनाई गई है। टीम ने अपना काम भी शुरू कर दिया है ताकि शासन को जल्द रिपोर्ट भेजकर रकम स्वीकृत कराई जा सके। इस बीच कमलेश सिंह ने योजना में आवश्यक संशोधन के सुझाव दिए हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र लिखकर कहा है कि स्टार्म वाटर ड्रेनेज योजना में नदी का जलस्तर 78 मीटर के लेविल पर किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बार हुई भारी बारिश का हवाला देते हुए कम से कम पांच सौ मिलीमीटर बरसात को देखते हुए योजना तैयार करने का सुझाव दिया है। कई इलाकों में नए नाले का लेविल रेलवे लाइन के नीचे से ले जाने और शहर से प्रतिदिन निकलने वाले 540 एमएलडी गंदे पानी को ध्यान में रखने का सुझाव दिया है। उन्होंने योजना के निरीक्षण के लिए बनाई गई समिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। कहा है कि इसमें जिन अधिकारियों को रखा गया है, उन्होंने सीवरेज योजना डी फेल कर दी तथा पेयजल योजना की भी रेलवे से अनुमति नहीं पा सके। ऐसे में जल्दबाजी में योजना शुरू करने से रुपये की बरबादी होगी।
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नगर निगम ने इलाहाबाद में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के तहत दो चरणों की योजना बनाई है। जेएनएनयूआरएम के तहत होने वाले इस काम में सभी नालों को दुरुस्त करना, नए नालों का निर्माण, पंपिंग स्टेशनों को दुरुस्त और नए पंप लगाना, सहित अन्य काम होना है। पिछले दिनों नगर निगम कार्यकारिणी के समक्ष इसका प्रजेंटेशन हुआ। इसके बाद स्थलीय निरीक्षण के लिए टीम बनाई गई है। टीम ने अपना काम भी शुरू कर दिया है ताकि शासन को जल्द रिपोर्ट भेजकर रकम स्वीकृत कराई जा सके। इस बीच कमलेश सिंह ने योजना में आवश्यक संशोधन के सुझाव दिए हैं।
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उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र लिखकर कहा है कि स्टार्म वाटर ड्रेनेज योजना में नदी का जलस्तर 78 मीटर के लेविल पर किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बार हुई भारी बारिश का हवाला देते हुए कम से कम पांच सौ मिलीमीटर बरसात को देखते हुए योजना तैयार करने का सुझाव दिया है। कई इलाकों में नए नाले का लेविल रेलवे लाइन के नीचे से ले जाने और शहर से प्रतिदिन निकलने वाले 540 एमएलडी गंदे पानी को ध्यान में रखने का सुझाव दिया है। उन्होंने योजना के निरीक्षण के लिए बनाई गई समिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। कहा है कि इसमें जिन अधिकारियों को रखा गया है, उन्होंने सीवरेज योजना डी फेल कर दी तथा पेयजल योजना की भी रेलवे से अनुमति नहीं पा सके। ऐसे में जल्दबाजी में योजना शुरू करने से रुपये की बरबादी होगी।
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