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कुपोषण का शिकार हैं शिशुगृह के बच्चे
Allahabad
Updated Fri, 21 Jun 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। शिशुगृह के अधिकांश बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनके शरीर का वजन सामान्य बच्चों से काफी कम और हीमोग्लोबिन का औसत स्तर छह प्रतिशत है। हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को प्रशासन की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में यह चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। कोर्ट ने इन हालात पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान शिशुगृह में तैनात रहे या वहां के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्यों न मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया जाए।
आकांक्षा तिवारी और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि कई बच्चों की सेहत शिशुगृह लाए जाने के बाद बिगड़ गई। किसी भी बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट में उसके स्वास्थ्य पर अच्छी टिप्पणी नहीं लिखी गई है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे अपनी किस्मत से जिंदा हैं वरना आप लोगों ने तो उनको मार ही दिया था।
प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार से शिशुगृह संचालित करने के लिए अनुदान मिलता है। स्वयं सेवी संस्थाएं और प्राइवेट लोग भी कुछ दान देते हैं। शिशुगृह में एलसीडी टीवी, वाशिंग मशीन, आरओ, कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्यों न इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर पूछताछ की जाए। कोर्ट ने इस मामले में एक कोर्ट कमिश्नर को नियुक्त किया है जो शिशुगृह का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद न्यायालय उचित आदेश पारित करेगा। शिशुगृह को लेकर याचिका दाखिल करने वाले छात्र-छात्राओं में अभिषेक श्रीवास्तव, जुमी मथानी, शशांक तिवारी, हिना केशवानी, आकांक्षा तिवारी, वरुण टंडन, देवेश यादव और शेखर राजा के प्रयासोें की प्रशंसा की गई।
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आकांक्षा तिवारी और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि कई बच्चों की सेहत शिशुगृह लाए जाने के बाद बिगड़ गई। किसी भी बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट में उसके स्वास्थ्य पर अच्छी टिप्पणी नहीं लिखी गई है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे अपनी किस्मत से जिंदा हैं वरना आप लोगों ने तो उनको मार ही दिया था।
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प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार से शिशुगृह संचालित करने के लिए अनुदान मिलता है। स्वयं सेवी संस्थाएं और प्राइवेट लोग भी कुछ दान देते हैं। शिशुगृह में एलसीडी टीवी, वाशिंग मशीन, आरओ, कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्यों न इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर पूछताछ की जाए। कोर्ट ने इस मामले में एक कोर्ट कमिश्नर को नियुक्त किया है जो शिशुगृह का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद न्यायालय उचित आदेश पारित करेगा। शिशुगृह को लेकर याचिका दाखिल करने वाले छात्र-छात्राओं में अभिषेक श्रीवास्तव, जुमी मथानी, शशांक तिवारी, हिना केशवानी, आकांक्षा तिवारी, वरुण टंडन, देवेश यादव और शेखर राजा के प्रयासोें की प्रशंसा की गई।
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