Mahakumbh : छठे दिन 19 लाख 80 हजार लोगों ने लगाई डुबकी, छह किलो सोना पहनने वाले गोल्डेन बाबा खींच रहे ध्यान
महाकुंभ के छठे दिन शनिवार को प्रात: 10 बजे तक लगभग 19 लाख 80 हजार लोगों ने स्नान कर लिया था। यह जानकारी प्रशासन की ओर से साझा की गई। जानकारी के अनुसार छठे दिन 10 लाख से ज्यादा कल्पवासी और 9 लाख 84 हजार श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई।
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महाकुंभ के छठे दिन शनिवार को प्रात: 10 बजे तक लगभग 19 लाख 80 हजार लोगों ने स्नान कर लिया था। यह जानकारी प्रशासन की ओर से साझा की गई। जानकारी के अनुसार छठे दिन 10 लाख से ज्यादा कल्पवासी और 9 लाख 84 हजार श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई। वहीं 17 जनवरी दिन शुक्रवार को लगभग सात लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। 18 जनवरी तक संगम में सात लाख 72 हजार श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। महाकुंभ में बाबाओं का अलग अंदाज, लोगों का अपनी ओर ध्यान खींच रहा है।
महाकुंभ में बाबाओं का अलग- अलग स्वरूप भी लोगों का ध्यान उनकी ओर खींच रहा है। इन्हीं में से एक है गोल्डेन बाबा जो छह किलो सोना शरीर पर हर समय धारण किए रहते हैं। मीडिया से बात करते हुए गोल्डेन बाबा ने बताया कि छह किलो सोना पहनने के पीछे का क्या है कारण।
गोल्डेन बाबा ने बताया कि उनका नाम श्री श्री 1008 अनंत श्री विभूषित स्वामी नारायण नंद गिरिजी महाराज है। वह केरल के रहने वाले हैं और सनातन धर्म फाउंडेशन के अध्ध्यक्ष हैं। उनका संबंध निरंजनी अखाडे़ से है। इन आभूषणों को पहनने के उद्देश्य का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सभी आभूषण उन्हें सकारात्मक ऊर्जा देते हैं जो पूजा और प्रार्थना करने के लिए बहुत जरूरी है। आभूषण विभिन्न हिंदु देवी-देवताओं नटराज, नरसिंम्हा, मुरुगन भद्रकाली और अन्य को समर्पित हैं। इन आभूषणों में रुद्राक्ष, मूंगा, मणि, नीलम, पन्ना और अन्य कीमती पत्थर भी शामिल हैं। जिनका पूजा में इस्तेमाल होता है। उनके आभूषण में श्री यंत्र का निशान भी है।
उन्होंने बताया कि इस आभूषण में कुछ विशेषता है, यह आभूषण साढ़े छह किलो का है । जिसे वह पिछले 15 साल से पहन रहे हैं। आभूषण में जो रुद्राक्ष है उसे उनके पिता ने दिया था। इससे उन्हें एक साकारात्मक ऊर्जा मिलती है। जिसका संचार अन्य लोगों तक होता है। अगर वह पैंट-शर्ट पहन कर मेले में आते तो कोई उनका इंटरव्यू नहीं ले रहा होता। भगवान ने उन्हें एक माैका दिया है कि वह लोगों के बीच सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकें। इस महाकुंभ मेले में बहुत से लोगों ने अपने अलग नाम और पहचान से लोगों का ध्यान अपने ओर खींचा है।