{"_id":"62f5511794579c137a0d255c","slug":"one-gets-life-imprisonment-for-killing-a-villager-in-a-rivalry-related-to-jokes-aligarh-news-ali298013163","type":"story","status":"publish","title_hn":"मजाक से जुड़ी रंजिश में ग्रामीण की हत्या में एक को उम्रकैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजाक से जुड़ी रंजिश में ग्रामीण की हत्या में एक को उम्रकैद
विज्ञापन
गोंडा थाने के गांव कलुआ में 17 वर्ष पूर्व मजाक से जुड़ी रंजिश में हुई ग्रामीण की हत्या के एक दोषी को अदालत ने उम्रकैद व 75 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं इस घटना के चार अन्य आरोपियों को बरी किया गया है। खास बात है कि घटना के सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए थे, मगर पुलिस के साक्ष्यों के आधार पर यह सजा सुनाई गई है। यह फैसला एडीजे-6 महेशानंद झा की अदालत से सुनाया गया है।
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी स्वर्णलता वर्मा के अनुसार घटना 16 जून 2005 की शाम की है। मुकदमा गांव कलुआ के कारे सिंह द्वारा दर्ज कराया गया था। मुकदमे में आरोप के अनुसार गांव नाते से लगने वाला भतीजा ओमवीर वृंदावन से लौट रहा था, तभी उसे कलुआ व बेलौठ के बीच कुछ बदमाश मिले और लूटपाट व मारपीट करने लगे। इस दौरान ओमवीर के शोर पर वहां कारे सिंह का बेटा गुलवीर व गांव के अन्य लोग पहुंच गए। बीच-बचाव में बदमाशों द्वारा की गई फायरिंग में गुलवीर के गोली लगी और मारपीट में ओमवीर भी जख्मी हुआ। इस दौरान बदमाश भाग गए, जिनमें से दो को पहचान लिया गया। बाद में गुलवीर की मौत हो गई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया।
अभियोजन अधिवक्ता के अनुसार पुलिस विवेचना में तथ्य कुछ और ही उजागर हुआ। जांच में पाया गया कि यह हत्या खुद ओमवीर ने अपने भाई राजवीर, अन्य साथी दीवान, विजय सिंह व बहनोई रतिराम संग मिलकर की है। इसे लूट दर्शा कर पड़ोसी गांव के बदमाशों पर हत्या का दोष मढ़ दिया। उसी अनुसार मृत गुलवीर सिंह के पिता कारे सिंह को कहानी सुनाई और उन्होंने ओमवीर की बात मानते हुए लूट दर्शाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। इस आधार पर पुलिस ने ओमवीर, राजवीर, दीवान, विजय सिंह व रतिराम पर चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान मृतक परिवार के सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए। मगर पुलिस साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने ओमवीर को हत्या के लिए दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है, बाकी को बरी कर दिया है।
विज्ञापन
शादी वाले घर में मजाक में रंजिश
पुलिस विवेचना व अभियोजन साक्ष्यों के अनुसार गुलवीर सिंह की हत्या के ठीक अगले दिन उसके छोटे भाई की शादी थी। इससे दो-तीन दिन पहले से घर में शादी से जुड़े कार्यक्रम चल रहे थे। इसी बीच घटना से दो दिन पहले मृत गुलवीर की पत्नी संग आरोपी ओमवीर के बहनोई रतिराम ने मजाक किया। इस मजाक पर गुलवीर की पत्नी ने दूध का मग्गा फेंककर उसे मारा और मजाक करने पर विरोध जताया। इस बात पर रतिराम ने चेतावनी दी थी कि तीन दिन में तुझे विधवा कर दूंगा। बस यह घटना उसी का परिणाम पाई गई है।
ऐसे जुड़ी कड़ियां
पुलिस ने हत्या में कुल 13 गवाह बनाए, जिसमें एक पिता कारे सिंह, मृत गुलवीर की पत्नी, दूसरी भाभी, एक भाई व एक अन्य चश्मदीद ग्रामीण को साक्षी बनाया। इसके अलावा 8 पुलिस व पोस्टमार्टम के गवाह रहे। शुरुआत में कारे सिंह ने ओमवीर के कहे अनुसार तहरीर देना स्वीकारा। मगर बाद में पुन: विवेचना में कारे सिंह ने बताया कि ओमवीर ने ही उसे इस तरह की तहरीर लिखने के लिए कहा था। मगर आखिरी बार उसी के साथ गांव से जाते देखा गया। आखिरी चश्मदीद गवाह ने स्वीकारा कि कलुआ व बेलौठ के बीच पुलिया पर ओमवीर सिंह संग गुलवीर को बैठे देखा था। इस आधार पर पुलिस ने ओमवीर व अन्य को आरोपी बनाया। मगर अदालत में सत्र परीक्षण के दौरान परिवार के सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए और पुलिस के साक्ष्यों ने सजा दिलाई है।
विज्ञापन
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी स्वर्णलता वर्मा के अनुसार घटना 16 जून 2005 की शाम की है। मुकदमा गांव कलुआ के कारे सिंह द्वारा दर्ज कराया गया था। मुकदमे में आरोप के अनुसार गांव नाते से लगने वाला भतीजा ओमवीर वृंदावन से लौट रहा था, तभी उसे कलुआ व बेलौठ के बीच कुछ बदमाश मिले और लूटपाट व मारपीट करने लगे। इस दौरान ओमवीर के शोर पर वहां कारे सिंह का बेटा गुलवीर व गांव के अन्य लोग पहुंच गए। बीच-बचाव में बदमाशों द्वारा की गई फायरिंग में गुलवीर के गोली लगी और मारपीट में ओमवीर भी जख्मी हुआ। इस दौरान बदमाश भाग गए, जिनमें से दो को पहचान लिया गया। बाद में गुलवीर की मौत हो गई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया।
विज्ञापन
अभियोजन अधिवक्ता के अनुसार पुलिस विवेचना में तथ्य कुछ और ही उजागर हुआ। जांच में पाया गया कि यह हत्या खुद ओमवीर ने अपने भाई राजवीर, अन्य साथी दीवान, विजय सिंह व बहनोई रतिराम संग मिलकर की है। इसे लूट दर्शा कर पड़ोसी गांव के बदमाशों पर हत्या का दोष मढ़ दिया। उसी अनुसार मृत गुलवीर सिंह के पिता कारे सिंह को कहानी सुनाई और उन्होंने ओमवीर की बात मानते हुए लूट दर्शाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। इस आधार पर पुलिस ने ओमवीर, राजवीर, दीवान, विजय सिंह व रतिराम पर चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान मृतक परिवार के सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए। मगर पुलिस साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने ओमवीर को हत्या के लिए दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है, बाकी को बरी कर दिया है।
विज्ञापन
शादी वाले घर में मजाक में रंजिश
पुलिस विवेचना व अभियोजन साक्ष्यों के अनुसार गुलवीर सिंह की हत्या के ठीक अगले दिन उसके छोटे भाई की शादी थी। इससे दो-तीन दिन पहले से घर में शादी से जुड़े कार्यक्रम चल रहे थे। इसी बीच घटना से दो दिन पहले मृत गुलवीर की पत्नी संग आरोपी ओमवीर के बहनोई रतिराम ने मजाक किया। इस मजाक पर गुलवीर की पत्नी ने दूध का मग्गा फेंककर उसे मारा और मजाक करने पर विरोध जताया। इस बात पर रतिराम ने चेतावनी दी थी कि तीन दिन में तुझे विधवा कर दूंगा। बस यह घटना उसी का परिणाम पाई गई है।
ऐसे जुड़ी कड़ियां
पुलिस ने हत्या में कुल 13 गवाह बनाए, जिसमें एक पिता कारे सिंह, मृत गुलवीर की पत्नी, दूसरी भाभी, एक भाई व एक अन्य चश्मदीद ग्रामीण को साक्षी बनाया। इसके अलावा 8 पुलिस व पोस्टमार्टम के गवाह रहे। शुरुआत में कारे सिंह ने ओमवीर के कहे अनुसार तहरीर देना स्वीकारा। मगर बाद में पुन: विवेचना में कारे सिंह ने बताया कि ओमवीर ने ही उसे इस तरह की तहरीर लिखने के लिए कहा था। मगर आखिरी बार उसी के साथ गांव से जाते देखा गया। आखिरी चश्मदीद गवाह ने स्वीकारा कि कलुआ व बेलौठ के बीच पुलिया पर ओमवीर सिंह संग गुलवीर को बैठे देखा था। इस आधार पर पुलिस ने ओमवीर व अन्य को आरोपी बनाया। मगर अदालत में सत्र परीक्षण के दौरान परिवार के सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए और पुलिस के साक्ष्यों ने सजा दिलाई है।