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नहीं खुल रहीं दुकानें तो ई रिक्शा से चप्पलें बेचने निकल पड़ा नदीम
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कोरोना कर्फ्यू के चलते दुकानें नहीं खुल पा रही हैं तो परिवार पालने में लोगों को परेशानी हो रही है। हर तरफ से निराशा हाथ लगने के बाद धौर्रा निवासी नदीम खान ई-रिक्शा पर चप्पल और कड़े लेकर बेचने के लिए निकल पड़े हैं। विनय नगर क्षेत्र में चप्पलें बेचते हुए जब नदीम से बातचीत की तो उसने बताया कि कमाने वाले परिवार में कम हैं, खाने वाले ज्यादा हैं। मजबूरन घर-घर जाकर औने-पौने दामों में माल बेचकर गुजारा कर रहे हैं।
धौर्रा निवासी नदीन खान ने बताया कि परिवार में कुल आठ सदस्य हैं। जबकि कमाने वाले तीन लोग हैं। नदीम के साथ भाई और पिता ही कमाने वाले हैं। धौर्रा क्षेत्र में ही किराए की दुकान है। दुकान नहीं खुल रही है तो आमदनी भी नहीं हो रही है। परिवार पालने में परेशानी आ रही है। ऐसे में ईरिक्शा पर चप्पलें और कड़े लेकर बेचने के लिए निकल पड़े हैं।
पूरे दिन अलीगढ़ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर माल बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि दुकान की जगह घर-घर जाने पर लोग भी औने-पौने दामों में माल खरीद रहे हैं। मजबूरन माल बेचना पड़ रहा है, ताकि शाम तक कुछ रुपये इकट्ठे हो जाएं। जिससे परिवार का गुजारा चल सके। नदीम ने बताया कि ईरिक्शा भाड़े पर लिया है। चलाने वाला भी। दिनभर माल बेचकर इतनी बिक्री हो जाती है कि घर खर्च निकल जाता है।
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200 रुपये रोज पर रिक्शा चला रहा है साजिद
नदीम खान का सामान जिस ई रिक्शा में रखा रहता है। उसे चलाने के लिए नदीम ने धौर्रा के ही साजिद पुत्र सलीम को रखा हुआ है। साजिद ने बताया कि नदीम पूरे दिन खाने-पीने के साथ 200 रुपये रोज देते हैं। कोरोना कर्फ्यू में काम नहीं मिल रहा है।
इसीलिए 200 रुपये रोज पर ई रिक्शा चलाने आ गए हैं। अगर कर्फ्यू नहीं होता तो 200 रुपये रोज में कभी भी ईरिक्शा नहीं चलाते। इससे ज्यादा मजदूरी तो अन्य काम से मिल जाती है। साजिद ने बताया कि कमाई नहीं हो रही है, किराए पर रहते हैं। मजबूरी में घर से काम करने निकले हैं।
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धौर्रा निवासी नदीन खान ने बताया कि परिवार में कुल आठ सदस्य हैं। जबकि कमाने वाले तीन लोग हैं। नदीम के साथ भाई और पिता ही कमाने वाले हैं। धौर्रा क्षेत्र में ही किराए की दुकान है। दुकान नहीं खुल रही है तो आमदनी भी नहीं हो रही है। परिवार पालने में परेशानी आ रही है। ऐसे में ईरिक्शा पर चप्पलें और कड़े लेकर बेचने के लिए निकल पड़े हैं।
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पूरे दिन अलीगढ़ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर माल बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि दुकान की जगह घर-घर जाने पर लोग भी औने-पौने दामों में माल खरीद रहे हैं। मजबूरन माल बेचना पड़ रहा है, ताकि शाम तक कुछ रुपये इकट्ठे हो जाएं। जिससे परिवार का गुजारा चल सके। नदीम ने बताया कि ईरिक्शा भाड़े पर लिया है। चलाने वाला भी। दिनभर माल बेचकर इतनी बिक्री हो जाती है कि घर खर्च निकल जाता है।
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200 रुपये रोज पर रिक्शा चला रहा है साजिद
नदीम खान का सामान जिस ई रिक्शा में रखा रहता है। उसे चलाने के लिए नदीम ने धौर्रा के ही साजिद पुत्र सलीम को रखा हुआ है। साजिद ने बताया कि नदीम पूरे दिन खाने-पीने के साथ 200 रुपये रोज देते हैं। कोरोना कर्फ्यू में काम नहीं मिल रहा है।
इसीलिए 200 रुपये रोज पर ई रिक्शा चलाने आ गए हैं। अगर कर्फ्यू नहीं होता तो 200 रुपये रोज में कभी भी ईरिक्शा नहीं चलाते। इससे ज्यादा मजदूरी तो अन्य काम से मिल जाती है। साजिद ने बताया कि कमाई नहीं हो रही है, किराए पर रहते हैं। मजबूरी में घर से काम करने निकले हैं।