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अलविदा जुमा : माह-ए-रमजान की रुख्सती पर निकले आंसू
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ऊपरकोट जामा मस्जिद में अलविदा जुमा की नमाज अदा करते नमाजी।
- फोटो : CITY OFFICE
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ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद में जुमा इमाम कारी शागिल ने खुतबा (नसीहत) में जब अलविदा...अलविदा...माहे रमजान, रुख्सत हो रहा रमजान... पढ़ा तो लोगों की आंखों में आंसू आ गए। जामा मस्जिद सहित सभी मस्जिदों में अलविदा की नमाज लोगों ने अदा की।
कोरोना महामारी के बाद पहली बार रमजान महीने के आखिरी जुमा यानी अलविदा जुमा की नमाज पूरी क्षमता के साथ मस्जिदों में पढ़ी गई। कोरोना काल में एक साथ 5-6 लोगों को ही नमाज पढ़ने की इजाजत थी। लेकिन इस बार नजारा बदला हुआ था। एक साथ लोगों ने वजू किया, फिर जमात में नमाज पढ़ी। ऊपरकोट की जामा मस्जिद जब नमाजियों से भर गई, तब लोगों ने सड़क पर नमाज पढ़ी। लाउड स्पीकर न होने की वजह से जुमा इमाम की इजाजत से मुक्तदी (इमाम की आवाज को बुलंद आवाज से दोहराना) की तैनाती की गई। इस तरह लोगों की अलविदा जुमा की नमाज मुकम्मल हुई। नमाजियों की सहूलियतों के लिए जामा मस्जिद के पास पुलिस कर्मी तैनात रहे।
ईद की नमाज के वक्त का एलान
शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने ईद की नमाज के वक्त का एलान किया है। उन्होंने ने लोगों से गुजारिश की है कि ईद की नमाज में ज्यादा भीड़ एकत्र करने से बचना चाहिए। शहर मुफ्ती ने कहा कि उनकी गुजारिश का लोग जरूर ख्याल रखेंगे।
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- ईदगाह में सुबह 7 बजे नमाज।
- जामा मस्जिद ऊपरकोट में सुबह 7:30 बजे।
- बू अली शाह मस्जिद ऊपरकोट में सुबह 7:45 बजे।
ईद की नमाज से पहले निकालें सदका
ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद में तकरीर के दौरान मुफ्ती महमूद उल हसन ने कहा कि ईद की नमाज से पहले हर मुस्लिम को सदका जरूरतमंद को देना होगा। एक शख्स को पौने दो किलो गेहूं या उसकी कीमत निकालनी होगी, जो तकरीबन 50 रुपये बनती है। परिवार में पांच सदस्य हैं तो 250 रुपये होंगे, लेकिन जो दौलतमंद हैं, उन्हें छुहारा या किशमिश तीन किलो 60 ग्राम की कीमत का सदका निकालना होगा। इसी तरह हर साहिबे निसाब को पूरे साल की बचत का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंद को देना होगा। जैसे, 100 रुपये में ढाई रुपये, 10,000 रुपये में 2500 रुपये आदि।
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कोरोना महामारी के बाद पहली बार रमजान महीने के आखिरी जुमा यानी अलविदा जुमा की नमाज पूरी क्षमता के साथ मस्जिदों में पढ़ी गई। कोरोना काल में एक साथ 5-6 लोगों को ही नमाज पढ़ने की इजाजत थी। लेकिन इस बार नजारा बदला हुआ था। एक साथ लोगों ने वजू किया, फिर जमात में नमाज पढ़ी। ऊपरकोट की जामा मस्जिद जब नमाजियों से भर गई, तब लोगों ने सड़क पर नमाज पढ़ी। लाउड स्पीकर न होने की वजह से जुमा इमाम की इजाजत से मुक्तदी (इमाम की आवाज को बुलंद आवाज से दोहराना) की तैनाती की गई। इस तरह लोगों की अलविदा जुमा की नमाज मुकम्मल हुई। नमाजियों की सहूलियतों के लिए जामा मस्जिद के पास पुलिस कर्मी तैनात रहे।
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ईद की नमाज के वक्त का एलान
शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने ईद की नमाज के वक्त का एलान किया है। उन्होंने ने लोगों से गुजारिश की है कि ईद की नमाज में ज्यादा भीड़ एकत्र करने से बचना चाहिए। शहर मुफ्ती ने कहा कि उनकी गुजारिश का लोग जरूर ख्याल रखेंगे।
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- ईदगाह में सुबह 7 बजे नमाज।
- जामा मस्जिद ऊपरकोट में सुबह 7:30 बजे।
- बू अली शाह मस्जिद ऊपरकोट में सुबह 7:45 बजे।
ईद की नमाज से पहले निकालें सदका
ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद में तकरीर के दौरान मुफ्ती महमूद उल हसन ने कहा कि ईद की नमाज से पहले हर मुस्लिम को सदका जरूरतमंद को देना होगा। एक शख्स को पौने दो किलो गेहूं या उसकी कीमत निकालनी होगी, जो तकरीबन 50 रुपये बनती है। परिवार में पांच सदस्य हैं तो 250 रुपये होंगे, लेकिन जो दौलतमंद हैं, उन्हें छुहारा या किशमिश तीन किलो 60 ग्राम की कीमत का सदका निकालना होगा। इसी तरह हर साहिबे निसाब को पूरे साल की बचत का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंद को देना होगा। जैसे, 100 रुपये में ढाई रुपये, 10,000 रुपये में 2500 रुपये आदि।