फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Mah-E-Ramadan : Alvida Zuma

अलविदा जुमा : माह-ए-रमजान की रुख्सती पर निकले आंसू

Sat, 30 Apr 2022 01:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2022 01:39 AM IST
विज्ञापन
Mah-E-Ramadan : Alvida Zuma
ऊपरकोट जामा मस्जिद में अलविदा जुमा की नमाज अदा करते नमाजी। - फोटो : CITY OFFICE
ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद में जुमा इमाम कारी शागिल ने खुतबा (नसीहत) में जब अलविदा...अलविदा...माहे रमजान, रुख्सत हो रहा रमजान... पढ़ा तो लोगों की आंखों में आंसू आ गए। जामा मस्जिद सहित सभी मस्जिदों में अलविदा की नमाज लोगों ने अदा की।
विज्ञापन

कोरोना महामारी के बाद पहली बार रमजान महीने के आखिरी जुमा यानी अलविदा जुमा की नमाज पूरी क्षमता के साथ मस्जिदों में पढ़ी गई। कोरोना काल में एक साथ 5-6 लोगों को ही नमाज पढ़ने की इजाजत थी। लेकिन इस बार नजारा बदला हुआ था। एक साथ लोगों ने वजू किया, फिर जमात में नमाज पढ़ी। ऊपरकोट की जामा मस्जिद जब नमाजियों से भर गई, तब लोगों ने सड़क पर नमाज पढ़ी। लाउड स्पीकर न होने की वजह से जुमा इमाम की इजाजत से मुक्तदी (इमाम की आवाज को बुलंद आवाज से दोहराना) की तैनाती की गई। इस तरह लोगों की अलविदा जुमा की नमाज मुकम्मल हुई। नमाजियों की सहूलियतों के लिए जामा मस्जिद के पास पुलिस कर्मी तैनात रहे।
विज्ञापन

ईद की नमाज के वक्त का एलान
शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने ईद की नमाज के वक्त का एलान किया है। उन्होंने ने लोगों से गुजारिश की है कि ईद की नमाज में ज्यादा भीड़ एकत्र करने से बचना चाहिए। शहर मुफ्ती ने कहा कि उनकी गुजारिश का लोग जरूर ख्याल रखेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

- ईदगाह में सुबह 7 बजे नमाज।
- जामा मस्जिद ऊपरकोट में सुबह 7:30 बजे।
- बू अली शाह मस्जिद ऊपरकोट में सुबह 7:45 बजे।
ईद की नमाज से पहले निकालें सदका
ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद में तकरीर के दौरान मुफ्ती महमूद उल हसन ने कहा कि ईद की नमाज से पहले हर मुस्लिम को सदका जरूरतमंद को देना होगा। एक शख्स को पौने दो किलो गेहूं या उसकी कीमत निकालनी होगी, जो तकरीबन 50 रुपये बनती है। परिवार में पांच सदस्य हैं तो 250 रुपये होंगे, लेकिन जो दौलतमंद हैं, उन्हें छुहारा या किशमिश तीन किलो 60 ग्राम की कीमत का सदका निकालना होगा। इसी तरह हर साहिबे निसाब को पूरे साल की बचत का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंद को देना होगा। जैसे, 100 रुपये में ढाई रुपये, 10,000 रुपये में 2500 रुपये आदि।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed