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Aligarh News: न्यायालय-जेल के लिए खोजी जा रही जिले में जमीन
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दीवानी कचहरी की हैरीटेज बिल्डिंग।
- फोटो : संवाद
जिले में न्याय विभाग के लिए 75 बीघा जमीन तलाशी जा रही है। इसके लिए कई अलग अलग जगहों को देखा गया है, हालांकि छेरत पुलिस लाइन के पास की जमीन अधिकारियों को पसंद आई है, जिसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। संकेत हैं कि यह जमीन पृथक न्यायालय स्थापना के लिए तलाशी जा रही है। इसी तरह जेल के लिए भी नई जमीन तलाशी जा रही है।
पिछले एक वर्ष से जिले में न्याय विभाग के लिए 75 बीघा जमीन की तलाश चल रही है। कुछ समय पहले खैर रोड की जमीन देखी गई थी और न्याय विभाग के लोग भी जमीन को देखने गए थे। बाद में अतरौली रोड और अनूपशहर रोड के छेरत की नई पुलिस लाइन के पास जमीन देखी। छेरत की जमीन सुरक्षा लिहाज से अधिकारियों को पसंद आई है। जिसका प्रस्ताव भी शासन को भेजा जा चुका है।
अब शासन स्तर से उस पर आगे निर्णय लिया जाएगा। इस जमीन पर अभी यह तय नहीं है कि किस स्तर का न्यायालय निर्माण होगा। मगर अधिकारी जो संकेत दे रहे हैं, उसके अनुसार पुरानी दीवानी न्यायालय के परिसर में स्थान की कमी को देखते हुए नया न्यायालय बनाने की तैयारी है। इसी तरह जिला कारागार के लिए भी जमीन देखी जा रही है। इसके लिए अतरौली के नौरथा में पूर्व में जमीन देखी गई थी। अब यह भी कयास हैं कि जिस तरह छेरत के पास न्याय विभाग को जमीन पसंद आई है। इसी तरह जेल के लिए भी उसके पास की जमीन तय की जाए। इस पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है।
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शासन स्तर से न्यायालय की पृथक स्थापना के लिए एक वर्ष से जमीन की तलाश की जा रही है। इसी क्रम में छेरत की नई पुलिस लाइन के पास करीब 75 बीघा जमीन को पसंद कर चिह्नित किया गया है। उसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। अब शासन स्तर से उस पर निर्णय लिया जाएगा। इसी तरह जिला कारागार के लिए भी उपयुक्त स्थान की तलाश जारी है। -डीपी पाल, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
सौ वर्ष से अधिक पुराना है दीवानी न्यायालय का इतिहास
प्रदेश की एतिहासिक इमारतों में शामिल यहां की दीवानी का 100 साल से भी अधिक पुराना इतिहास है। जिसका हाईकोर्ट के निर्देश पर कोर्ट ऑफ यूपी नाम की पुस्तक में भी उल्लेख किया गया है। इसका साक्ष्य वो मुकदमे देते हैं, जो उस दौर में निस्तारित हुए थे। यही वजह है कि पुरातत्व विभाग ने जिला न्यायालय की इमारत को अपनी सूची में शामिल कर इसे हेरिटेज बिल्डिंग का दर्जा दिया। 1905 में ये इमारत बनी थी, तब अंग्रेजी शासन के गर्वनर लेफ्टिनेंट सर जेम्स डिगर थे। दीवानी में संग्रहालय भी है, जहां अंग्रेजी शासन में निस्तारित मुकदमों की फाइलें संरक्षित हैं।
इनमें ज्यादातर सिविल वाद हैं। जिरह में उर्दू, फारसी, अवधी भाषा का प्रयोग है। कोर्ट का आदेश अंग्रेजी में ही है। ये वो दौर था जब स्याही में कलम भिगोकर फैसले लिखे जाते थे। कम्प्यूटर के इस दौर में जहां एक प्रार्थना पत्र भी टाइप किया जाता है, तब ऐसा नहीं था। न्यायिक अधिकारी स्याही में कलम डुबोकर फैसले लिखते थे। वादी, प्रतिवादी के बयान भी ऐसे ही दर्ज किए जाते। तब उर्दू, फारसी भाषा का प्रयोग अधिक होता था। रिकार्ड के अनुसार 1895 और 1918 में निस्तारित मुकदमों के दस्तावेज संग्रहालय में हैं।
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पिछले एक वर्ष से जिले में न्याय विभाग के लिए 75 बीघा जमीन की तलाश चल रही है। कुछ समय पहले खैर रोड की जमीन देखी गई थी और न्याय विभाग के लोग भी जमीन को देखने गए थे। बाद में अतरौली रोड और अनूपशहर रोड के छेरत की नई पुलिस लाइन के पास जमीन देखी। छेरत की जमीन सुरक्षा लिहाज से अधिकारियों को पसंद आई है। जिसका प्रस्ताव भी शासन को भेजा जा चुका है।
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अब शासन स्तर से उस पर आगे निर्णय लिया जाएगा। इस जमीन पर अभी यह तय नहीं है कि किस स्तर का न्यायालय निर्माण होगा। मगर अधिकारी जो संकेत दे रहे हैं, उसके अनुसार पुरानी दीवानी न्यायालय के परिसर में स्थान की कमी को देखते हुए नया न्यायालय बनाने की तैयारी है। इसी तरह जिला कारागार के लिए भी जमीन देखी जा रही है। इसके लिए अतरौली के नौरथा में पूर्व में जमीन देखी गई थी। अब यह भी कयास हैं कि जिस तरह छेरत के पास न्याय विभाग को जमीन पसंद आई है। इसी तरह जेल के लिए भी उसके पास की जमीन तय की जाए। इस पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है।
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शासन स्तर से न्यायालय की पृथक स्थापना के लिए एक वर्ष से जमीन की तलाश की जा रही है। इसी क्रम में छेरत की नई पुलिस लाइन के पास करीब 75 बीघा जमीन को पसंद कर चिह्नित किया गया है। उसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। अब शासन स्तर से उस पर निर्णय लिया जाएगा। इसी तरह जिला कारागार के लिए भी उपयुक्त स्थान की तलाश जारी है। -डीपी पाल, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
सौ वर्ष से अधिक पुराना है दीवानी न्यायालय का इतिहास
प्रदेश की एतिहासिक इमारतों में शामिल यहां की दीवानी का 100 साल से भी अधिक पुराना इतिहास है। जिसका हाईकोर्ट के निर्देश पर कोर्ट ऑफ यूपी नाम की पुस्तक में भी उल्लेख किया गया है। इसका साक्ष्य वो मुकदमे देते हैं, जो उस दौर में निस्तारित हुए थे। यही वजह है कि पुरातत्व विभाग ने जिला न्यायालय की इमारत को अपनी सूची में शामिल कर इसे हेरिटेज बिल्डिंग का दर्जा दिया। 1905 में ये इमारत बनी थी, तब अंग्रेजी शासन के गर्वनर लेफ्टिनेंट सर जेम्स डिगर थे। दीवानी में संग्रहालय भी है, जहां अंग्रेजी शासन में निस्तारित मुकदमों की फाइलें संरक्षित हैं।
इनमें ज्यादातर सिविल वाद हैं। जिरह में उर्दू, फारसी, अवधी भाषा का प्रयोग है। कोर्ट का आदेश अंग्रेजी में ही है। ये वो दौर था जब स्याही में कलम भिगोकर फैसले लिखे जाते थे। कम्प्यूटर के इस दौर में जहां एक प्रार्थना पत्र भी टाइप किया जाता है, तब ऐसा नहीं था। न्यायिक अधिकारी स्याही में कलम डुबोकर फैसले लिखते थे। वादी, प्रतिवादी के बयान भी ऐसे ही दर्ज किए जाते। तब उर्दू, फारसी भाषा का प्रयोग अधिक होता था। रिकार्ड के अनुसार 1895 और 1918 में निस्तारित मुकदमों के दस्तावेज संग्रहालय में हैं।