हाथरस कांड : एसआईटी रिपोर्ट के बाद प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर उठे सवाल, कैसे बच गये जिम्मेदार
जानकारों की मानें तो निचले स्तर के कर्मचारी-अधिकारियों के स्तर से सत्संग को लेकर हर एक जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को मौखिक के साथ लिखित स्तर पर भेजी गई। मगर, उच्च स्तर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इसके बावजूद बड़े अधिकारी कार्रवाई से बच गए।
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हाथरस हादसे पर एसआईटी की रिपोर्ट के बाद शासन की कार्रवाई पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। जानकारों की मानें तो निचले स्तर के कर्मचारी-अधिकारियों के स्तर से सत्संग को लेकर हर एक जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को मौखिक के साथ लिखित स्तर पर भेजी गई। मगर, उच्च स्तर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इसके बावजूद बड़े अधिकारी कार्रवाई से बच गए।
जानकारी के अनुसार, आयोजन के आवेदक देवप्रकाश मधुकर ने 18 जून को एसडीएम के समक्ष आवेदन किया। जिस पर एसडीएम ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी। इसी आधार पर एसडीएम स्तर से अनुमति जारी की गई। बाद में इंस्पेक्टर की ओर से पुलिस बल तैनाती संबंधी पत्र एसपी स्तर पर लिखा गया। जिस पर एसपी ने 69 कर्मचारियों की तैनाती का आदेश जारी कर दिया।
साथ में सीएमओ, एक्सईएन बिजली, खंड विकास अधिकारी को अपने-अपने स्तर से इंतजाम करने के लिए पत्र लिखा। अनुमति के बाद एलआईयू स्तर से एक लाख से अधिक भीड़ का अनुमान लगाकर रिपोर्ट दी गई। इसके बाद कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौका मुआयना करने नहीं गया। बस कागजों पर ही इंतजाम होते रहे। एसआईटी ने खुद अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि न तो एसडीएम और न सीओ या न एएसपी स्तर से मौका मुआयना किया गया।
बाबा की संपत्ति में से भी मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलना चाहिए : रामदास अठावले
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष व केंद्रीय सामाजिक न्याय अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने कहा, हाथरस की घटना की गूंज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहुंची है। अठावले ने मंगलवार को मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हादसा काफी गंभीर है। बाबा की संपत्ति में से भी मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलना चाहिए। जान गंवाने वाले परिवार काफी गरीब हैं। उन्हें आर्थिक मदद की आवश्यकता है। इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत मकान और मुद्रा लोन आदि की सुविधा दिलाई जाएगी।
इस तरह तय की गई जिम्मेददारी
- रवेंद्र कुमार एसडीएम : एसडीएम ने 80 हजार लोगों की अनुमति दी थी, लेकिन मौके पर खुद मौजूद होने के बावजूद भीड़ बढ़ती देखकर कोई कदम नहीं उठाया। आयोजकों से भी किसी प्रकार की वार्ता नहीं की।
- आनंद कुमार सीओ सिकंदराराऊ : खुफिया तंत्र द्वारा भीड़ बढ़ने के बारे में जानकारी दी गई थी। इसके बाद भी महज एक थाने कस पुलिस बल ही तैनात किया गया। यहां तक कि उच्चाधिकारियों के संज्ञान में न लाकर फोर्स भी नहीं बढ़ाई।
- सुशील कुमार, तहसीलदार सिकंदराराऊ : क्षेत्र में होने वाले बड़े कार्यक्रम को लेकर बिल्कुल सजग नहीं थे। यहां तक कि कार्यक्रम की भीड़ का अंदाजा तक नहीं था। हादसे के बाद भी सक्रिय नहीं हो सके।
- आशीष कुमार, थानाध्यक्ष सिकंदराराऊ : थाना क्षेत्र में सत्संग होने के बाद भी आयोजकों से कोई जानकारी नहीं ली गई। उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी देरी से दी गई। भीड़ बढ़ने के बाद भी कोई संसाधन नहीं जुटाए।
- मनवीर सिंह , चौकी इंचार्ज कचौरा : कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहने के बावजूद सिर्फ कार्यक्रम को देखने में रहे। आयोजकों से कोई वार्ता नहीं की। भीड़ की उच्चाधिकारियों को जानकारी नहीं दी गई। सेवादारों के भरोसे कार्यक्रमों को छोड़ दिया गया।
- ब्रजेश पांडे, चौकी इंचार्ज, पोरा : कार्यक्रम में तैनात होने के बाद भी आयोजकों से वार्ता नहीं की। भीड़ को बढ़ते हुए देखते रहे। यही वजह रही कि हादसे के काफी देर बाद भी लोग अस्पताल तक नहीं पहुंच सके।
125 लोगों के बयान
एसआईटी ने तीन बार मौके का निरीक्षण किया। अफसरों आम जनता एवं प्रत्यक्षदर्शियों सहित 125 लोगों के बयान लिए। फोटोग्राफ, वीडियो फुटेज का भी संज्ञान लिया। रिपोर्ट न्यायिक आयोग के साथ साझा की जा सकती है।