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हाथरस कांड: बिटिया से हुआ था दुष्कर्म? जेएन मेडिकल कॉलेज की एमएलसी रिपोर्ट से मिले संकेत

Tue, 06 Oct 2020 12:58 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़ Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 06 Oct 2020 12:58 AM IST
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Hathras case latest update signs of rape mentioned in MLC report of JN Medical College 
जेएन मेडिकल कॉलेज की एमएलसी रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
हाथरस की बेटी की घटना के संबंध में एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलसी) में योनि में पेनीट्रेशन होने की बात दर्ज है। हालांकि यह भी कहा गया है कि पेनीट्रेटिव इंटरकोर्स की पुष्टि फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट के आने के बाद ही की जा सकती है।
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जेएन मेडिकल कालेज में 22 सितंबर को किए गए मेडिको लीगल परीक्षण की रिपोर्ट में क्रमांक 16 (डिटेल्स आफ एक्ट) में योनि में पेनीट्रेशन की बात लिखी गई है। साथ ही यह भी लिखा है कि घटना के वक्त पीड़िता अचेत हो गई थी। 
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क्रमांक सात में आरोपियों के विवरण में चार लोगों संदीप, रामू, लवकुश और रवि के नाम भी दर्ज हैं। परीक्षण करने वाली डॉक्टर ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि पीड़िता पर बल प्रयोग करने के निशान मिले हैं, पेनिट्रेटिव इंटरकोर्स की पुष्टि एफएसएल की रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकती है। 
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आगरा की एफएसएल की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि न होने के कारण ही पुलिस द्वारा कहा गया कि जांच में दुष्कर्म के सबूत नहीं मिले हैं। एएमयू की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर हमजा मलिक का कहना है कि एफएसएल की रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्ष निकालना गलत है। 

वे कहते हैं कि घटना के 11 दिन बाद 25 सितंबर को सैंपल लिए गए। सरकार की गाइड लाइन के हिसाब से 96 घंटे के अंदर सैंपल ले लिया जाना चाहिए। इसलिए एफएसएल की रिपोर्ट में सही तथ्य आना असंभव है। अत: इस रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। जबकि इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर प्रदेश सरकार और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर दुष्कर्म न होने की बात कह रहे हैं।

 

डॉ. हमजा ने कहा कि गाइडलाइन के हिसाब से जब एफएसएल की रिपोर्ट अप्रासंगिक है तो एमएलसी के परीक्षण की बात और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आए संकेत को एक साथ जोड़कर निष्कर्ष निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई है, उसमें साफ है कि पीड़िता का हाइमन क्षतिग्रस्त होने के बाद घाव ठीक हो जाना पाया गया है। 

घटना 14 सितंबर की थी और पोस्टमार्टम 29 सितंबर को हुआ। जबकि हाइमन का घाव ठीक होने के लिए 7 से 10 दिन काफी हैं। एमएलसी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्यों को एक साथ देखें तो दुष्कर्म की बात स्पष्ट हो जाती है।

जांच एजेंसियों को हम सारे तथ्य बता रहे हैं: प्रिंसिपल
जेएन मेडिकल कॉलेज की एमएलसी रिपोर्ट के संबंध में प्रिंसिपल प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि वह रिपोर्ट के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हाथरस प्रकरण की जांच कर रही एजेंसियों को वह सारे तथ्यों से अवगत करा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अलावा अन्य किसी संस्था या एजेंसी से वह इस संबंध में कोई बात नहीं कर सकते हैं।

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