{"_id":"5afb45804f1c1bd0408b5a5f","slug":"go-improve-or-else-we-will-improve","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुधर जाओ, वरना हम सुधार देंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुधर जाओ, वरना हम सुधार देंगे
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Wed, 16 May 2018 02:14 AM IST
विज्ञापन
आरटीओ का घेराव कर नोकझोंक करते प्राइवेट बस यूनियन के पदाधिकारी।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आखिरकार वही हुआ, जिसका अंदेशा कई दिनों से था। आरटीओ में आनलाइन होने वाले हर काम के लिए भी हो रही वसूली पर बस ऑपरेटर यूनियन का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को पहुंचे बस ऑपरेटरों ने आरटीओ कार्यालय पहुंच कर इस वसूली पर जबरदस्त विरोध जताया। मौके पर मिले मुलाजिमों से तू तू मैं मैं हो गई।
ऑपरेटरों ने मेज पर मुक्का मारकर चेतावनी दी कि सिस्टम सुधार लीजिए नहीं तो हम अपने ढंग से सुधार करा देंगे। ऑपरेटरों का कहना था कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए सरकार ने वाहन फोर और सारथी फोर साफ्टवेयर लागू किया, लेकिन ये साफ्टवेयर ही वसूली का सबसे बड़ा साधन बन गया है क्योंकि आनलाइन फीस जमा करने की व्यवस्था आरटीओ दफ्तर में नहीं है। बाहर बैठे कंप्यूटर ऑपरेटर दलालों की मदद से फीस जमा कराने से लेकर सभी काम कराते हैं और 100 से 150 रुपये हर काम के लिए ले रहे हैं। अगर विभाग वाले ये काम नहीं करते तो इस साफ्टवेयर को बंद करा दिया जाए।
बस ऑपरेटर खुद आनलाइन काम नहीं कर सकते हैं इसलिए इनके सामने ये समस्या आ रही है। जब हर साल बस वाले विभाग को लाखों रुपये का टैक्स दे रहे हैं तो फिर उनको परेशान क्याें किया जा रहा है। विभाग अपने स्तर से फीस जमा कराने के लिए दो बाबू लगा कर आनलाइन काम कराने की सुविधा दे। यहां पहुंचे आरटीओ से भी बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष सुधीश सिंह की बहस हुई। आरटीओ राधेश्याम ने बताया कि बस ऑपरेटर कार्यालय में आए थे।
विज्ञापन
उन्होंने वाहन फोर साफ्टवेयर में आनलाइन फीस जमा करने के लिए विभाग में दो पटल बनाने, बाबू तैनात करने, आनलाइन फीस जमा करने की सुविधा देने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने आफिस में कर्मचारियों के नहीं मिलने और दलालों के बेवजह के हस्तक्षेप की शिकायतें की हैं। आफिस में फील्ड स्टाफ हर वक्त नहीं मिल सकता है। दलालों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। शासन स्तर पर आनलाइन फीस जमा करने की सुविधा देने का प्रस्ताव भेजा है। वहां से निर्देश मिलने के बाद ये सुविधा दी जाएगी।
विज्ञापन
ऑपरेटरों ने मेज पर मुक्का मारकर चेतावनी दी कि सिस्टम सुधार लीजिए नहीं तो हम अपने ढंग से सुधार करा देंगे। ऑपरेटरों का कहना था कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए सरकार ने वाहन फोर और सारथी फोर साफ्टवेयर लागू किया, लेकिन ये साफ्टवेयर ही वसूली का सबसे बड़ा साधन बन गया है क्योंकि आनलाइन फीस जमा करने की व्यवस्था आरटीओ दफ्तर में नहीं है। बाहर बैठे कंप्यूटर ऑपरेटर दलालों की मदद से फीस जमा कराने से लेकर सभी काम कराते हैं और 100 से 150 रुपये हर काम के लिए ले रहे हैं। अगर विभाग वाले ये काम नहीं करते तो इस साफ्टवेयर को बंद करा दिया जाए।
विज्ञापन
बस ऑपरेटर खुद आनलाइन काम नहीं कर सकते हैं इसलिए इनके सामने ये समस्या आ रही है। जब हर साल बस वाले विभाग को लाखों रुपये का टैक्स दे रहे हैं तो फिर उनको परेशान क्याें किया जा रहा है। विभाग अपने स्तर से फीस जमा कराने के लिए दो बाबू लगा कर आनलाइन काम कराने की सुविधा दे। यहां पहुंचे आरटीओ से भी बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष सुधीश सिंह की बहस हुई। आरटीओ राधेश्याम ने बताया कि बस ऑपरेटर कार्यालय में आए थे।
विज्ञापन
उन्होंने वाहन फोर साफ्टवेयर में आनलाइन फीस जमा करने के लिए विभाग में दो पटल बनाने, बाबू तैनात करने, आनलाइन फीस जमा करने की सुविधा देने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने आफिस में कर्मचारियों के नहीं मिलने और दलालों के बेवजह के हस्तक्षेप की शिकायतें की हैं। आफिस में फील्ड स्टाफ हर वक्त नहीं मिल सकता है। दलालों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। शासन स्तर पर आनलाइन फीस जमा करने की सुविधा देने का प्रस्ताव भेजा है। वहां से निर्देश मिलने के बाद ये सुविधा दी जाएगी।