रामजीलाल सुमन के काफिले पर हमला: खुफिया सिस्टम फिर फेल..करणी सेना के प्लान से रहे अन्जान
रामजीलाल सुमन के काफिले पर अलीगढ़ में हमला हुआ। काले झंडे दिखाए गए और टायर फेंके गए। काफिले की गाड़ियां आपस में भिड़ने से 12 लोग घायल हुए। मामले में पांच को गिरफ्तार कर रिहा कर दिया गया। यह है पूरी कहानी...
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विस्तार
राणा सांगा पर विवादित बयान के बाद सपा सांसद रामजीलाल सुमन लगातार करणी सेना-क्षत्रिय महासभा के निशाने पर हैं। आगरा के बाद अब उन पर 27 अप्रैल को अलीगढ़ में हमला हुआ। मगर बड़ा सवाल ये है कि जब आगरा में हुए हमले के बाद से सपा सांसद खुद की जान को खतरा बताते आ रहे हैं, साथ में वे भ्रमण पर भी जा रहे हैं तो खुफिया तंत्र को विरोध का इनुपट क्यों नहीं मिला।
गभाना में सपा सांसद सुमन के काफिले पर टायर फेंके, सुमन बोले हमला किया
बुलंदशहर जा रहे सपा के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के काफिले पर 27 अप्रैल दोपहर हाईवे पर सोमना मोड़ के पास टायर फेंके और काफिले को रोकने की कोशिश की। इस दौरान करणी सेना और क्षत्रिय महासभा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। यहां निकलकर उनका काफिला गभाना टोल पर पहुंचा तो वहां बुलंदशहर पुलिस ने रोक लिया और उन्हें आगे नहीं जाने दिया। यहां उनकी पुलिस अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। करीब एक घंटे तक चली वार्ता के बाद सुमन वापस आगरा लौट गए।
घटनाक्रम के अनुसार बुलंदशहर के सुनहेरा गांव में 21 अप्रैल की रात दबंगों ने चार अनुसूचित वर्ग के लोगों पर थार गाड़ी चढ़ा दी थी। जिसमें एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी। सपा प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर रामजीलाल सुमन रविवार दोपहर पीड़ित परिवार से मिलने सुनेहरा जा रहे थे। पूर्व घोषित कार्यक्रम की भनक लगने पर करणी सेना-क्षत्रिय महासभा ने जिले में विरोध करना तय कर लिया। कार्यकर्ता गभाना टोल से करीब 700 मीटर पहले सोमना मोड़ पर दुकानों में जम गए। इधर, बुलंदशहर पुलिस उन्हें गभाना टोल पर ही रोकने के लिए पहले से आ गई थी। साथ में गभाना पुलिस भी सहयोग को मौजूद थी।
दोपहर करीब डेढ़ बजे सपा सांसद के काफिले को आता देख इंतजार कर रहे करणी सेना-क्षत्रिय महासभा के कार्यकर्ता सडक़ पर आ गए। वहां स्थित एक टायर पंचर की दुकान पर रखे पुराने टायरों को काफिले के आगे सडक़ पर फेंकने लगे। इसी बीच कुछ टायर काफिले में शामिल सुरक्षा व सपा सांसद की गाड़ी में भी जा लगे। इसके बाद नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता तितर-बितर हो गए। मगर आगे सपा सांसद का काफिला पुलिस ने रोक लिया। बुलंदशहर एसपी देहात, सीओ गभाना आदि अधिकारियों ने उन्हें गाड़ी से उतारा तो कार्यकर्ताओं से नोकझोंक हुई। फिर एक घंटे तक वार्ता के बाद सांसद को वापस आगरा भेज दिया गया। सिर्फ जिलाध्यक्ष बुलंदशहर मतलूब अली, राष्ट्रीय अध्यक्ष सपा अनुसूचित सभा राहुल भारती, प्रदेश अध्यक्ष अंबेडकर वाहिनी संतोष जाटव, पूर्व विधायक मुकेश शर्मा को ही सुनहेरा भेजा गया। इस दौरान सपा सांसद ने मीडिया से बातचीत में काफिले पर हमले का आरोप लगाया। कहा कि विरोध स्वरूप टायरों के साथ पत्थर भी फेंके गए। मामले में पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।
इस मामले में पुलिस स्तर से दर्ज किए गए मुकदमे के आधार पर जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस गहनता से जांच कर रही है।-संजीव रंजन, डीएम
मामले में प्रारंभिक स्तर पर हुई पुलिस लापरवाही को लेकर कार्रवाई की गई है। बाकी मुकदमा दर्ज कर हाईवे पर टायर फेंकने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।-संजीव सुमन, एसएसपी
यह घटना हमारे नेता पर हमले की है। अगर इस मामले में आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो फिर हम लोग भी इसी तरह सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। इस बात को पुलिस अधिकारियों के समक्ष भी बता दिया गया है। -अब्दुल हमीद घोषी, सपा महानगर अध्यक्ष
इस तरह किसी पर हमला करना निंदनीय है। किसी को अगर विरोध करना है तो उसके लिए एक मंच होता है। ऐसे तो सड़क पर चलना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए इस मामले में यही कहना है कि यह विरोध का अनुचित तरीका है। -कृष्णपाल लाला, भाजपा जिलाध्यक्ष
अब क्या बुलडोजर का दम बेदम हो गया है:अखिलेश यादव
सपा सांसद रामजीलाल सुमन संग अलीगढ़ में हुए घटनाक्रम पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट की है। जिसमें उन्होंने साफ कहा कि अब क्या बुलडोजर का दम बेदम हो गया है। साथ में उन्होंने सांसद से भी फोन पर वार्ता कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
सपा अध्यक्ष ने पोस्ट में कहा कि सांसद रामजी लाल सुमन के काफिले पर टायर व पत्थर फेंककर, उनके ऊपर जो जानलेवा हमला हुआ है वो उस एक्सीडेंट का कारण बना है, जो प्राणघातक दुर्घटना में भी बदल सकता था। ये एक आपराधिक कृत्य है। इतने टायर एक साथ इकट्ठा करना, एक गहरी साजिश का सबूत खुद है। ये एक बार फिर इंटेलिजेंस की गहरी चूक है या फिर जानबूझकर की गई अनदेखी है। अगर शासन-प्रशासन ये सब जानते हुए भी अंजान बनने की कोशिश कर रहा है तो वो ये जान ले कि अराजकता किसी को भी नहीं बख्शती है, एक दिन भाजपाई और उनके संगी-साथी भी ऐसे हिंसक तत्वों का शिकार होंगे। देश में एक सांसद के ऊपर हुए जानलेवा हमले का संज्ञान लेने वाला कोई है या फिर ‘पीडीए का सांसद’ होने के कारण वर्चस्ववादियों की सरकार शर्मनाक चुप्पी साधकर भूमिगत हो जाएगी। अब क्या बुलडोजर का दम बेदम हो गया है या उप्र की सरकार ने अराजकता के आगे समर्पण कर दिया है या फिर ये सब उप्र सरकार की रज़ामंदी से हो रहा है? ...घोर, घोर, घोर निंदनीय। पीडीए कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा।
सुमन बोले मेरी हत्या कराना चाहती है सरकार
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने गभाना टोल प्लाजा अलीगढ़ पर हमले के बाद सरकार पर हत्या करने का आरोप लगाया है। हमले के दौरान उनके वाहन के शीशे टूट गए। पुलिस सुरक्षा में आगरा वापस आए। संजय प्लेस स्थित आवास पर प्रेसवार्ता में रामजीलाल सुमन ने कहा जिस तरह से घात लगाकर हमला हुआ। उससे लगता है सरकार मेरी हत्या कराना चाहती है। मेरे ऊपर जानलेवा हमले की साजिश रची गई। इससे पहले भी करणी सेना ने 26 मार्च को मेरे आवास पर हमला किया था। हमलावरों को पुलिस और सरकार से संरक्षण प्राप्त है। आवास हमले मामले में दो केस दर्ज हुए थे लेकिन कोई भी आरोपी नहीं पकड़ा गया। इसके बाद 12 अप्रैल को गढ़ी रामी में करणी सेना ने प्रदर्शन किया। वहां भी तलवारें और बंदूकें लहराईं गईं। पुलिस और प्रशासन का रवैया लचर रहा। ये सब सरकार के इशारे पर हो रहा है। एक वर्ग विशेष के हौसले बुलंद हैं। मुझे अगर कुछ होता है तो उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
सांसद हाथरस से निकले, तभी सक्रिय हुए नेता
सपा सांसद के आगरा से हाथरस तक आने व वहां कुछ देर रुककर साथियों संग बुलंदशहर रवाना होने की खबर करणी सेना को कुछ देर पहले ही मिली।इसी बीच स्थानीय स्तर पर करणी सेना नेता सक्रिय हो गए। ये सभी वे लोग थे, जो आगरा हमले से लेकर प्रदर्शन तक में सक्रिय रहे। उस समय भी यहां से काफी लोग यहां से गए थे। मडराक टोल पर विरोध व हमले का प्लान बना। मगर तब तक वहां लोग जमा नहीं हो पाए। इसके बाद खेरेश्वर पर लोग जमा हुए। मगर वहां जाम के चलते विरोध या हमले में सफल नहीं हो सके। तीसरी टीम सोमना मोड़ पर दो जिलों की पुलिस से महज 500 मीटर पहले खड़ी होकर हमला करने में सफल हो गई। मगर न तो इलाका पुलिस न खुफिया टीमों को इसकी भनक लग सकी।
ओकेंद्र राणा ने ली सुमन पर हमले की जिम्मेदारी
करणी सेना युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन के काफिले पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि विरोध लगातार जारी रहेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो बयान जारी कर कहा है कि गभाना टोल पर हमला उनके करणी सेना परिवार के साथियों ने किया है। दुख इस बात का है कि उन्हें सूचना देर से मिली। कुछ गाड़ियां ही टूट पाईं। पुलिस प्रशासन ने बचा लिया। यह किसी एक समाज का मामला नहीं है, एक महापुरुष, पूरे हिंदू समाज को गद्दार बोला है। ऐसे लोगों का बचाव और सुरक्षा नहीं होनी चाहिए। 20-25 मिनट पहले उनके बुलंदशहर जाने का पता चला, तुरंत टीम एक्टिव कर दी गई।
करणी सेना ने ली इसकी जिम्मेदारी
इस घटनाक्रम को लेकर करणी सेना के पदाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह चौहान ने जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि हमने अपने कार्यकर्ताओं को पहले से लगाया था। इसी क्रम में ये सब हुआ। उन्होंने बताया कि जब हमें ये खबर लगी कि सुमन हमारे जिले में आ रहे हैं। तभी कार्यकर्ता सक्रिय कर दिए गए। जिसमें हम सफल हुए हैं। अभी आगे भी इस तरह के घटनाक्रम होते रहेंगे।
हमले की सफलता पर जताई खुशी
सुमन पर हमले के बाद लोगों ने एक दूसरे को संदेश भेजकर, वीडियो वायरल करके व सोशल मीडिया पर एक दूसरे को बधाई देकर खुशी जताई।
उत्पीड़न रोकने में नाकाम सरकार हमें पीड़ितों तक जाने से रोक रही : सुमन
बुलंदशहर जाने के दौरान गभाना टोल पर रोके गए सपा सांसद रामजीलाल सुमन व समर्थकों की करीब एक घंटे तक बुलंदशहर-अलीगढ़ पुलिस के अधिकारियों से हुज्जत हुई। कई बार नोकझोंक के बीच कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन व योगी-मोदी-भाजपा सरकार विरोधी नारेबाजी की। किसी तरह पुलिस उन्हें समझा पाने में सफल रही। इस दौरान सुमन ने मीडिया से कहा कि प्रदेश में अनुसूचित उत्पीड़न रोकने में नाकाम सरकार हमें पीड़ितों तक जाने से रोक रही है।
सपा सांसद ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अनुसूचितों पर अपराध की बाढ़ आ गई है। प्रदेश में जंगल राज कायम है। सरकार अनुसूचित उत्पीडऩ रोकने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि हम सपा मुखिया अखिलेश यादव के निर्देश पर सुनहेरा गांव के पीडि़त अनुसूचित परिवारों से मिलने जा रहे थे। मगर बुलंदशहर-अलीगढ़ पुलिस ने उन्हें वहां जाने से रोक दिया। उन्होंने कहा कि इससे पहले आगरा में अनुसूचित की बरात नहीं चढऩे दी गई। रामपुर में अनुसूचित बच्ची से घटना हुई। ये सब प्रदेश में इस वर्ग के उत्पीडऩ का उदाहरण है। जबकि सरकार और प्रशासन द्वारा कहा जा रहा है कि हर आपराधिक मामले में कार्रवाई की जा रही हैं। लेकिन यह कार्रवाई नाकाफी है। दूसरा सच ये भी है कि चारों तरफ अराजकता का बोलबाला है। इसके विपरीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में रामराज होने का गुणगान करते रहते हैं। वर्तमान समय में कहीं भी कोई घटना हो रही है तो सरकार ओर स्थानीय प्रशासन सपा के प्रतिनिधिमंडल व नेताओं को वहां जाने से रोक रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सपा के प्रतिनिधिमंडल और नेता मौके पर पहुंचेंगे, तो समाज के सामने सरकार की कानून व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आएगी। जगह-जगह डॉ. आंबेडकर की मूर्तियों को क्षति ग्रस्त किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा नई मूर्तियां लगाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री की जा रही है। ऐसे किसी भी मामले में प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की गई है। अगर एक भी जगह रिपोर्ट दर्ज होकर अपराधियों के विरुद्ध सही कार्रवाई हो गई होती। तो ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं हो सकती।
हमले ने फुलाए अधिकारियों के हाथ पांव
सपा सांसद को बुलंदशहर जाने से रोकने के लिए गभाना टोल पर बुलंदशहर के एसपीआरए डॉ. तेजवीर सिंह, सीओ खुर्जा-गभाना, एसडीएम खुर्जा पीएसी के साथ मौजूद थे। सब कुछ सामान्य था। मगर उन्हें इस बात की भनक नहीं लगी कि सोमना मोड़ पर कोई विरोध भी हो सकता है। काफिला आते समय जब पुलिस अधिकारियों ने कुछ दूरी पर टायर फिंकते देखे तो उनके हाथ पांव फूल गए। हालांकि कुछ ही पल में काफिला टोल पर पहुंच गया। मगर हमले को लेकर पहले से सांसद व कार्यकर्ता गुस्से में थे। पुलिस के रोके जाने पर उनका पारा बढ़ गया। जमकर नारेबाजी के बीच नोकझोंक हुई। किसी तरह हमले के मामले में कार्रवाई का आश्वासन देकर एक घंटे में उन्हें वापस किया गया।
मडराक-खेरेश्वेवर पर भी थी विरोध-हमले की योजना
सपा सांसद के जिले से होकर गुजरने की खबर पहले से ही करणी सेना-क्षत्रिय महासभा के लोगों को मिल गई थी। इसे लेकर कार्यकर्ताओं को मडराक टोल प्लाजा, खेरेश्वर व गभाना पर लगाया गया था। साफ था कि जहां भी जिसको मौका मिले, वह अपने तरीके से विरोध या हमला करेगा। इसी क्रम में सोमना पर यह हुआ।
वीडियो में टायर फेंकते नजर आ रहे लोगों की गिरफ्तारी के लिए दबिश, पांच गिरफ्तार
सपा सांसद पर हमले के मामले में उनके काफिले की अगुवाई कर रहे थाने के दरोगा ने 15 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया है। जिसमें काफिले में शामिल समर्थकों संग हाथापाई-मारपीट का भी आरोप है। मुकदमे के आधार पर 5 लोग गिरफ्तार किए हैं। जिसमें एक श्रीराजपूत करणी सेना का जिला संयोजक व चार कार्यकर्ता शामिल हैं। वहीं वीडियो में टायर फेंकते नजर आ रहे लोगों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ताबड़तोड़ दबिश दे रही है।
यह मुकदमा थाने के दरोगा सुधीर कुमार ने कराया है। जिसमें कहा है कि वे आगरा से बुलंदशहर जा रहे सपा सांसद के काफिले को महरावल बॉर्डर से द्वितीय थाना मोबाइल जीप से स्क्वायड कराकर ले जा रहे थे। तभी टोल से पहले सोमना मोड़ पर 15 अज्ञात लोगों ने सपा सांसद के काफिले पर टायर फेंककर हमला किया। साथ में उनके काफिले को रोकने का प्रयास किया। इस बीच काफिले में शामिल कुछ समर्थक अपनी गाडिय़ों से उतरकर अपने नेता को बचाने आगे आकर आगे पीछे चलने लगे तो समर्थकों संग हाथापाई करते हुए मारपीट की गई। हालांकि खुद दरोगा ने उतरकर उपद्रवियों को पकडऩे का प्रयास किया। मगर वे भाग गए।
इस घटना में सांसद या उनके किसी समर्थक को चोट नहीं आई। बाद में उन्हें वापस कर दिया गया। देर रात यह मुकदमा बलवा, गलत तरीके से रास्ता रोकने की कोशिश, हिंसक हमला, उकसावा, अपमानित कराने के इरादे से उकसावा, चोट पहुंचाने का मकसद व क्रिमिनल लॉ की धारा में दर्ज किया गया है। इसके बाद देर शाम पुलिस ने धरपकड़ अभियान चलाकर श्रीराजपूत करणी सेना के जिला संयोजक सहित पांच लोग पकड़ लिए। एपी सिटी मृगांक शेखर पाठक ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर पांच आरोपी पकड़ लिए हैं। आगे की विवेचनात्मक कार्रवाई जारी है।
ये किए गए गिरफ्तार
- कृष्णा ठाकुर वीरपुरा गभाना, जिला संयोजक श्रीराजपूत करणी सेना
- सुमित ठाकुर सोमना गभाना
- सुधीर ठाकुर ओगर गभाना
- भूपेन्द्र पनिहावर गभाना
- सचिन रामपुर गभाना
हमले के पांच आरोपी रात को निजी मुचलकों पर रिहा
सपा सांसद रामजीलाल सुमन पर हमले में गिरफ्तार किए गए पांच लोगों को निजी मुचलकों पर रिहा कर दिया गया। शाम को करीब साढ़े चार बजे इनकी गिरफ्तारी हुई और रात को को एसडीएम गभाना ने निजी मुचलकों पर रिहा कर दिया। इस दौरान थाने से लेकर एसडीएम दफ्तर तक क्षत्रिय समाज के लोग जमा रहे। पुलिस ने शाम को साढ़े चार बजे के आसपास इन्हें पकड़ा था। सभी को थाने ले जाया गया। चूंकि गभाना क्षेत्र जिले में क्षत्रिय गढ़ है। इसलिए इस खबर पर देर शाम क्षत्रिय महासभा के नेता ठा. शैलेंद्रपाल सिंह सहित तमाम क्षत्रिय समाज के नेता थाने पहुंच गए। उन्होंने अधिवक्ताओं से वार्ता कर यह तय किया कि मुकदमे में कोई धारा सात वर्ष या उससे अधिक सजा की नहीं। इसलिए सभी को शांति भंग में चालान कर तत्काल एसडीएम के समक्ष पेश किया जाए। इस पर पुलिस ने टाल-मटोल भी की। कुछ देर नोकझोंक के हालात भी बने। मगर भीड़ बढ़ती देख पुलिस ने उन्हें देर शाम एसडीएम के समक्ष पेश कर दिया। वहीं पुलिस ने पांचों को मुकदमे में धारा 41 के नोटिस रिसीव कराए हैं।
सपा जिलाध्यक्ष ने दी खुद पर हमले की तहरीर
अलीगढ़ सपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मी धनगर ने इस मामले में एसएसपी को एक तहरीर देकर खुद पर हमला होना बताया है। कहा है कि वे भी सपा सांसद संग बुलंदशहर जा रही थीं। तभी उनकी गाड़ी पर भी यह हमला हुआ। एसएसपी से कार्रवाई का अनुरोध करते हुए यह भी कहा है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी आंदोलन को बाध्य होगी। सपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मी धनगर ने तहरीर में कहा है कि वे सपा सांसद संग बुलंदशहर जा रही थीं। तभी टोल से पहले करणी सेना के लोगों ने पत्थरों, जलते हुए टायरों व तलवार आदि से खुद उन पर व कार्यकर्ताओं पर हमला किया। इस हमले में उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। वह किसी तरह खुद की जान बचा पाईं। इस घटना से पीडीए में आक्रोश है। इस मामले में उन्होंने कार्रवाई के साथ खुद की सुरक्षा का भी अनुरोध किया है।
करणी सेना की भीड़ देख हड़बड़ाए ड्राइवर, टकराईं सांसद के काफिले की गाड़ियां, 12 घायल
आगरा से बुलंदशहर जाते समय सपा सांसद रामजीलाल सुमन के काफिले की गाड़ियां करणी सेना के कार्यकर्ताओं की भीड़ को देख खेरेश्वर चौराहे पर आपस में टकरा गईं। दरअसल जब नारेबाजी हुई तो चालक हड़बड़ा गए और गाड़ियां आपस में टकरा गईं। इसमें 12 कार्यकर्ता घायल हुए हैं। जिनका आसपास के अस्पतालों में उपचार कराया गया।
हाथरस जनपद में चंदपा क्षेत्र के गांव कुंवरपुर के ग्राम प्रधान डा.विजयपाल सिंह के अनुसार जब सांसद आगरा से चले थे तो उनके साथ काफी लोग अपनी अपनी गाड़ियां लेकर थे। हाथरस से काफिले में गाड़ियां शामिल हुईं थीं। जब काफिला अलीगढ़ में खेरेश्वर चौराहे पर पहुंचा तो दोपहर में यहां जाम भी था। सांसद की गाड़ी व कुछ सुरक्षा कर्मियों की गाड़ियां तो आगे निकल गईं जबकि कुछ वाहन पीछे रह गए थे। इसी बीच करणी सेना के कार्यकर्ताओं पर हमारी नजर पड़ी। जिन्हें देखकर अचानक चालक हड़बड़ा गया। लगा कि कहीं कोई आगे न आ जाए। इसी हड़बड़ी में काफिले में शामिल पांच गाड़ियां आपस में टकरा गईं। इस दुर्घटना में एडवोकेट ब्रज मोहन राही, एडवोकेट लल्लन बाबू, वीरपाल सिंह ,सत्यपाल सिंह, सुरेश, नेत्रपाल, पूरनचंद समेत करीब बारह लोग चोटिल हो गए। पांच गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं। इन सभी का आसपास के अस्पतालों में उपचार कराया गया।
सुमन के काफिले में शामिल थीं 25 गाड़ियां, कई क्षतिग्रस्त
सपा सांसद के काफिले पर जिस समय हमला हुआ, उस समय 25 करीब गाडिय़ां उनके काफिले में शामिल थीं। शुरुआत में विरोध करने वालों ने गाडिय़ां आते ही टायरों को दुकान से उठाकर सडक़ पर फेंकना शुरू किया। इसके पीछे मकसद काफिला रोकना था। करीब चार-पांच टायर सड़क पर फेंक दिए। मगर गाडिय़ां टायरों से होकर ऊपर से गुजरने लगीं। तभी सपा सांसद की गाड़ी व कुछ अन्य गाडिय़ों पर टायर फेंके गए। जिससे सपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मी धनगर सहित कुछ अन्य लोगों की गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।
ये हुआ अब तक
सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने संसद में राणा सांगा व अकबर को लेकर एक बयान दिया। हालांकि संसद के रिकार्ड से वह बयान हटा दिया गया। मगर पहले ही दिन से देश प्रदेश में करणी सेना व क्षत्रिय समाज इस बयान का विरोध कर रहा है। इसी क्रम में आगरा में उनके आवास पर करणी सेना ने उस दिन हमला किया, जब आगरा में सीएम योगी आदित्यनाथ आए हुए थे। घर पर हमला करने वाले कई किलो मीटर चलकर उनके आवास पर गए। हालांकि पुलिस ने मुकदमा दर्जकर कार्रवाई की। मगर सांसद ने उसके बाद से खुद की जान को खतरा बताना शुरू कर दिया। इसके बाद 14 तारीख को आगरा में करणी सेना व क्षत्रिय महासभा के आह्वान पर लोग एकत्रित हुए। उसमें भी उनके आवास पर कूच का अंदेशा रहा। अब सांसद ने भ्रमण शुरू कर दिया है। उनके खिलाफ विरोध बरकरार है। खुद पुलिस की टीम उन्हें उनके घर से सुरक्षा घेरे में लेकर निकल रही है। मगर खुफिया टीमों या इलाकाई पुलिस को विरोध की खबर नहीं लग पा रही है। ये अपने आप में सिस्टम का फेल्योर है।