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पिसावा गोशाला में चार गोवंश ने फिर तोड़ा दम
Sat, 26 Jan 2019 01:31 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sat, 26 Jan 2019 01:31 AM IST
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टप्पल की गोशाला में खुले में मौजूद गोवंश।
- फोटो : Amar Ujala
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पिसावा कस्बे के श्मशान घाट पर चल रही तिवारी गोशाला में चार और बीमार गोवंश ने दम तोड़ दिया है। उधर पूरी रात प्रशासनिक टीम के साथ डटे रहे एसडीएम ने अपने सामने पशु चिकित्सकों की टीम से गायों का इलाज कराया, जिसके बाद गंभीर रूप से बीमार 15 गायों को बचा लिया गया है। उधर गोशाला में भूसे की तरह भरे गोवंश को कम करने के लिए करीब 50 गोवंश को नगर निगम की बरौला जाफराबाद की गोशाला में गाड़ियों में भरवाकर भेजा गया है।
बुधवार से गुरुवार के बीच इसी गोशाला में 30 गोवंश ने बीमारी के चलते दम तोड़ दिया था। इस सूचना से प्रशासन में खलबली मच गई थी। शुक्रवार को फिर चार गोवंश की मौत हो गई। इस गोशाला में करीब 800 गोवंश हैं जबकि उनके लिए टीनशेड, चारा, पानी, दवाओं का समुचित इंतजाम नहीं है। बारिश और ठंड के चलते गोवंश बीमार हो रहा है। बारिश से बचने के लिए गोवंश टीनशेड के नीचे शरण लेने के दौरान कमजोर होने के कारण जमीन पर पड़े गोवंश के ऊपर खड़े होने को मजबूर है।
यही वजह है कि एसडीएम अनिरुद्ध प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार कृष्ण दत्त स्वयं गुरुवार की पूरी रात गोशाला में टीम के साथ मौजूद रहे। बीमार एक-एक गोवंश का इलाज करवाया। इससे 15 गोवंश की जान बच गई। शुक्रवार को करीब 50 गोवंश बरौला जाफराबाद की गोशाला में भिजवाए ताकि तिवारी गोशाला के टीनशेड में गोवंश के रात में रुकने के लिए कुछ स्थान बन सके। एसडीएम ने यहां मौजूद गोवंश के चारा-पानी का समुचित इंतजाम करने के निर्देश दिए ताकि भूख से गोवंश की मौत न हो। पशु चिकित्सकों को एक-एक गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण करने के निर्देश दिए।
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यमुना एक्सप्रेस-वे के नीचे चल रही श्रीश्याम पुरुषोत्तम गोशला में भी चारा की कमी से गोवंश भूखे पेट रहने को मजबूर हैं। इसके साथ ही खुले में रहने से ठंड के चलते गोवंश में बीमारी बढ़ रही है।
इस गोशाला में करीब 2200 गोवंश हैं। इनके लिए रोजाना करीब एक ट्रैक्टर ट्राली चारा ही डाला जा रहा है। ताकतवर गोवंश इस चारे में कमजोर गोवंश को मुंह नहीं लगाने देते। गोशाला के कर्मचारी भी मानते हैं कि इतना चारा मौजूद गोवंश के लिए पर्याप्त नहीं है। गोशाला समिति के सचिव शिवदत्त शर्मा के अनुसार शासन और क्षेत्रीय निवासियों का गोशाला संचालन में सहयोग नहीं मिल रहा। इगलास और बाजना से और गोवंश आने से गोशाला की व्यवस्था चरमरा गई है।
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बुधवार से गुरुवार के बीच इसी गोशाला में 30 गोवंश ने बीमारी के चलते दम तोड़ दिया था। इस सूचना से प्रशासन में खलबली मच गई थी। शुक्रवार को फिर चार गोवंश की मौत हो गई। इस गोशाला में करीब 800 गोवंश हैं जबकि उनके लिए टीनशेड, चारा, पानी, दवाओं का समुचित इंतजाम नहीं है। बारिश और ठंड के चलते गोवंश बीमार हो रहा है। बारिश से बचने के लिए गोवंश टीनशेड के नीचे शरण लेने के दौरान कमजोर होने के कारण जमीन पर पड़े गोवंश के ऊपर खड़े होने को मजबूर है।
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यही वजह है कि एसडीएम अनिरुद्ध प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार कृष्ण दत्त स्वयं गुरुवार की पूरी रात गोशाला में टीम के साथ मौजूद रहे। बीमार एक-एक गोवंश का इलाज करवाया। इससे 15 गोवंश की जान बच गई। शुक्रवार को करीब 50 गोवंश बरौला जाफराबाद की गोशाला में भिजवाए ताकि तिवारी गोशाला के टीनशेड में गोवंश के रात में रुकने के लिए कुछ स्थान बन सके। एसडीएम ने यहां मौजूद गोवंश के चारा-पानी का समुचित इंतजाम करने के निर्देश दिए ताकि भूख से गोवंश की मौत न हो। पशु चिकित्सकों को एक-एक गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण करने के निर्देश दिए।
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यमुना एक्सप्रेस-वे के नीचे चल रही श्रीश्याम पुरुषोत्तम गोशला में भी चारा की कमी से गोवंश भूखे पेट रहने को मजबूर हैं। इसके साथ ही खुले में रहने से ठंड के चलते गोवंश में बीमारी बढ़ रही है।
इस गोशाला में करीब 2200 गोवंश हैं। इनके लिए रोजाना करीब एक ट्रैक्टर ट्राली चारा ही डाला जा रहा है। ताकतवर गोवंश इस चारे में कमजोर गोवंश को मुंह नहीं लगाने देते। गोशाला के कर्मचारी भी मानते हैं कि इतना चारा मौजूद गोवंश के लिए पर्याप्त नहीं है। गोशाला समिति के सचिव शिवदत्त शर्मा के अनुसार शासन और क्षेत्रीय निवासियों का गोशाला संचालन में सहयोग नहीं मिल रहा। इगलास और बाजना से और गोवंश आने से गोशाला की व्यवस्था चरमरा गई है।