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Aligarh News: गेहूं की फसल में बर्बादी का मंजर देख सिहर उठे बुजुर्ग

Tue, 07 Apr 2026 03:08 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 03:08 AM IST
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Elderly people were shocked to see the destruction of wheat crop.
गेहूं कटाई के सीजन में एक पखवाड़े में पांच बार आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से फसलों की बर्बादी का मंजर देखकर बुजुर्ग लोग सिहर उठे हैंं। खेतों की मेड़ों पर घूमने पर बर्बाद फसल पर जब नजर डालते हैं तो आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं। 30 से 50 साल पहले की यादों को ताजा करते हुए बुजुर्गों का कहना है कि तब मशीनों से गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग के साधन नहीं थे। खलिहान में लांक डालकर बैल और भैंसा को घुमाकर गेहूं व भूसा अलग-अलग करते थे। बारिश, आंधी और ओलावृष्टि तब भी होती थी। मगर इस बार तो कुछ ज्यादा ही हद हो गई है। बुजुर्गों का कहना है कि कुदरती मार से किसान बुरी तरह टूट गया है। ऊपर से शासन-प्रशासन 30 प्रतिशत नुकसान होने पर ही फसल का मुआवजा देता है जोकि किसानों के साथ सरासर अन्याय है।
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खलिहान में पड़े गेहूं के ढेर तक बह गए थे
गोंडा। 50 वर्ष पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि की पुरानी यादों को ताजा करते हुए गांव नयाबास निवासी 85 वर्ष के बुजुर्ग ज्ञान सिंह बातचीत करते समय सुबक पड़े। उन्होंने बताया कि उस समय मेरी उम्र करीब 35 वर्ष की रही होगी। उस समय गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी थी। एक-दो दिन में फसलों को काटने की तैयारी कर रहे थे। कुछ किसानों ने लांक की गहाई भी कर ली थी लेकिन भूसे से गेहूं अलग नहीं हुआ था। तभी आसमान में बादल छाए और मूसलाधार बारिश हुई व ओले पड़ने लगे। सब कुछ ही घंटे में पानी में बर्बाद हो गया था। बालियां गीली हो गई थीं। कई दिनों तक लांक पानी भरे खेतों में ही पड़ा रहा। धूप निकली और लांक सूखा तो बालियों से दाने खेतों में ही झड़ गए थे। दानों को खरैरा (एक तरह की झाड़ू) से इकठ्ठा करते थे। गेहूं के ढेर पानी से भीग गए थे, जिन्हें पक्षी चुग लेते थे। पहले गेहूं की पैदावार एक-दो मन बीघा की होती थी और भाव भी एक रुपये प्रति किग्रा थे। पशुओं के लिए चारे का भी बड़ा संकट खड़ा हो गया था। भूखे पशु बबूल आदि पेड़ों के पत्ते तक खा जाते थे।
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खैर में 25 साल पहले हुई थी फसलों की बर्बादी

खैर। गांव कशीसों निवासी 80 वर्षीय किसान रामचरण शर्मा उर्फ मंटोली ने बताया कि इस प्रकार की स्थिति लगभग 25 वर्ष पूर्व भी देखी गई थी। जब कटाई के समय हुई बारिश ने फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। इस बार भी वही हालात बन गए हैं, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं।बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई स्थानों पर खेतों में कटी पड़ी फसल भीगकर गेहूं के दाने अंकुरित होने लगे हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होगी। इसके साथ ही बो चुकी बाजरा और मक्का जैसी फसलों में भी नुकसान होनेे की आशंका जताई जा रही है।
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भूसे की गुणवत्ता होगी खराब

रामचरण शर्मा का कहना है कि इस बार भूसा खराब होने के कारण पशुपालन पर भी असर पड़ेगा। गेहूं का उचित मूल्य मिलने की संभावना भी कम हो गई है। उप जिलाधिकारी को चाहिए कि वह सर्वे कराकर किसानों को राहत धनराशि उपलब्ध करवाएं।


बारिश पहले भी होती थी पर ऐसी नहीं
अतरौली के गांव नहल निवासी 85 वर्षीय बनवारीलाल गौड़ ने बताया कि बारिश तो पहले भी होती थी। तब ओलावृष्टि फसल पकने से आगे या पीछे होती थी, लेकिन इस बार किसान और मजदूर खेतों में बैठे फसल काट रहे हैं और ऊपर से ओले पड़ रहे हैं। ऐसा मंजर पहली बार देखा है। इस बार भूसा की भी परेशानी पैदा होती दिख रही है। जहां तक प्रशासन का सवाल है उसकी कागजी बाजीगरी किसी से छिपी नहीं है। उन्हें पहले भी कभी नुकसान 30 प्रतिशत से अधिक नहीं दिखा, अब भी यही आलम देखने को मिल सकता है।


किसानों को कर दिया बेबस
गभाना के गांव कन्होई के 84 वर्षीय किसान शंकरपाल सिंह की आंखों में इस बार की तबाही साफ झलक रही थी। बताते हैं कि पिछले 50 वर्षों में उन्होंने ऐसी बेमौसम बारिश कभी नहीं देखी। अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। प्रकृति के इस प्रहार ने किसानों को बेबस कर दिया है।




किसानों की पीड़ा देख जन्मदिन की खुशी भूले

अतरौली। केएमवी इंटर कॉलेज से रिटायर्ड प्रवक्ता और गांव मढ़ौली निवासी 90 वर्षीय डीएस लोधी ने बताया कि रविवार को उनका जन्मदिन था। उनके काफी शिष्य और किसान उनसे मिलने आए थे। जब उन्होंने किसानों की बर्बादी का मंजर बताया तो वह अपने जन्मदिन की खुशियां भूल गए और आंखों में आंसू आ गए। शाम को मन नहीं माना तो वह बेटे धीरेंद्र लोधी के साथ खेतों की तरफ घूमने गए, जहां खेतों में बिखरी पड़ी बारिश में भीगती गेहूं की फसल का आलम देख अपने आंसू नहीं रोक सके। उन्होंने कहा कि यह फसल नहीं किसान का साल भर का राशन और धन है जोकि पानी से बर्बाद हो गया। इससे वह अपनी जरूरतें पूरी करता है। सरकार को तत्काल नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए।


प्रशासन करवा रहा है सर्वे
- फसल के नुकसान के सर्वे के लिए राजस्व टीम लगाई गई हैं। सर्वे कराया जा रहा है, जो भी शासन की गाइडलाइन के अनुसार संभव होगा किसानों की मदद की जाएगी। - राजेश वर्मा, तहसीलदार
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