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Aligarh News: पुलिस की कहानी में झोल, मुठभेड़ पर भड़क रहा ग्रामीणों में आक्रोश
Mon, 13 Oct 2025 11:18 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Mon, 13 Oct 2025 11:18 PM IST
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कलेक्ट्रेट पर डीएम से गुहार लगा रहीं बढ़ाकलां की महिलाएं। संवाद
- फोटो : samvad
पुलिस की मुठभेड़ की कहानी में झोल ही झोल है। इससे परिजनों ही नहीं ग्रामीणों भी आक्रोश है। परिजनों का कहना है कि जिस व्यापारी के घर में लूटपाट के प्रयास की घटना होने की बात कही गई, वह गिरफ्तार सोनू और देवा को पहले से ही जानता था।पुलिस ने घर पर दबिश दी तो उन्होंने स्वयं ही दोनों को पुलिस को सौंपा, लेकिन पुलिस ने सुसावली रजबहे से उनकी फर्जी गिरफ्तारी दिखाई और सोनू के पैर में भी गोली मार दी।
कलेक्ट्रेट के घेराव में शामिल परिवार की महिलाएं रोते-बिलखते हुए सोनू व सूर्यदेव उर्फ देवा निवासी बढ़ाकलां इगलास को निर्दाेष बता रही थीं और मुकदमे के वादी व पुलिस को कोस रही थीं।
इससे पहले इस मामले को लेकर शनिवार को थाना मुरसान का घेराव किया गया था। रविवार को गांव में पंचायत हुई थी, जिसमें रविवार को कलेक्ट्रेट घेरने की बात कही थी और पूर्व घोषणा के तहत सोमवार को ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंच गए और घेराव किया। कुछ लोग डीएम के चेंबर में भी घुस गए।
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इस मामले में कार्रवाई नहीं होने पर 15 अक्तूबर को महापंचायत की चेतावनी दी गई है। पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने बताया कि सोनू का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
किसान मोर्चा व परिवार के सदस्यों ने नौ सूत्री मांग पत्र डीएम को सौंपा है। इसमें आरोपियों को दोषमुक्त करने, पुलिस के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज करने, खाद व्यापारी से तीन लाख रुपये वापस दिलाने और उस पर रिपोर्ट दर्ज कराने, साथ ही पीड़ित पक्ष को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने और प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई।
वीरेंद्र बने मुरसान के थानाध्यक्ष
पुलिस अधीक्षक चिंरजीवनाथ सिन्हा ने एसओ मुरसान ममता सिंह को हटाकर परिवार परामर्श केंद्र पर तैनात किया है। पुलिस लाइन से इंस्पेक्टर वीरेंद्र प्रताप गिरी को मुरसान कोतवाली का चार्ज दिया है।
सपा सांसद बोले- हमेशा पैर में ही गोली क्यों लगती है
रामजीलाल सुमन ने की दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग
मुरसान में हुई मुठभेड़ के मामले में सियासत गरमा गई है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने पुलिस की इस कार्रवाई को फर्जी बताया है। उन्होंने मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है कि पुलिस की गोली पैर में ही क्यों लगती है।
सोमवार को वह गांव बढ़ाकलां पहुंचे और परिजनों व ग्रामीणों से घटना की जानकारी ली।हाथरस में उन्होंने मीडिया से वार्ता की।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब व्यापारी और दूसरा पक्ष पहले से परिचित थे तो मुकदमा अज्ञात के खिलाफ क्यों दर्ज किया गया। सुमन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सोनू और सूर्यदेव के परिवार के तीन सदस्यों को पकड़कर दबाव बनाया कि दोनों युवकों को उनके हवाले किया जाए। ग्रामीणों की मौजूदगी में युवकों को पुलिस को सौंपा गया, जिसके बाद पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी मुठभेड़ में दिखा दी।
सुमन ने पुलिस की कहानी को मनगढ़ंत बताते हुए इस पूरे मामले की जांच किसी ऐसी एजेंसी से कराने की मांग की, जो पुलिस के दबाव में न हो। इस मौके पर सपा के प्रदेश सचिव बृजमोहन राही, लल्लन बाबू एडवोकेट, टेकपाल कुशवाहा आदि मौजूद थे।
पुलिस के अनुसार यह हुई घटना
पुलिस ने मुठभेड़ के बाद बताया था कि बृहस्पतिवार को खाद कारोबारी के अमित अग्रवाल के घर दो नकाबपोश बदमाश लूट के इरादे से घुसे और उनकी मां आशा अग्रवाल और पत्नी शिल्पी पर तमंचा तान दिया। शोरगुल होने पर नौकरों का आता देख बदमाश फायरिंग कर फरार हो गए।
इस तरह किया था गिरफ्तारी का दावा
घटना के खुलासे के लिए एसपी ने चार टीमों और सर्विलांस टीम को लगाया। गश्त के दौरान एक सूचना मिलने पर पुलिस ने सुसावली रजबहे पर चेकिंग शुरू कर दी। इस दौरान बाइक पर दो संदिग्ध आते दिखाई दिए, जिन्होंने रोकने पर फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग में एक बदमाश सोनू उर्फ ओमवीर को गोली लग गई। पुलिस ने उसे और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया।
मां ने बताया खाद खरीदने के दौरान हुआ विवाद
ओमवीर उर्फ सोनू की मां कुसुमा का कहना है कि उनके बेटे सोनू ने जब खाद के दाम कम चल रहे थे, तब खाद खरीदने के लिए अमित अग्रवाल को तीन लाख रुपये एडवांस दिए थे। अब जब वह खाद खरीदने के लिए पहुंचा तो अमित अग्रवाल ज्यादा दाम मांगने लगा, दुकानदार ने अपने बड़े भाई से भाई से बात करने के लिए घर भेजा था।जहां इनकी आपस में कहासुनी हो गई, जिसे लूट की कोशिश बता दिया।
चारों ओर से घर को घेरकर घुसी थी पुलिस
कुसमा ने सुसावली रजबहे से गिरफ्तारी के पुलिस के दावे को पूरी तरह से झूठा बताया और कहा कि पुलिस ने चारों ओर से उनका घर घेर लिया था और उसके बाद चोरों की तरह पुलिस घर में घुसी थी। सभी लोगों के फोन ले लिए। परिवार के सदस्यों ने ही ओमवीर और देवा को पुलिस को सौंपा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले में समझौता कराने के नाम पर पांच लाख रुपये मांगे थे।
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कलेक्ट्रेट के घेराव में शामिल परिवार की महिलाएं रोते-बिलखते हुए सोनू व सूर्यदेव उर्फ देवा निवासी बढ़ाकलां इगलास को निर्दाेष बता रही थीं और मुकदमे के वादी व पुलिस को कोस रही थीं।
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इससे पहले इस मामले को लेकर शनिवार को थाना मुरसान का घेराव किया गया था। रविवार को गांव में पंचायत हुई थी, जिसमें रविवार को कलेक्ट्रेट घेरने की बात कही थी और पूर्व घोषणा के तहत सोमवार को ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंच गए और घेराव किया। कुछ लोग डीएम के चेंबर में भी घुस गए।
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इस मामले में कार्रवाई नहीं होने पर 15 अक्तूबर को महापंचायत की चेतावनी दी गई है। पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने बताया कि सोनू का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
किसान मोर्चा व परिवार के सदस्यों ने नौ सूत्री मांग पत्र डीएम को सौंपा है। इसमें आरोपियों को दोषमुक्त करने, पुलिस के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज करने, खाद व्यापारी से तीन लाख रुपये वापस दिलाने और उस पर रिपोर्ट दर्ज कराने, साथ ही पीड़ित पक्ष को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने और प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई।
वीरेंद्र बने मुरसान के थानाध्यक्ष
पुलिस अधीक्षक चिंरजीवनाथ सिन्हा ने एसओ मुरसान ममता सिंह को हटाकर परिवार परामर्श केंद्र पर तैनात किया है। पुलिस लाइन से इंस्पेक्टर वीरेंद्र प्रताप गिरी को मुरसान कोतवाली का चार्ज दिया है।
सपा सांसद बोले- हमेशा पैर में ही गोली क्यों लगती है
रामजीलाल सुमन ने की दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग
मुरसान में हुई मुठभेड़ के मामले में सियासत गरमा गई है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने पुलिस की इस कार्रवाई को फर्जी बताया है। उन्होंने मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है कि पुलिस की गोली पैर में ही क्यों लगती है।
सोमवार को वह गांव बढ़ाकलां पहुंचे और परिजनों व ग्रामीणों से घटना की जानकारी ली।हाथरस में उन्होंने मीडिया से वार्ता की।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब व्यापारी और दूसरा पक्ष पहले से परिचित थे तो मुकदमा अज्ञात के खिलाफ क्यों दर्ज किया गया। सुमन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सोनू और सूर्यदेव के परिवार के तीन सदस्यों को पकड़कर दबाव बनाया कि दोनों युवकों को उनके हवाले किया जाए। ग्रामीणों की मौजूदगी में युवकों को पुलिस को सौंपा गया, जिसके बाद पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी मुठभेड़ में दिखा दी।
सुमन ने पुलिस की कहानी को मनगढ़ंत बताते हुए इस पूरे मामले की जांच किसी ऐसी एजेंसी से कराने की मांग की, जो पुलिस के दबाव में न हो। इस मौके पर सपा के प्रदेश सचिव बृजमोहन राही, लल्लन बाबू एडवोकेट, टेकपाल कुशवाहा आदि मौजूद थे।
पुलिस के अनुसार यह हुई घटना
पुलिस ने मुठभेड़ के बाद बताया था कि बृहस्पतिवार को खाद कारोबारी के अमित अग्रवाल के घर दो नकाबपोश बदमाश लूट के इरादे से घुसे और उनकी मां आशा अग्रवाल और पत्नी शिल्पी पर तमंचा तान दिया। शोरगुल होने पर नौकरों का आता देख बदमाश फायरिंग कर फरार हो गए।
इस तरह किया था गिरफ्तारी का दावा
घटना के खुलासे के लिए एसपी ने चार टीमों और सर्विलांस टीम को लगाया। गश्त के दौरान एक सूचना मिलने पर पुलिस ने सुसावली रजबहे पर चेकिंग शुरू कर दी। इस दौरान बाइक पर दो संदिग्ध आते दिखाई दिए, जिन्होंने रोकने पर फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग में एक बदमाश सोनू उर्फ ओमवीर को गोली लग गई। पुलिस ने उसे और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया।
मां ने बताया खाद खरीदने के दौरान हुआ विवाद
ओमवीर उर्फ सोनू की मां कुसुमा का कहना है कि उनके बेटे सोनू ने जब खाद के दाम कम चल रहे थे, तब खाद खरीदने के लिए अमित अग्रवाल को तीन लाख रुपये एडवांस दिए थे। अब जब वह खाद खरीदने के लिए पहुंचा तो अमित अग्रवाल ज्यादा दाम मांगने लगा, दुकानदार ने अपने बड़े भाई से भाई से बात करने के लिए घर भेजा था।जहां इनकी आपस में कहासुनी हो गई, जिसे लूट की कोशिश बता दिया।
चारों ओर से घर को घेरकर घुसी थी पुलिस
कुसमा ने सुसावली रजबहे से गिरफ्तारी के पुलिस के दावे को पूरी तरह से झूठा बताया और कहा कि पुलिस ने चारों ओर से उनका घर घेर लिया था और उसके बाद चोरों की तरह पुलिस घर में घुसी थी। सभी लोगों के फोन ले लिए। परिवार के सदस्यों ने ही ओमवीर और देवा को पुलिस को सौंपा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले में समझौता कराने के नाम पर पांच लाख रुपये मांगे थे।