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उड़ान में अवरोध बने छह टावर हटेंगे, हैंगर पर होगा विचार
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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की टीम धनीपुर हवाई पट्टी का निरीक्षण करती हुई
- फोटो : CITY OFFICE
धनीपुर हवाई पट्टी पर विकसित किए जा रहे मिनी एयरपोर्ट के शुरू होने से पहले ही अवरोध के तौर पर सामने आए सभी पांच मोबाइल टावर और एक एटीसी टावर को हटाया जाएगा। साथ ही राजकीय निर्माण निगम को अब संशोधित बजट भी जारी होगा। शनिवार को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के एनआर रीजन के जीएम मनोज कुमार के नेतृत्व में आई तीन सदस्यीय टीम ने धनीपुर एयरपोर्ट का निरीक्षण करते हुए सभी कार्यों पर संतोष जाहिर किया। सोमवार को टीम अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
धनीपुर हवाई पट्टी के आसपास के गांव में जीटीएल के तीन टावर, एक-एक टावर जीओ व वोडाफोन का है और एक एटीसी टावर अवरोध के तौर पर सामने आए हैं। जीटीएल का एक टावर प्रशासन ने हटवा दिया है। जीओ व वोडाफोन पर भी सहमति बन गई है। एटीसी टावर वर्तमान में निष्क्त्रिस्य है। टीम ने इनको हटाने के निर्देश सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह को दिए। साथ ही एक्सरे मशीन सहित अन्य उपकरणों तय स्थान पर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार के हैंगर (जहाज खड़ा करने का स्थान) के संबंध में कोई सहमति नहीं बन सकी।
अधिकारियों का मानना है कि इसे हटाए बिना भी काम चल सकता है। इसके बाद टीम ने राजकीय निर्माण निगम के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्य की गुणवत्ता पर संतोष जाहिर किया। निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर हरिओम शर्मा ने टीम के सामने चार करोड़ रुपये के संशोधित बजट की मांग रखी। टीम ने उनकी मांग का समर्थन करते हुए कहा कि तय बजट के सापेक्ष काम बढ़ा है। इस संबंध में वह अपनी निरीक्षण आख्या में लिखकर शासन को देंगे। सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह ने बताया कि अवरोध बने टावरों का निस्तारण अगले 15 से 20 दिन में हो जाएगा। हैंगर के संबंध में शासन निर्णय लेगा। राजकीय निर्माण निगम को रिवाइज बजट देने का काम भी शासन स्तर से होना है।
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धनीपुर हवाई पट्टी के आसपास के गांव में जीटीएल के तीन टावर, एक-एक टावर जीओ व वोडाफोन का है और एक एटीसी टावर अवरोध के तौर पर सामने आए हैं। जीटीएल का एक टावर प्रशासन ने हटवा दिया है। जीओ व वोडाफोन पर भी सहमति बन गई है। एटीसी टावर वर्तमान में निष्क्त्रिस्य है। टीम ने इनको हटाने के निर्देश सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह को दिए। साथ ही एक्सरे मशीन सहित अन्य उपकरणों तय स्थान पर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार के हैंगर (जहाज खड़ा करने का स्थान) के संबंध में कोई सहमति नहीं बन सकी।
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अधिकारियों का मानना है कि इसे हटाए बिना भी काम चल सकता है। इसके बाद टीम ने राजकीय निर्माण निगम के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्य की गुणवत्ता पर संतोष जाहिर किया। निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर हरिओम शर्मा ने टीम के सामने चार करोड़ रुपये के संशोधित बजट की मांग रखी। टीम ने उनकी मांग का समर्थन करते हुए कहा कि तय बजट के सापेक्ष काम बढ़ा है। इस संबंध में वह अपनी निरीक्षण आख्या में लिखकर शासन को देंगे। सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह ने बताया कि अवरोध बने टावरों का निस्तारण अगले 15 से 20 दिन में हो जाएगा। हैंगर के संबंध में शासन निर्णय लेगा। राजकीय निर्माण निगम को रिवाइज बजट देने का काम भी शासन स्तर से होना है।
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