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बांदा से आते फर्जी सिम, फिर बनते फर्जी बैंक खाते
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बरामद किये गए मोबाइल और लैपटॉप।
- फोटो : CITY OFFICE
साइबर थाना पुलिस द्वारा दबोचा गया साइबर ठगी का गिरोह पिछले डेढ़ साल से वैशाली के फ्लैट में चल रहा था। गिरफ्तार सरगना ने कई महत्वपूर्ण राज उगले हैं। जिसके आधार पर पुलिस अभी इस गिरोह की और परत खोलने पर काम कर रही है। पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह का मुख्य सरगना बांदा से फर्जी आईडी पर सिम लेकर आता था। उनकी मदद से फर्जी ऑनलाइन बैंक खाते खोले जाते थे और उन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी।
एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि गिरफ्तार सरगना संदीप अपने मूल जनपद बांदा से फर्जी आईडी पर सिम लाता था। यह सिम वह तारिक को मुहैया कराता था। उन सिमों के जरिये ऑनलाइन खाते बैंक ऑफ महाराष्ट्रा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एचडीबी बैंक आदि में खोले जाते थे। चूंकि इन बैंक में ऑनलाइन खाते के लिए एक सिम की जरूरत होती है। उसी का यह प्रयोग करते थे। इसके अलावा कानपुर से बैठकर भी कुछ खाते खुलवाए जाते थे। इस गिरोह में गिरफ्तार अदनान व उसके दो अन्य साथी नईम व समीर एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के कस्टमर केयर में नौकरी कर चुके हैं। वही इनको उन उपभोक्ताओं की सूची मुहैया कराते थे, जिनकी बीमा पॉलिसी परिपक्व हो चुकी है और वे भुगतान भी ले चुके हैं। फिर ये सभी लोग उन्हें फोन कर रुपये शेष रह जाने का लालच देते थे। बाद में रुपये देने के नाम पर उनके खातों की ऑनलाइन जानकारियां जुटाकर रकम अपने फर्जी खातों में आहरित कर लेते थे। इसके बाद इनके गिरोह के अन्य सदस्यों के असल खातों में वह रकम भेजी जाती थी। वे अपने कार्डों की मदद से रकम निकालकर खर्च करते थे।
50 बैंक खाते और 10 लोग निशाने पर
पुलिस के अनुसार इस गिरोह के अब तक पचास बैंक खाते सामने आए हैं। उनकी जांच की जा रही है। एक-एक बैंक खाते में पिछले तीन-तीन माह में 20-20 लाख रुपये का आदान-प्रदान हुआ है। पूर्व में भी कुछ अन्य जिलों व राज्यों की पुलिस ने इस गिरोह तक पहुंचने का प्रयास किया। मगर गिरफ्तार नहीं कर पाई। हां, इस गिरोह के सदस्यों के कुछ खाते जरूर फ्रीज करा दिए गए। जो खाते फ्रीज पड़े हैं। उनमें भी इसी तरह से रकम पड़ी है। साथ में दस के करीब लोग अभी रडार पर हैं। इन सभी की जांच व बैंक डिटेल मिलने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। ये दस लोग वे हैं, जिनके खाते प्रयोग में लिए जाते हैं।
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सरगना की बहन का प्रेमी भी फंसा धंधे में
इस गिरोह के सरगना संदीप की बहन भी साथ ही रहती है। उसका हिमांशु शेखर से प्रेम प्रसंग चल रहा है। इस धंधे में वह भी शामिल हो गया है। वह लोगों को कॉल करने और अपने खाते में रुपये मंगवाने के धंधे में शामिल है।
ये दो आरोपी अभी फरार
इस गिरोह के दो अपराधी आंकिब रजा निवासी 28/11 हित्मतपुरी त्रिलोकपुरी सरोदा खादर नई दिल्ली व सलमान हैदर निवासी 35/184 ब्लॉक 35 त्रिलोकपुरी ईस्ट दिल्ली फरार हैं। उनकी तलाश में एक टीम लगी हुई है।
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एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि गिरफ्तार सरगना संदीप अपने मूल जनपद बांदा से फर्जी आईडी पर सिम लाता था। यह सिम वह तारिक को मुहैया कराता था। उन सिमों के जरिये ऑनलाइन खाते बैंक ऑफ महाराष्ट्रा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एचडीबी बैंक आदि में खोले जाते थे। चूंकि इन बैंक में ऑनलाइन खाते के लिए एक सिम की जरूरत होती है। उसी का यह प्रयोग करते थे। इसके अलावा कानपुर से बैठकर भी कुछ खाते खुलवाए जाते थे। इस गिरोह में गिरफ्तार अदनान व उसके दो अन्य साथी नईम व समीर एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के कस्टमर केयर में नौकरी कर चुके हैं। वही इनको उन उपभोक्ताओं की सूची मुहैया कराते थे, जिनकी बीमा पॉलिसी परिपक्व हो चुकी है और वे भुगतान भी ले चुके हैं। फिर ये सभी लोग उन्हें फोन कर रुपये शेष रह जाने का लालच देते थे। बाद में रुपये देने के नाम पर उनके खातों की ऑनलाइन जानकारियां जुटाकर रकम अपने फर्जी खातों में आहरित कर लेते थे। इसके बाद इनके गिरोह के अन्य सदस्यों के असल खातों में वह रकम भेजी जाती थी। वे अपने कार्डों की मदद से रकम निकालकर खर्च करते थे।
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50 बैंक खाते और 10 लोग निशाने पर
पुलिस के अनुसार इस गिरोह के अब तक पचास बैंक खाते सामने आए हैं। उनकी जांच की जा रही है। एक-एक बैंक खाते में पिछले तीन-तीन माह में 20-20 लाख रुपये का आदान-प्रदान हुआ है। पूर्व में भी कुछ अन्य जिलों व राज्यों की पुलिस ने इस गिरोह तक पहुंचने का प्रयास किया। मगर गिरफ्तार नहीं कर पाई। हां, इस गिरोह के सदस्यों के कुछ खाते जरूर फ्रीज करा दिए गए। जो खाते फ्रीज पड़े हैं। उनमें भी इसी तरह से रकम पड़ी है। साथ में दस के करीब लोग अभी रडार पर हैं। इन सभी की जांच व बैंक डिटेल मिलने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। ये दस लोग वे हैं, जिनके खाते प्रयोग में लिए जाते हैं।
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सरगना की बहन का प्रेमी भी फंसा धंधे में
इस गिरोह के सरगना संदीप की बहन भी साथ ही रहती है। उसका हिमांशु शेखर से प्रेम प्रसंग चल रहा है। इस धंधे में वह भी शामिल हो गया है। वह लोगों को कॉल करने और अपने खाते में रुपये मंगवाने के धंधे में शामिल है।
ये दो आरोपी अभी फरार
इस गिरोह के दो अपराधी आंकिब रजा निवासी 28/11 हित्मतपुरी त्रिलोकपुरी सरोदा खादर नई दिल्ली व सलमान हैदर निवासी 35/184 ब्लॉक 35 त्रिलोकपुरी ईस्ट दिल्ली फरार हैं। उनकी तलाश में एक टीम लगी हुई है।