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संदीप हत्याकांड: नौसिखिये अपराधियों का शातिराना अंदाज
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बेशक अंकुश, उत्कर्ष व साहिल नौसिखिये थे। मगर उनका अंदाजा हत्या की प्लानिंग के दिन से ही बेहद शातिराना रहा। हां, इनमें से अंकुश जरूर एक मर्तबा फायरिंग की घटना में जेल गया। मगर कभी इस तरह की प्लानिंग वाली किसी घटना में शामिल नहीं रहा। इनके शातिराना अंदाजा का ये आलम था कि हत्या होनी ही है, ऐसे शूटर चाहिए। फिर भागते समय तय किया कि पुलिस के हाथ नहीं आना है, चाहे कुछ भी करना पड़े। इसी प्रयास में टोल पर न पकड़ में आएं, इसके लिए हर टोल पर नंबर प्लेट बदली गई। हुलिया बदलने के लिए दाड़ी बाल तक कटवाए गए।
पुलिस पहुंचती और ये निकलते थे
पुलिस पूछताछ में खुद अंकुश ने ये स्वीकारा कि घटना के अगले दिन पिता को हिरासत में लिए जाने के बाद उसे अहसास हो गया था कि अब पुलिस उसका पीछा करेगी। पुलिस ने वही किया भी। जहां-जहां वह पहुंचा, वहां पुलिस उसके पीछे पहुंची। मगर वह कुछ समय पहले ही निकला। इससे बचने के लिए उसने सिम बेशक बंद किया। मगर कई जगह क्रेडिट कार्ड का प्रयोग और कुछ जगह व्हाट्सएप से अपनों को कॉल करना उसके लिए घातक रहा।
एक गैराज से चोरी की नंबर प्लेट
इस दौरान उन्होंने दिल्ली से हरियाणा की ओर जाते समय एक गैराज से एक नंबर प्लेट चोरी की। इसके बाद उन्होंने प्रयोग किया कि टोल आने से पहले अपनी गाड़ी पर चोरी की नंबर प्लेट लगाते थे। फिर टोल पार कर उसे बदल लेते थे। उनके फोटो भी पुलिस ने कई टोल नाकों पर दिए थे। मगर हुलिया बदला होने के कारण कहीं सीसीटीवी में कैद नहीं हो सके।
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नेपाल भागने की थी प्लानिंग, उत्कर्ष छोड़ भागा
उत्तराखंड से लखनऊ जाते समय उनकी प्लानिंग नेपाल भागने की थी। इसी उद्देश्य से लखनऊ पहुंचे थे। मगर उत्कर्ष ने वहां यह कहकर धोखा दे दिया कि तुम्हारे चक्कर में मेरे घर वाले परेशान हैं। इसी दौरान वहां उत्कर्ष का एक्सीडेंट भी हुआ और पुलिस भी आई। हालांकि वहां उसने पांच हजार रुपये घायल को देकर बात निपटाई। मगर उसी समय अंकुश व साहिल ने उसे डांटा तो वह छोड़कर भाग गया। इसके बाद वे जयपुर के लिए रवाना हुए।
टिर्री वाले का नंबर मांग कर चलाया व्हाट्सएप
जब वे हमीरपुर पहुंचे और एक चाय की दुकान पर कुछ घंटे साहिल ने चारपाई पर आराम किया। वहां अंकुश ने एक टिर्री वाले से कॉल करने के लिए कीपैड फोन मांग लिया। उस नंबर का ओटीपी जनरेट कर उसने अपने मोबाइल में व्हाट्सएप कॉल शुरू की। उसे प्रयोग किया। यह लोकेशन पुलिस को मिली। मगर यहां से जयपुर पहुंचकर उसने करीब आधा दर्जन स्पूफिंग एप की मदद से इंटरनेट कॉलिंग कीं। तब जाकर पुलिस को उसकी नई लोकेशन मिली। बाद में दिल्ली आकर उन्होंने एक नया सिम खरीदा था। उसे भी पुलिस ने ट्रैस कर लिया। तभी पुलिस को उनके अलीगढ़ आने की भनक भी मिलने लगी थी। इस दौरान होटल ढाबों के वाईफाई से ऑनलाइन चेटिंग, पब्जी चेटिंग के जरिये भी इन्होंने लोगों से संपर्क किया।
600 से अधिक सीडीआर निकलीं, पांच वाहनों का इस्तेमाल
इस घटना में आरोपियों ने अंकुश की क्रेटा, शूटरों की बलैनो, दुष्यंत के चाचा की फारच्युनर, उत्कर्ष की स्कार्पियो व एक बाइक का प्रयोग किया। वहीं पुलिस ने इन तक पहुंचने के लिए 600 से ज्यादा नंबरों की सीडीआर पर काम किया।
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पुलिस पहुंचती और ये निकलते थे
पुलिस पूछताछ में खुद अंकुश ने ये स्वीकारा कि घटना के अगले दिन पिता को हिरासत में लिए जाने के बाद उसे अहसास हो गया था कि अब पुलिस उसका पीछा करेगी। पुलिस ने वही किया भी। जहां-जहां वह पहुंचा, वहां पुलिस उसके पीछे पहुंची। मगर वह कुछ समय पहले ही निकला। इससे बचने के लिए उसने सिम बेशक बंद किया। मगर कई जगह क्रेडिट कार्ड का प्रयोग और कुछ जगह व्हाट्सएप से अपनों को कॉल करना उसके लिए घातक रहा।
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एक गैराज से चोरी की नंबर प्लेट
इस दौरान उन्होंने दिल्ली से हरियाणा की ओर जाते समय एक गैराज से एक नंबर प्लेट चोरी की। इसके बाद उन्होंने प्रयोग किया कि टोल आने से पहले अपनी गाड़ी पर चोरी की नंबर प्लेट लगाते थे। फिर टोल पार कर उसे बदल लेते थे। उनके फोटो भी पुलिस ने कई टोल नाकों पर दिए थे। मगर हुलिया बदला होने के कारण कहीं सीसीटीवी में कैद नहीं हो सके।
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नेपाल भागने की थी प्लानिंग, उत्कर्ष छोड़ भागा
उत्तराखंड से लखनऊ जाते समय उनकी प्लानिंग नेपाल भागने की थी। इसी उद्देश्य से लखनऊ पहुंचे थे। मगर उत्कर्ष ने वहां यह कहकर धोखा दे दिया कि तुम्हारे चक्कर में मेरे घर वाले परेशान हैं। इसी दौरान वहां उत्कर्ष का एक्सीडेंट भी हुआ और पुलिस भी आई। हालांकि वहां उसने पांच हजार रुपये घायल को देकर बात निपटाई। मगर उसी समय अंकुश व साहिल ने उसे डांटा तो वह छोड़कर भाग गया। इसके बाद वे जयपुर के लिए रवाना हुए।
टिर्री वाले का नंबर मांग कर चलाया व्हाट्सएप
जब वे हमीरपुर पहुंचे और एक चाय की दुकान पर कुछ घंटे साहिल ने चारपाई पर आराम किया। वहां अंकुश ने एक टिर्री वाले से कॉल करने के लिए कीपैड फोन मांग लिया। उस नंबर का ओटीपी जनरेट कर उसने अपने मोबाइल में व्हाट्सएप कॉल शुरू की। उसे प्रयोग किया। यह लोकेशन पुलिस को मिली। मगर यहां से जयपुर पहुंचकर उसने करीब आधा दर्जन स्पूफिंग एप की मदद से इंटरनेट कॉलिंग कीं। तब जाकर पुलिस को उसकी नई लोकेशन मिली। बाद में दिल्ली आकर उन्होंने एक नया सिम खरीदा था। उसे भी पुलिस ने ट्रैस कर लिया। तभी पुलिस को उनके अलीगढ़ आने की भनक भी मिलने लगी थी। इस दौरान होटल ढाबों के वाईफाई से ऑनलाइन चेटिंग, पब्जी चेटिंग के जरिये भी इन्होंने लोगों से संपर्क किया।
600 से अधिक सीडीआर निकलीं, पांच वाहनों का इस्तेमाल
इस घटना में आरोपियों ने अंकुश की क्रेटा, शूटरों की बलैनो, दुष्यंत के चाचा की फारच्युनर, उत्कर्ष की स्कार्पियो व एक बाइक का प्रयोग किया। वहीं पुलिस ने इन तक पहुंचने के लिए 600 से ज्यादा नंबरों की सीडीआर पर काम किया।