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विदेशी सिगरेट पेपर और फिल्टर से लगा रहे गांजे का कश
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Mon, 16 Apr 2018 01:37 AM IST
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नशा करता युवक।
- फोटो : अमर उजाला
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आशीष निगम
अप्रैल शुक्रवार को पुलिस ने शहर के बीचोबीच मीनाक्षी पुल के नीचे 38 किलो गांजा पकड़ा। एक ही जगह पर इतनी बड़ी मात्रा में गांजा बरामद कर पुलिस भी हैरान है। 10 हजार रुपये किलो के हिसाब से इसकी कीमत 3 लाख 80 हजार रुपये आंकी गई है। हकीकत में यह कीमत इतनी ज्यादा नहीं है। नशे के बाजार में 38 किलो गांजे की कीमत मात्र कुछ हजार रुपये बताई जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या गांजे की खपत तेजी से बढ़ती जा रही है..? जवाब है कि युवाओं में अब गांजा पीने का शौक बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसकी ठोस वजह यह है कि इसके लिए विदेशी सिगरेट पेपर, कई तरह के फिल्टर, महंगी तंबाकू और गांजा आसानी से हर जगह उपलब्ध है।
गांजे की एक भरी हुई सिगरेट 20 से 25 रुपये में तैयार हो रही है। इसको कहीं भी सुलगाया जा सकता है, क्योंकि एक खास किस्म के सिगरेट पेपर में भरे जाने के कारण गांजे की तीक्ष्ण गंध नहीं आती है। यही नहीं हुक्कों में भी इसका प्रयोग हो रहा है। जेब में रखे जाने वाले बेहद पतले हुक्कों में युवा गांजे और चरस का कश भर तंदुरुस्ती को धुएं में उड़ा रहे हैं। शहर की चुनिंदा चाय की दुकानों में शाम से इसके नजारे आम हो जाते हैं। इससे भी ज्यादा गंभीर सवाल यह है कि 20 से 28 वर्ष के युवा इसके शौकीन हो रहे हैं।
सिगरेट पेपर कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि फ्रांस की एक नामी कंपनी का सिगरेट पेपर सबसे बेहतर है, जिसके साथ फिल्टर भी आता है। एक पेपर फिल्टर के साथ पांच से सात रुपये का पड़ता है। कुछ अन्य विदेशी और स्वदेशी कंपनियां भी इसको बना रही है। पहले चुनिंदा दुकानों में ही यह सामान मिलता था, लेकिन अब इसकी उपलब्धता सभी दुकानों में हो रही है। गुजरे छह महीने में इसकी खपत तेजी से बढ़ी है। स्थानीय दुकानदारों को इसकी सप्लाई कई शहरों से दी मिल रही है। क्योंकि बहुत से लोग सिगरेट पेपर लेकर घर में सिगरेट बना कर पीते हैं या पाइप में तंबाकू पीते हैं, इसलिए सिगरेट पेपर, सिगरेट में भरने वाली तंबाकू और फिल्टर की बिक्री पर कोई रोकटोक नहीं है। इसी को खरीद कर युवा गांजा और चरस भर कर नशीली सिगरेट बना लेते हैं।
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नशे के कारोबार पर अमर उजाला का प्रहार
27 फरवरी को पेज नंबर-5 पर ‘कप्तान सर.. अभिभावक बन हुक्काबारों को देख लीजिए’।
12 मार्च को पेज नंबर-2 पर ‘हुक्का बार.. लाइसेंस किसने दिया, अफसरों को पता नहीं..’।
14 मार्च को पेज नंबर-6 पर ‘हुक्का बार पर सीडीओ सख्त’।
15 मार्च को पेज नंबर-2 पर ‘पराग रेस्टोरेंट में हुक्का बार पार्टी निरस्त’।
नक्सल प्रभावित राज्यों में गांजे की खेती आय का बड़ा स्रोत है। वहां से दिल्ली, एनसीआर और यूपी में इसकी सप्लाई हो रही है। मीनाक्षी पुल के पास पकड़ा गया गांजा एक चिंता का विषय है। इसके पूरे रैकेट का खुलासा जल्द होगा। इससे पहले सेंटर प्वाइंट में हुक्का बार बंद कराया गया था। युवाओं को नशे से बचाने के सभी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
-राजेश पांडेय, एसएसपी।
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अप्रैल शुक्रवार को पुलिस ने शहर के बीचोबीच मीनाक्षी पुल के नीचे 38 किलो गांजा पकड़ा। एक ही जगह पर इतनी बड़ी मात्रा में गांजा बरामद कर पुलिस भी हैरान है। 10 हजार रुपये किलो के हिसाब से इसकी कीमत 3 लाख 80 हजार रुपये आंकी गई है। हकीकत में यह कीमत इतनी ज्यादा नहीं है। नशे के बाजार में 38 किलो गांजे की कीमत मात्र कुछ हजार रुपये बताई जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या गांजे की खपत तेजी से बढ़ती जा रही है..? जवाब है कि युवाओं में अब गांजा पीने का शौक बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसकी ठोस वजह यह है कि इसके लिए विदेशी सिगरेट पेपर, कई तरह के फिल्टर, महंगी तंबाकू और गांजा आसानी से हर जगह उपलब्ध है।
गांजे की एक भरी हुई सिगरेट 20 से 25 रुपये में तैयार हो रही है। इसको कहीं भी सुलगाया जा सकता है, क्योंकि एक खास किस्म के सिगरेट पेपर में भरे जाने के कारण गांजे की तीक्ष्ण गंध नहीं आती है। यही नहीं हुक्कों में भी इसका प्रयोग हो रहा है। जेब में रखे जाने वाले बेहद पतले हुक्कों में युवा गांजे और चरस का कश भर तंदुरुस्ती को धुएं में उड़ा रहे हैं। शहर की चुनिंदा चाय की दुकानों में शाम से इसके नजारे आम हो जाते हैं। इससे भी ज्यादा गंभीर सवाल यह है कि 20 से 28 वर्ष के युवा इसके शौकीन हो रहे हैं।
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सिगरेट पेपर कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि फ्रांस की एक नामी कंपनी का सिगरेट पेपर सबसे बेहतर है, जिसके साथ फिल्टर भी आता है। एक पेपर फिल्टर के साथ पांच से सात रुपये का पड़ता है। कुछ अन्य विदेशी और स्वदेशी कंपनियां भी इसको बना रही है। पहले चुनिंदा दुकानों में ही यह सामान मिलता था, लेकिन अब इसकी उपलब्धता सभी दुकानों में हो रही है। गुजरे छह महीने में इसकी खपत तेजी से बढ़ी है। स्थानीय दुकानदारों को इसकी सप्लाई कई शहरों से दी मिल रही है। क्योंकि बहुत से लोग सिगरेट पेपर लेकर घर में सिगरेट बना कर पीते हैं या पाइप में तंबाकू पीते हैं, इसलिए सिगरेट पेपर, सिगरेट में भरने वाली तंबाकू और फिल्टर की बिक्री पर कोई रोकटोक नहीं है। इसी को खरीद कर युवा गांजा और चरस भर कर नशीली सिगरेट बना लेते हैं।
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नशे के कारोबार पर अमर उजाला का प्रहार
27 फरवरी को पेज नंबर-5 पर ‘कप्तान सर.. अभिभावक बन हुक्काबारों को देख लीजिए’।
12 मार्च को पेज नंबर-2 पर ‘हुक्का बार.. लाइसेंस किसने दिया, अफसरों को पता नहीं..’।
14 मार्च को पेज नंबर-6 पर ‘हुक्का बार पर सीडीओ सख्त’।
15 मार्च को पेज नंबर-2 पर ‘पराग रेस्टोरेंट में हुक्का बार पार्टी निरस्त’।
नक्सल प्रभावित राज्यों में गांजे की खेती आय का बड़ा स्रोत है। वहां से दिल्ली, एनसीआर और यूपी में इसकी सप्लाई हो रही है। मीनाक्षी पुल के पास पकड़ा गया गांजा एक चिंता का विषय है। इसके पूरे रैकेट का खुलासा जल्द होगा। इससे पहले सेंटर प्वाइंट में हुक्का बार बंद कराया गया था। युवाओं को नशे से बचाने के सभी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
-राजेश पांडेय, एसएसपी।