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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   That politics shaken, police went to them bury

जिनसे हिली सियासत, उन्हीं को बिसार गई पुलिस

Fri, 03 Feb 2017 02:00 AM IST
अभिषेक शर्मा
अभिषेक शर्मा Updated Fri, 03 Feb 2017 02:00 AM IST
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बेशक चुनावी सीजन में पुलिस हर बार की तरह अमन कायम रखने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है। मगर कुछ खास ऐसे भी मुद्दे हैं जिन पर गौर करें तो पुलिस की कारगुजारियों पर सवाल खड़ा होता है। 
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अपने जिले के कुछ ऐसे अपराधी हैं, जिनके कृत्य से जिले की नहीं, बल्कि सूबे में सियासत हिली। कई कई दिन तक आंदोलन हुए। मगर उन्हीं अपराधियों को पुलिस भुला बैठी है। कई माह नहीं कई-कई साल बीत गए, उनकी ओर पुलिस का इस सियासी समर में भी ध्यान नहीं जाता। 
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कहने को पुलिस का तर्क रहता है कि फरार हैं, तलाश के हर प्रयास जारी हैं। मफरूरी (फरारी में) में चार्जशीट भेज दी हैं। मगर बड़ा सवाल है कि आखिर यह कब पकड़े जाएंगे ? 
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केस-1
वर्ष 2001 में बरौली विस क्षेत्र में चंडौस के गांव जहराना में दलित बनाम सवर्ण संघर्ष हुआ। इसमें कई दलितों की हत्याएं हुई। घटना की गूंज से प्रदेश की सियासत तक हिल गई और अगले दिन यहां बसपा सुप्रीमो मायावती तक आ गई। यह मामला ठंडा हो गया कि वर्ष 2008 में इसी गांव में एक सवर्ण लड़की की रेप के बाद हत्या हुई। इस घटना का आरोपी दलित युवक पप्पू पुत्र इतवारी को बनाया गया। घटना के बाद काफी बवाल हुआ। पंचायतें हुई। पप्पू् पर तीस हजार रुपये का इनाम भी घोषित हुआ, लेकिन तब से अब तक पप्पू फरार है। 
केस-2
वर्ष 2014 में खैर विस क्षेत्र के गांव जहानगढ़ के  प्रधान पति ज्ञानचंद चंद शर्मा उर्फ ज्ञानी की हत्या कर दी गई। ज्ञानी का राजनीति में कद काफी बढ़ गया था और यह माना जा रहा था कि वह जिला पंचायत का चुनाव लड़ेगा। ज्ञानी की हत्या के बाद भी जमकर बवाल हुआ। जिले की सियासत हिल गई। इस मामले में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर  चौधरी तक को जेल जाना पड़ा। ज्ञानी की हत्या कर सियासत दो खेमों में बंट गई। इस हत्या में एक नामजद बुलंदशहर का पप्पू आज तक फरार है। पुलिस भी उसे भूल गई। 
केस-3
वर्ष 2016 दिसंबर में शिक्षक नेता जितेंद्र उर्फ गुड्डू मास्टर की हत्या शहर में सरेआम छर्रा अड्डे पर की गई। इसे लेकर भी जिले की सियासत गरमा गई। इस हत्या के पीछे भी गुड्डू मास्टर के गांव अकराबाद क्षेत्र के गांव नगरिया पट्टी चहराम की खूनी सियासत ही थी। गुड्डू की हत्या से पहले भी कई हत्याएं गांव की प्रधानी आदि को लेकर हुई थी। अब स्थिति यह है कि गुड्डू मास्टर की हत्या में एक को छोड़कर ज्यादातर आरोपी अभी भी फरार हैं।


यह सही है कि जिले के कुछ अपराधी लंबे समय से फरार हैं और उनकी तलाश व मॉनीटरिंग के लिए लगातार थाने से लेकर बीट आरक्षी तक पर दबाव रहता है। समय-समय पर उनके घरों तक पर जाकर टोका टाकी रहती है। इन पर भी फोकस कराया जाएगा।
-राजेश पांडेय एसएसपी 
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