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जब तक मुन्ना रहा, जेल के बाहर रहता था गाड़ियों का काफिला
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Tue, 10 Jul 2018 01:31 AM IST
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
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बागपत जेल में मारे गए डॉन मुन्ना बजरंगी ने अलीगढ़ के जिला कारागार में भी वक्त काटा है। वह 2011 में यहां पर 26 दिनों तक रहा। इस समय जेल के बाहर लग्जरी गाड़ियों का काफिला खड़ा रहता था। इसी दौरान दूसरी पेशी कर उसे शाम को दिल्ली से फिर लौटना था। जाते वक्त तत्कालीन जेल अधीक्षक से उसने कहा कि ‘अच्छा अब चलते हैं, पता नहीं कब मुलाकात हो’। बाद में उसकी इस बात के कई मायने निकाले गए। क्योंकि वह यहां नहीं लौटा, अदालत के आदेश पर उसको दिल्ली में ही रोक लिया गया।
मुन्ना बजरंगी वर्ष 2011 में अलीगढ़ कारागार में 11 फरवरी से आठ मार्च तक रहा था। उस समय जेल के अधीक्षक संजीव त्रिपाठी थे। इस समय वह आगरा में डीआईजी (जेल) हैं। अपराधियों के प्रति उनके सख्त रुख और जेल में अनुशासन को देखते हुए मुन्ना को अलीगढ़ शिफ्ट किया गया था। यहां 26 दिनों के दौरान उसकी एक भी व्यक्ति से मुलाकात नहीं हो सकी।
अलीगढ़ जेल में उसे हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया जिसे तन्हाई बैरक भी कहते हैं। चार लोग अलग-अलग शिफ्टों में उसकी निगरानी किया करते थे। सुरक्षा का मानक उसके खाने पीने की चीजों पर भी लागू था। खाने से पहले उसे चेक किया जाता था। एक बात उस समय के अधिकारियों को हैरान करती थी और वह आज तक पहेली ही बनी है कि जब तक वह यहां पर रहा जेल के बाहर लंबी-लंबी गाड़ियों का काफिला आने लगा था। इसके अलावा दूसरी पेशी पर दिल्ली जाकर उसे फिर अलीगढ़ जेल लौटना था।
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चलते समय उसने जेल अधीक्षक से कहा कि ‘अच्छा अब चलते हैं, पता नहीं कब मुलाकात हो’। जब शाम को पुलिस खाली लौट कर आई तो स्थानीय जेल प्रशासन को पता लगा कि अदालत ने उसे वहीं रोक लिया। जाते समय कही गई उसकी बात के लोगों ने अपने-अपने ढंग से मायने निकाले।
मुन्ना बजरंगी कांड के बाद जेल प्रशासन चौकन्ना
मुन्ना बजरंगी की जेल में ही हत्या होने के बाद स्थानीय जेल प्रशासन ने भी बंदियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। जेल में जो बड़े अपराधी बंद हैं उनकी बैरकों में आपस में होने वाली मुलाकतें रोक दी गई हैं और उनकी सघनता के साथ बैरकों की निगरानी हो रही है।
जिला कारागार की क्षमता 1150 बंदियों की है लेकिन इस समय यहां पर करीब 3300 बंदी हैं। यहां पर 23 बैरक हैं। जेल अधीक्षक आलोक सिंह कहते हैं कि यहां पर अंतरराज्यीय बदमाश तो कोई नहीं है। लेकिन करीब 10 ऐसे अपराधी जिन पर बड़े मुकदमे हैं, उनको सघन निगरानी पर ले लिया गया है। उनको अलग अलग बैरकों में रखा गया है। उनके एक दूसरे से मुलाकात और बे वजह घूमने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। इसके अलावा जेल में जो लोग बंदियों से मुलाकात के लिए आते हैं उनके लिए जेल के बाहर एक काउंटर है। उस पर आन लाइन पर्ची मिलती है। मुलाकात करने वाले का बायोमीट्रिक डाटा दर्ज किया जाता है। उसका आईडी प्रूफ, थंब इंप्रेशन लिया जाता है। जिस बंदी से मुलाकात होनी होती है उसका भी डाटा फीट किया जाता है। गेट वन और गेट टू पर चेकिंग की की जाती है। सामान के लिए लगेज स्कैनर का इस्तेमाल किया जाता है। जेल की चार स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था है। छह बजे के बाद अहाते में भी घूमने पर पाबंदी रहती है।
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मुन्ना बजरंगी वर्ष 2011 में अलीगढ़ कारागार में 11 फरवरी से आठ मार्च तक रहा था। उस समय जेल के अधीक्षक संजीव त्रिपाठी थे। इस समय वह आगरा में डीआईजी (जेल) हैं। अपराधियों के प्रति उनके सख्त रुख और जेल में अनुशासन को देखते हुए मुन्ना को अलीगढ़ शिफ्ट किया गया था। यहां 26 दिनों के दौरान उसकी एक भी व्यक्ति से मुलाकात नहीं हो सकी।
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अलीगढ़ जेल में उसे हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया जिसे तन्हाई बैरक भी कहते हैं। चार लोग अलग-अलग शिफ्टों में उसकी निगरानी किया करते थे। सुरक्षा का मानक उसके खाने पीने की चीजों पर भी लागू था। खाने से पहले उसे चेक किया जाता था। एक बात उस समय के अधिकारियों को हैरान करती थी और वह आज तक पहेली ही बनी है कि जब तक वह यहां पर रहा जेल के बाहर लंबी-लंबी गाड़ियों का काफिला आने लगा था। इसके अलावा दूसरी पेशी पर दिल्ली जाकर उसे फिर अलीगढ़ जेल लौटना था।
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चलते समय उसने जेल अधीक्षक से कहा कि ‘अच्छा अब चलते हैं, पता नहीं कब मुलाकात हो’। जब शाम को पुलिस खाली लौट कर आई तो स्थानीय जेल प्रशासन को पता लगा कि अदालत ने उसे वहीं रोक लिया। जाते समय कही गई उसकी बात के लोगों ने अपने-अपने ढंग से मायने निकाले।
मुन्ना बजरंगी कांड के बाद जेल प्रशासन चौकन्ना
मुन्ना बजरंगी की जेल में ही हत्या होने के बाद स्थानीय जेल प्रशासन ने भी बंदियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। जेल में जो बड़े अपराधी बंद हैं उनकी बैरकों में आपस में होने वाली मुलाकतें रोक दी गई हैं और उनकी सघनता के साथ बैरकों की निगरानी हो रही है।
जिला कारागार की क्षमता 1150 बंदियों की है लेकिन इस समय यहां पर करीब 3300 बंदी हैं। यहां पर 23 बैरक हैं। जेल अधीक्षक आलोक सिंह कहते हैं कि यहां पर अंतरराज्यीय बदमाश तो कोई नहीं है। लेकिन करीब 10 ऐसे अपराधी जिन पर बड़े मुकदमे हैं, उनको सघन निगरानी पर ले लिया गया है। उनको अलग अलग बैरकों में रखा गया है। उनके एक दूसरे से मुलाकात और बे वजह घूमने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। इसके अलावा जेल में जो लोग बंदियों से मुलाकात के लिए आते हैं उनके लिए जेल के बाहर एक काउंटर है। उस पर आन लाइन पर्ची मिलती है। मुलाकात करने वाले का बायोमीट्रिक डाटा दर्ज किया जाता है। उसका आईडी प्रूफ, थंब इंप्रेशन लिया जाता है। जिस बंदी से मुलाकात होनी होती है उसका भी डाटा फीट किया जाता है। गेट वन और गेट टू पर चेकिंग की की जाती है। सामान के लिए लगेज स्कैनर का इस्तेमाल किया जाता है। जेल की चार स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था है। छह बजे के बाद अहाते में भी घूमने पर पाबंदी रहती है।