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तस्करों से छुड़ाए पशु बेच दिए थे कथित बजरंगी ने
क्राइम न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Fri, 09 Feb 2018 02:21 AM IST
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रोड जाम करने का प्रयास करते आक्रोशित बजरंग दल के कार्यकर्ता और ग्रामीण।
- फोटो : फाइल फोटो
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सोफा नहर के पास लगातार गोवंश के अवशेष मिलने और फिर लोगों का पुलिस पर हमलावर होना कोई साजिश तो नहीं। बुधवार को हुए घटनाक्रम के बाद जब पिछले कुछ वाकयों पर गौर हुआ तो यह चर्चा इलाके में जोर पकड़ने लगी है। इस चर्चा को उस घटना ने भी बल दिया, जिसमें पिछले माह पहले जब्त पशुओं को बेचने के आरोप में कथित बजरंग दल कार्यकर्ता लोकेश को जेल भेजा गया और उसी के चार साथी बुधवार की घटना के मुकदमे में पुलिस ने नामजद आरोपी बनाए हैं। हालांकि बजरंग दल नेता इस तरह की किसी भी साजिश को सिरे से नकार रहे हैं और लोकेश व अब नामजद हुए चारों को संगठन का कार्यकर्ता होने से भी नकार रहे हैं।
पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो वाकया 17 जनवरी का है, जब कुछ कथित बजरंग दल कार्यकर्ताओं लोकेश निवासी रफायतपुर गोंडा, रिंकू सिंह निवासी बिदरका इगलास, अजय बौहरे निवासी गहलऊ गोंडा, कैलाश निवासी टप्पल व मुकेश ने पशुओं से लदी दो गाड़ियों को पकड़वाया था। मामले में लोकेश ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत दोनों गाड़ी चालक आरिफ व साबिर निवासी कोसीकलां मथुरा पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इस मामले में गाड़ी से 9 भैंस मुक्त कराईं, जिन्हें मौके पर ही लोकेश की सुपुर्दगी में पुलिस द्वारा दिया गया। बाद में जब पशु स्वामी जमील ने कोर्ट में पशुओं को मुक्त कराने की याचिका दायर की तो 22 जनवरी को न्यायिक मजिस्ट्रेट खैर द्वारा पशु मुक्त कराकर जमील को वापस करने के आदेश दिए। मगर जमील को कई दिन पशु नहीं मिले। इस पर अदालत का सख्त रुख देख पुलिस ने भैंस वापस न करने के आरोप में लोकेश पर अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया। इंस्पेक्टर दिनेश कुमार दुबे के अनुसार जो भैंस लोकेश को सुपुर्दगी में दी गई थीं, उन्हें लेकर लोकेश गांव तक नहीं पहुंचा और रास्ते में ही उन्हें बेच दिया गया। यह बात जांच में सामने आई। इसके चलते उस पर कार्रवाई की गई। अब जेल गए लोकेश के अन्य चार साथियों ने बुधवार को पुलिस कार्य में बाधा पहुंचाई है, जिन पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पहले वह कार्यकर्ता बताते थे, अब नकार रहे हैं। यह तो वही जानें।
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विहिप ने नकारे कार्यकर्ता और साजिश भी नकारी
इधर, गुरुवार को विहिप के जिला मंत्री धर्मा भैया, बजरंग दल के जिला संयोजक धर्मवीर लोधी, प्रखंड संयोजक टप्पल पंकज पंडित, टिंकू सारस्वत, दिनेश चौधरी आदि कार्यकर्ता एसएसपी राजेश पांडेय से मिले। धर्मा भैया के अनुसार उन्होंने किसी भी कार्यकर्ता के विरुद्ध मुकदमा दर्ज न करने की बात रखी। यदि उनके कार्यकर्ता दोषी हैं, तो इंस्पेक्टर व अन्य पुलिस कर्मी भी दोषी हैं। यदि मुकदमा हो तो दोनों तरफ से हो। उन्होंने कहा कि इंस्पेक्टर संग किसी ने दुर्व्यवहार नहीं किया। वर्दी खुद फाड़कर वह झूठा आरोप लगा रहे हैं। एसएसपी को बजरंग दल के किसी भी कार्यकर्ता द्वारा भविष्य में जाम न लगाने का भरोसा दिलाया। साथ ही बैरियर लगाकर मार्ग से जाने वाले बंद कंटेनरों की जांच कराने व सोफा क्षेत्र में पुलिस पिकेट लगाने की मांग की। धर्मा भैया ने पूर्व में मवेशी पकड़वाने के मामले में अपने आपको बजरंग दल का कार्यकर्ता बताने वाले पांचों युवकों को संगठन का कार्यकर्ता होने से नकारा। उनका दूर तक बजरंग दल से लेना देना नहीं है। यह बात भी सिरे से नकारी कि यह घटना सोफा पर उसी कार्रवाई के प्रतिशोध में कराई जा रही है। यह पशु तस्करों द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए बात रखी गई है कि एक-एक पुलिस जीप अलग से गश्त में सक्रिय होगी। वहीं जल्द ही उनके द्वारा ब्लॅाक वार अपने कार्यकर्ताओं की सूची एसएसपी को दी जाएगी। जिससे कि पुलिस को पता रहे कि कौन वास्तविक कार्यकर्ता है।
चार बजरंग दल कार्यकर्ताओं समेत 50 पर एफआईआर
सोफा नहर किनारे बुधवार को गोवंश के अवशेष मिलने के बाद पुलिस से छीना झपटी, रोड जाम की कोशिश एवं इंस्पेक्टर की वर्दी पकड़कर जमीन पर गिराने के मामले में पुलिस ने चार बजरंग दल कार्यकर्ताओं समेत पचास के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इन सभी पर अफवाह फैलाकर लोगों को उकसाने, धार्मिक उन्माद फैलाने एवं सरकारी कार्य में बाधा डालने का पुलिस ने आरोप लगाया है। साथ ही एक रिपोर्ट गोवध अधिनियम के तहत अज्ञात के खिलाफ भी दर्ज की गई है। बुधवार को सोफा नहर किनारे गोवंश के अवशेष मिले थे। पुलिस उन अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए ले जा रही थी, तभी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रास्ते में पुलिस की गाड़ी रोक ली। अवशेष भरी बोरी छीन लिया। अवशेष रखकर सोफा में जाम लगाने जा रहे थे। तभी पहुंचे इंस्पेक्टर दिनेशचंद्र दुबे ने अवशेष से भरी बोरी ले जाना चाहा तो उनसे भी बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने बोरी छीननी चाही। इसी प्रयास में इंस्पेक्टर जमीन पर गिर गए। उनकी वर्दी के बटन टूट गए। इस बात की जानकारी होते ही एसपी देहात डा. यशवीर सिंह, एसडीएम खैर जोगिंदर सिंह, सीओ तेजवीर सिंह फोर्स के साथ पहुंच गए। न मानने वाले तीन बजरंग दल कार्यकर्ताओं को पुलिस पकड़कर थाने ले गई। बाद में बजरंग दल व विहिप के नेताओं ने भविष्य में सड़क जाम न करने, पुलिस को सहयोग करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद पकड़े गए तीनों बजरंग दल कार्यकर्ता थाने से छोड़े गए थे।
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पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो वाकया 17 जनवरी का है, जब कुछ कथित बजरंग दल कार्यकर्ताओं लोकेश निवासी रफायतपुर गोंडा, रिंकू सिंह निवासी बिदरका इगलास, अजय बौहरे निवासी गहलऊ गोंडा, कैलाश निवासी टप्पल व मुकेश ने पशुओं से लदी दो गाड़ियों को पकड़वाया था। मामले में लोकेश ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत दोनों गाड़ी चालक आरिफ व साबिर निवासी कोसीकलां मथुरा पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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इस मामले में गाड़ी से 9 भैंस मुक्त कराईं, जिन्हें मौके पर ही लोकेश की सुपुर्दगी में पुलिस द्वारा दिया गया। बाद में जब पशु स्वामी जमील ने कोर्ट में पशुओं को मुक्त कराने की याचिका दायर की तो 22 जनवरी को न्यायिक मजिस्ट्रेट खैर द्वारा पशु मुक्त कराकर जमील को वापस करने के आदेश दिए। मगर जमील को कई दिन पशु नहीं मिले। इस पर अदालत का सख्त रुख देख पुलिस ने भैंस वापस न करने के आरोप में लोकेश पर अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया। इंस्पेक्टर दिनेश कुमार दुबे के अनुसार जो भैंस लोकेश को सुपुर्दगी में दी गई थीं, उन्हें लेकर लोकेश गांव तक नहीं पहुंचा और रास्ते में ही उन्हें बेच दिया गया। यह बात जांच में सामने आई। इसके चलते उस पर कार्रवाई की गई। अब जेल गए लोकेश के अन्य चार साथियों ने बुधवार को पुलिस कार्य में बाधा पहुंचाई है, जिन पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पहले वह कार्यकर्ता बताते थे, अब नकार रहे हैं। यह तो वही जानें।
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विहिप ने नकारे कार्यकर्ता और साजिश भी नकारी
इधर, गुरुवार को विहिप के जिला मंत्री धर्मा भैया, बजरंग दल के जिला संयोजक धर्मवीर लोधी, प्रखंड संयोजक टप्पल पंकज पंडित, टिंकू सारस्वत, दिनेश चौधरी आदि कार्यकर्ता एसएसपी राजेश पांडेय से मिले। धर्मा भैया के अनुसार उन्होंने किसी भी कार्यकर्ता के विरुद्ध मुकदमा दर्ज न करने की बात रखी। यदि उनके कार्यकर्ता दोषी हैं, तो इंस्पेक्टर व अन्य पुलिस कर्मी भी दोषी हैं। यदि मुकदमा हो तो दोनों तरफ से हो। उन्होंने कहा कि इंस्पेक्टर संग किसी ने दुर्व्यवहार नहीं किया। वर्दी खुद फाड़कर वह झूठा आरोप लगा रहे हैं। एसएसपी को बजरंग दल के किसी भी कार्यकर्ता द्वारा भविष्य में जाम न लगाने का भरोसा दिलाया। साथ ही बैरियर लगाकर मार्ग से जाने वाले बंद कंटेनरों की जांच कराने व सोफा क्षेत्र में पुलिस पिकेट लगाने की मांग की। धर्मा भैया ने पूर्व में मवेशी पकड़वाने के मामले में अपने आपको बजरंग दल का कार्यकर्ता बताने वाले पांचों युवकों को संगठन का कार्यकर्ता होने से नकारा। उनका दूर तक बजरंग दल से लेना देना नहीं है। यह बात भी सिरे से नकारी कि यह घटना सोफा पर उसी कार्रवाई के प्रतिशोध में कराई जा रही है। यह पशु तस्करों द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए बात रखी गई है कि एक-एक पुलिस जीप अलग से गश्त में सक्रिय होगी। वहीं जल्द ही उनके द्वारा ब्लॅाक वार अपने कार्यकर्ताओं की सूची एसएसपी को दी जाएगी। जिससे कि पुलिस को पता रहे कि कौन वास्तविक कार्यकर्ता है।
चार बजरंग दल कार्यकर्ताओं समेत 50 पर एफआईआर
सोफा नहर किनारे बुधवार को गोवंश के अवशेष मिलने के बाद पुलिस से छीना झपटी, रोड जाम की कोशिश एवं इंस्पेक्टर की वर्दी पकड़कर जमीन पर गिराने के मामले में पुलिस ने चार बजरंग दल कार्यकर्ताओं समेत पचास के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इन सभी पर अफवाह फैलाकर लोगों को उकसाने, धार्मिक उन्माद फैलाने एवं सरकारी कार्य में बाधा डालने का पुलिस ने आरोप लगाया है। साथ ही एक रिपोर्ट गोवध अधिनियम के तहत अज्ञात के खिलाफ भी दर्ज की गई है। बुधवार को सोफा नहर किनारे गोवंश के अवशेष मिले थे। पुलिस उन अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए ले जा रही थी, तभी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रास्ते में पुलिस की गाड़ी रोक ली। अवशेष भरी बोरी छीन लिया। अवशेष रखकर सोफा में जाम लगाने जा रहे थे। तभी पहुंचे इंस्पेक्टर दिनेशचंद्र दुबे ने अवशेष से भरी बोरी ले जाना चाहा तो उनसे भी बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने बोरी छीननी चाही। इसी प्रयास में इंस्पेक्टर जमीन पर गिर गए। उनकी वर्दी के बटन टूट गए। इस बात की जानकारी होते ही एसपी देहात डा. यशवीर सिंह, एसडीएम खैर जोगिंदर सिंह, सीओ तेजवीर सिंह फोर्स के साथ पहुंच गए। न मानने वाले तीन बजरंग दल कार्यकर्ताओं को पुलिस पकड़कर थाने ले गई। बाद में बजरंग दल व विहिप के नेताओं ने भविष्य में सड़क जाम न करने, पुलिस को सहयोग करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद पकड़े गए तीनों बजरंग दल कार्यकर्ता थाने से छोड़े गए थे।