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प्रधानमंत्री जी... ऐसे में कैसे पढ़ेंगी और आगे बढ़ेंगी बेटियां
Updated Mon, 04 Dec 2017 02:14 AM IST
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प्रधानमंत्री जी... ऐसे में कैसे पढ़ेंगी और आगे बढे़ंगी बेटियां
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा देते है। उनके ही केंद्रीय विश्वविद्यालय में बेटियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में बाधा उत्पन्न किया जा रहा है। इसके लिए वह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग आदि को लिख चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे में बेटियां कैसे पढ़ेगी और कैसे आगे बढ़ेगी।
यह दर्द है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार पीएचडी में प्रवेश देने की मांग कर रही छात्राओं की। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी में जब प्रवेश परीक्षा यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार हुई तो प्रवेश में यूजीसी की गाइड लाइन का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
छात्रा सराहा चौधरी, अम्ब्रीन, दरख्शां, राबिया, आयशा, जीनत, महविश, निदा, आफरीन, खुशनुमा, शहला आदि का कहना है कि पिछले 15 दिन से एएमयू रजिस्ट्रार आफिस के सामने अपनी मांगों को लेकर छात्रों के साथ धरना व क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठी है।
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यूनिवर्सिटी से कोई सुनवाई नहीं हुई तो केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं यूजीसी को लिखा। लेकिन वहां से भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अब राष्ट्रीय महिला आयोग में जाने पर विचार कर रही है।
छात्र नेता कुंवर मुहम्मद अहमद ने कहा कि 15 दिन से धरना व क्रमिक भूख हड़ताल को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। सर्दी में धरना पर बैठने के कारण दो साथी बीमार हो चुके हैं।
अब वे लोग अंतिम सांस तक भूख हड़ताल करने को विवश है। सुनवाई नहीं हुई तो जल्द ही भूख हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा। इस संबंध में एएमयू के अधिकारियों का कहना है कि बातचीत चल रही है। जल्द ही समाधान होने की उम्मीद है।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा देते है। उनके ही केंद्रीय विश्वविद्यालय में बेटियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में बाधा उत्पन्न किया जा रहा है। इसके लिए वह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग आदि को लिख चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे में बेटियां कैसे पढ़ेगी और कैसे आगे बढ़ेगी।
यह दर्द है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार पीएचडी में प्रवेश देने की मांग कर रही छात्राओं की। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी में जब प्रवेश परीक्षा यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार हुई तो प्रवेश में यूजीसी की गाइड लाइन का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
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छात्रा सराहा चौधरी, अम्ब्रीन, दरख्शां, राबिया, आयशा, जीनत, महविश, निदा, आफरीन, खुशनुमा, शहला आदि का कहना है कि पिछले 15 दिन से एएमयू रजिस्ट्रार आफिस के सामने अपनी मांगों को लेकर छात्रों के साथ धरना व क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठी है।
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यूनिवर्सिटी से कोई सुनवाई नहीं हुई तो केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं यूजीसी को लिखा। लेकिन वहां से भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अब राष्ट्रीय महिला आयोग में जाने पर विचार कर रही है।
छात्र नेता कुंवर मुहम्मद अहमद ने कहा कि 15 दिन से धरना व क्रमिक भूख हड़ताल को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। सर्दी में धरना पर बैठने के कारण दो साथी बीमार हो चुके हैं।
अब वे लोग अंतिम सांस तक भूख हड़ताल करने को विवश है। सुनवाई नहीं हुई तो जल्द ही भूख हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा। इस संबंध में एएमयू के अधिकारियों का कहना है कि बातचीत चल रही है। जल्द ही समाधान होने की उम्मीद है।