Children's Day: कमला नेहरू के साथ हाथरस आए थे चाचा नेहरू, इस बाजार से है उनका नाम जुड़ा
हाथरस शहर में जवाहरलाल नेहरू अपनी पत्नी कमला नेहरू के साथ आए थे। तब शहर के एक बाजार का नाम कमला नेहरू बाजार रखा गया था। इसे अब कमला बाजार के नाम से जाना जाता है।
विस्तार
आज बाल दिवस मनाया जाएगा। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिवस पर मनाए जाने वाले इस दिन को लेकर कार्यक्रमों का आयोजन होगा। देशभर में उन्हें याद किया जाएगा। पंडित जवाहरलाल नेहरू की यादों से हाथरस भी गुलजार है, हाथरस शहर में जवाहरलाल नेहरू अपनी पत्नी कमला नेहरू के साथ आए थे। तब शहर के एक बाजार का नाम कमला नेहरू बाजार रखा गया था। इसे अब कमला बाजार के नाम से जाना जाता है।
मुख्य बाजार में स्थित कामेश्वर मंदिर के मुख्य द्वारा पर आज भी कमला नेहरू बाजार के नाम का शिलालेख मौजूद है। कहा जाता है कि देशभर में आजादी की खातिर आंदोलन चल रहा था। अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए क्रांतिकारी लोगों को एकजुट करने में लगे हुए थे। हाथरस में भी स्वाधीनता संग्राम का बिगुल बजा हुआ था। इस दौरान सन 1932 में पंडित जवाहर लाल नेहरू व उनकी पत्नी कमला नेहरू हाथरस आए थे।
सासनी गेट से गुड़हाई बाजार की ओर जाने वाले बाजार को कमला नेहरू के नाम पर कमला बाजार का नाम दिया गया। कमला बाजार स्थित कामेश्वर महादेव मंदिर के द्वार पर कमला नेहरू बाजार का शिलालेख भी लगाया गया, जो आज तक लगा हुआ है। वर्तमान में इस बाजार को कमला बाजार के नाम से जाना जाता है।
जिस समय की बात है उस समय तो हम नहीं थे, लेकिन परिवार में इसके बारे में अक्सर चर्चा होती है। बताते हैं कि चाचा नेहरू और कमला नेहरू के भाषणों ने आंदोलनकारियों में जान फूंक दी थी। चाचा नेहरू के भाषणों से स्थानीय लोग काफी प्रभावित हुए थे।-जय सिंह, निवासी टॉप रोड, हाथरस।
बताते हैं कि जिस समय जवाहरलाल नेहरू व कमला नेहरू हाथरस आए, उस समय धीरे-धीरे आजादी की लड़ाई लड़ने वालों की फौज हाथरस में तैयार की गई। उस सभा की याद कमला नेहरू बाजार से जुड़ी हुई हैं, जो सासनी गेट से बख्तावर गली के मोड़ तक है।-भीम सिंह, निवासी गिजरौली, हाथरस।