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किसान आंदोलन से उड़ गई भाजपा की नींद
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चौधरी नत्थी सिंह।
- फोटो : CITY OFFICE
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कौशल कुमार ओझा
नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन से भाजपा नेताओं की नींद उड़ गई है। दरअसल, जिला पंचायत चुनाव में जाट समाज का वोट खिसकने के भय से अलीगढ़, लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के नेताओं की चिंता बढ़ गई है। जिला पंचायत चुनाव में जनपद के 18 से 20 वार्डों में जाट मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। पिछले चुनाव में जाट समाज से 13 जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए थे, जबकि चार ब्लाक के अध्यक्ष जाट समाज से ही हैं।
तीन महीने से किसान आंदोलन चल रहा है। जाट लैंड में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत के समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के भी संपर्क में लोग हैं। इधर, राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी पहले से ही अलीगढ़ एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं। इनके अलावा, कांग्रेसी से सपाई बने पूर्व सांसद चौधरी बिजेंद्र सिंह गांवों की खाक छान रहे हैं। कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तीन मार्च को टप्पल के जिकरपुर में किसान महापंचायत है। इन सबसे भाजपा में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है। पेट्रोल-डीजल के मूल्य में वृद्धि से आम जनता भी सरकार से नाराज है। कुछ दिन पहले गृहमंत्री अमित शाह एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली में पार्टी के जाट नेताओं को बुलाया था। उस बैठक में अलीगढ़ के भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह भी थे।
2015 के जिला पंचायत चुनाव में जाट समाज से दिनेश चौधरी, ज्ञानेंद्र, सुधीर चौधरी, मंजू देवी, विमलेश देवी, मेघराज सिंह, चंदन सिंह, नीरज, रवेंद्र पाली, दीपक चौधरी, शिखा चौधरी, हरेंद्र सिंह, रिंकी देवी सदस्य पद पर निर्वाचित हुई थीं। जबकि ब्लाक प्रमुख के पद पर किरण देवी (चंडौस), वीणा देवी (टप्पल), प्रदीप चौधरी (गोंडा) व आरपी सिंह (इगलास) चुने गए थे। ऐसी स्थिति में यदि जाट समाज भाजपा से नाराज हुआ तो पार्टी को बड़ा नुकसान होगा।
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जिले में साढ़े तीन लाख जाट मतदाता
- जनपद में लगभग साढ़े तीन लाख जाट मतदाता हैं। इगलास व खैर विधानसभा में करीब सवा-सवा लाख मतदाता है, जबकि अतरौली में 40 हजार, बरौली में 30 हजार, शहर में 10 हजार, छर्रा में आठ हजार व कोल में करीब पांच हजार मतदाता हैं। जिले में कुल 18 लाख एक हजार पांच सौ 75 मतदाता हैं। इगलास व खैर के जाट मतदाता चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं।
इस बार 52 के बदले 47 वार्ड
2015 में जनपद में जिला पंचायत के 52 वार्ड थे। इस बार उनकी संख्या 47 है। शहर के आसपास के 19 गांव नगर निगम में शामिल हो गए हैं। इसके अतिरिक्त चार नई नगर पंचायतें बनी हैं।
बसपा से निर्वाचित हुए, भाजपा में हो गए शामिल
2015 में निर्वाचित कई बसपा सदस्य भाजपा में शामिल हो गए। पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह के भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। चुनाव के समय जयवीर सिंह बसपा में थे। बाद में वह भाजपा में आ गए। उनके साथ कई जिला पंचायत सदस्य भी भाजपा में आए।
जाट वोट पर सबकी निगाह है। अखिलेश के आने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। भाजपा से जाट नाराज नहीं है। अभी भी 75 प्रतिशत जाट भाजपा के साथ हैं।
- चौधरी ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा
यह सही है कि कुछ जाट नाराज हैं। जाट बहुत जल्दी नाराज होते हैं, उतनी ही जल्दी मान भी जाते हैं। दरअसल, उनको मालूम ही नहीं है कि कृषि कानून क्या है। जब बताते हैं, तो कहते हैं कि कोई खराबी नहीं है। पंचायत चुनाव में सभी हमारे साथ रहेंगे।
- चौधरी नत्थी सिंह, जिला संयोजक, पंचायत चुनाव, भाजपा
टप्पल में किसान आंदोलन का प्रभाव ज्यादा नहीं है। कुछ गांवों के मुट्ठी भर लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। किसान यूनियन एवं लोकदल के लोग ज्यादा सक्रिय हैं। किसान आंदोलन का चुनाव में मामूली असर पड़ने की आशंका है।
- दिनेश चौधरी, निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य, टप्पल ब्लॉक।
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नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन से भाजपा नेताओं की नींद उड़ गई है। दरअसल, जिला पंचायत चुनाव में जाट समाज का वोट खिसकने के भय से अलीगढ़, लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के नेताओं की चिंता बढ़ गई है। जिला पंचायत चुनाव में जनपद के 18 से 20 वार्डों में जाट मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। पिछले चुनाव में जाट समाज से 13 जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए थे, जबकि चार ब्लाक के अध्यक्ष जाट समाज से ही हैं।
तीन महीने से किसान आंदोलन चल रहा है। जाट लैंड में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत के समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के भी संपर्क में लोग हैं। इधर, राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी पहले से ही अलीगढ़ एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं। इनके अलावा, कांग्रेसी से सपाई बने पूर्व सांसद चौधरी बिजेंद्र सिंह गांवों की खाक छान रहे हैं। कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तीन मार्च को टप्पल के जिकरपुर में किसान महापंचायत है। इन सबसे भाजपा में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है। पेट्रोल-डीजल के मूल्य में वृद्धि से आम जनता भी सरकार से नाराज है। कुछ दिन पहले गृहमंत्री अमित शाह एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली में पार्टी के जाट नेताओं को बुलाया था। उस बैठक में अलीगढ़ के भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह भी थे।
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2015 के जिला पंचायत चुनाव में जाट समाज से दिनेश चौधरी, ज्ञानेंद्र, सुधीर चौधरी, मंजू देवी, विमलेश देवी, मेघराज सिंह, चंदन सिंह, नीरज, रवेंद्र पाली, दीपक चौधरी, शिखा चौधरी, हरेंद्र सिंह, रिंकी देवी सदस्य पद पर निर्वाचित हुई थीं। जबकि ब्लाक प्रमुख के पद पर किरण देवी (चंडौस), वीणा देवी (टप्पल), प्रदीप चौधरी (गोंडा) व आरपी सिंह (इगलास) चुने गए थे। ऐसी स्थिति में यदि जाट समाज भाजपा से नाराज हुआ तो पार्टी को बड़ा नुकसान होगा।
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जिले में साढ़े तीन लाख जाट मतदाता
- जनपद में लगभग साढ़े तीन लाख जाट मतदाता हैं। इगलास व खैर विधानसभा में करीब सवा-सवा लाख मतदाता है, जबकि अतरौली में 40 हजार, बरौली में 30 हजार, शहर में 10 हजार, छर्रा में आठ हजार व कोल में करीब पांच हजार मतदाता हैं। जिले में कुल 18 लाख एक हजार पांच सौ 75 मतदाता हैं। इगलास व खैर के जाट मतदाता चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं।
इस बार 52 के बदले 47 वार्ड
2015 में जनपद में जिला पंचायत के 52 वार्ड थे। इस बार उनकी संख्या 47 है। शहर के आसपास के 19 गांव नगर निगम में शामिल हो गए हैं। इसके अतिरिक्त चार नई नगर पंचायतें बनी हैं।
बसपा से निर्वाचित हुए, भाजपा में हो गए शामिल
2015 में निर्वाचित कई बसपा सदस्य भाजपा में शामिल हो गए। पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह के भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। चुनाव के समय जयवीर सिंह बसपा में थे। बाद में वह भाजपा में आ गए। उनके साथ कई जिला पंचायत सदस्य भी भाजपा में आए।
जाट वोट पर सबकी निगाह है। अखिलेश के आने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। भाजपा से जाट नाराज नहीं है। अभी भी 75 प्रतिशत जाट भाजपा के साथ हैं।
- चौधरी ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा
यह सही है कि कुछ जाट नाराज हैं। जाट बहुत जल्दी नाराज होते हैं, उतनी ही जल्दी मान भी जाते हैं। दरअसल, उनको मालूम ही नहीं है कि कृषि कानून क्या है। जब बताते हैं, तो कहते हैं कि कोई खराबी नहीं है। पंचायत चुनाव में सभी हमारे साथ रहेंगे।
- चौधरी नत्थी सिंह, जिला संयोजक, पंचायत चुनाव, भाजपा
टप्पल में किसान आंदोलन का प्रभाव ज्यादा नहीं है। कुछ गांवों के मुट्ठी भर लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। किसान यूनियन एवं लोकदल के लोग ज्यादा सक्रिय हैं। किसान आंदोलन का चुनाव में मामूली असर पड़ने की आशंका है।
- दिनेश चौधरी, निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य, टप्पल ब्लॉक।

दिनेश चौधरी।- फोटो : CITY OFFICE

चौधरी ऋषिपाल सिंह। जिलाध्यक्ष बीजेपी- फोटो : CITY OFFICE