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कैनवास पर सुलगती चीखें: आर्टिस्ट डॉ. लक्ष्मी ने मोमबत्ती के धुएं से उकेरा लखनऊ अग्निकांड का दर्द, राख हुए सपने
Wed, 24 Jun 2026 05:44 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Wed, 24 Jun 2026 05:44 PM IST
सार
डॉ. लक्ष्मी की इस कलाकृति में वेंटिलेशन न होने के कारण इमारत में घुटता दम, खिड़कियों से जिंदगी के लिए छटपटाते बच्चे और पिंजरे में कैद बेजुबान बिल्लियों और कुत्तों का मौन दर्द साफ झलकता है।
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आर्टिस्ट डॉ. लक्ष्मी की पेंटिंग
- फोटो : स्वयं
विस्तार
जब शब्द बेबस हो जाएं और खामोशी चीखने लगे, तब कला ही उस दर्द को जुबान देती है। लखनऊ के अलीगंज में एक कोचिंग सेंटर की इमारत में भड़की आग ने कई मासूमों और बेजुबान जानवरों को हमेशा के लिए लील लिया। इस भयानक त्रासदी, माता-पिता की बेबसी और बच्चों की आखिरी पुकार को सोशल आर्टिस्ट डॉ. लक्ष्मी ने मोमबत्ती की लौ और धुएं के सहारे कैनवास पर जीवंत किया है। यह सिर्फ एक पेंटिंग नहीं, बल्कि राख हो चुके सपनों को एक भावुक श्रद्धांजलि है।
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डॉ. लक्ष्मी की इस कलाकृति में वेंटिलेशन न होने के कारण इमारत में घुटता दम, खिड़कियों से जिंदगी के लिए छटपटाते बच्चे और पिंजरे में कैद बेजुबान बिल्लियों और कुत्तों का मौन दर्द साफ झलकता है। पेंटिंग का सबसे मर्मस्पर्शी हिस्सा वह बेबस माता-पिता हैं, जो बाहर खड़े होकर अपने बच्चों को आग की लपटों में घिरता देख रहे थे, लेकिन कुछ कर पाने में असमर्थ थे।
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डॉ. लक्ष्मी कहती हैं, यह पेंटिंग समाज की आंखें खोलने के लिए है। अगर उस इमारत में दो निकास द्वार होते, तो आज ये मासूम हमारे बीच होते। उनकी यह कला हर माता-पिता और प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि सुरक्षा मानकों से समझौता बंद हो, ताकि फिर कभी किसी मासूम की जिंदगी यूं धुएं में न उड़े।
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