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लॉकडाउन में लौटे मजदूरों को उनकी फैक्टरी कारखानों तक पहुंचाएंगे एएमयू छात्र
Fri, 26 Jun 2020 07:18 PM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Fri, 26 Jun 2020 07:18 PM IST
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एएमयू
- फोटो : Amar Ujala
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन और एएमयू छात्र मयंक ने प्रवासी मजदूरों के लिए रिटर्न टू वर्क नाम से मुहिम छेड़ी गई है। इसके लिए फ्रीडम एंप्लॉयविलिटी एकेडमी के माध्यम से मदद की जाएगी। जिसमें साढ़े सात करोड़ रुपये इस काम के लिए संस्थान ने खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
इसके तहत वह मजदूर जो लॉकडाउन के चलते अपने काम वाले स्थान से घर आ गए थे अब उनको उनके गृह नगर से काम वाले स्थान तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। जिससे उनके घर का चूल्हा जल सके।
इस अभियान के बारे में फैजुल हसन ने बताया सरकार से लेकर संस्थाओं ने इस बात पर तो ध्यान दिया कि शहरों में फंसे कामगारों को उनके घर तक पहुंचा दिया जाए, लेकिन अब सवाल ये है कि ये लोग घर पर कब तक रहेंगे। अब जैसे-जैसे अनलॉक हो रहा है और धीरे-धीरे फैक्टरी और कारखाने शुरू हो रहे हैं, जरूरत इस बात की है कि इन मजदूरों को, कामगारों को इनके कार्य स्थल तक पहुंचाया जाए।
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इसी बात को ध्यान में रखकर यह अभियान शुरू किया गया है। इसके अलावा उन्होंने अपील की कि अधिकांश मजदूर सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं। इसलिए जो मजदूरों के संपर्क में लोग हैं संस्था के विषय में जानकारी दें। संस्था पूरे देश के मजदूरों के लिए काम कर रही है। सहायता प्राप्त करने के लिए मजदूर का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर पर्याप्त है।
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इसके तहत वह मजदूर जो लॉकडाउन के चलते अपने काम वाले स्थान से घर आ गए थे अब उनको उनके गृह नगर से काम वाले स्थान तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। जिससे उनके घर का चूल्हा जल सके।
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इस अभियान के बारे में फैजुल हसन ने बताया सरकार से लेकर संस्थाओं ने इस बात पर तो ध्यान दिया कि शहरों में फंसे कामगारों को उनके घर तक पहुंचा दिया जाए, लेकिन अब सवाल ये है कि ये लोग घर पर कब तक रहेंगे। अब जैसे-जैसे अनलॉक हो रहा है और धीरे-धीरे फैक्टरी और कारखाने शुरू हो रहे हैं, जरूरत इस बात की है कि इन मजदूरों को, कामगारों को इनके कार्य स्थल तक पहुंचाया जाए।
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इसी बात को ध्यान में रखकर यह अभियान शुरू किया गया है। इसके अलावा उन्होंने अपील की कि अधिकांश मजदूर सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं। इसलिए जो मजदूरों के संपर्क में लोग हैं संस्था के विषय में जानकारी दें। संस्था पूरे देश के मजदूरों के लिए काम कर रही है। सहायता प्राप्त करने के लिए मजदूर का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर पर्याप्त है।