Jackal: अलीगढ़ में रामघाट रोड पर तेज रफ्तार वाहन ने रौंदा एक सियार, घंटों पड़ा रहा शव, लगातार घट रही संख्या
लोग प्राचीन समय से सियार की हुआं-हुआं की आवाज को अपशगुन मानते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनकी आवाज का मतलब कुछ गलत होने से लगाया जाता है। रास्ते में अगर वाहन वाले को सियार दिख जाए, तो वह बिल्ली की तरह थोड़ी देर रुकता है। कई वाहन चालक तो सियार को अशुभ मानकर इस निर्दोष जानवर को रौंदकर आगे बढ़ जाते हैं।
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इंसानी बस्तियों के आसपास खेत-खलिहानों में नजर आने वाले सियारों की संख्या कम होती जा रही है। झाड़ियों-वनस्पतियों का लगातार कम होना इसकी वजह बन रही है। मंगलवार को अलीगढ़ से रामघाट की ओर जाने वाले कल्याण सिंह मार्ग पर एक मृत सियार मिला। इसे किसी तेज रफ्तार वाहन ने रौंद दिया था। वन विभाग का कोई कर्मी इसके शव को लेने नहीं पहुंचा था।
अब गांवों में भी सियारों की हुआं-हुआं कम ही सुनाई देती है। वजह यह है कि सियारों के फलने-फूलने के अनुकूल परिस्थितियों का विषम होते जाना। पर्यावरणीय परिवर्तन का असर इस जंतु पर भी तेजी से पड़ा है। लेकिन रामघाट रोड अब भी इनका राज कायम है। इस मार्ग पर पसरा अंधेरा और सड़क के दोनों ओर उगी घनी झाड़ियां इसके छिपने का मुफीद स्थान है।
अंधविश्वास की बलि चढ़ रहे हैं सियार
लोग प्राचीन समय से सियार की हुआं-हुआं की आवाज को अपशगुन मानते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनकी आवाज का मतलब कुछ गलत होने से लगाया जाता है। रास्ते में अगर वाहन वाले को सियार दिख जाए, तो वह बिल्ली की तरह थोड़ी देर रुकता है। कई वाहन चालक तो सियार को अशुभ मानकर इस निर्दोष जानवर को रौंदकर आगे बढ़ जाते हैं। जिसके कारण सियार अधिकतर सड़कों पर मृत पाए जाते हैं।
लोमड़ी-कुत्ते की तरह दिखता है सियार
सियार को गीदड़, शियार, शृंगाल भी कहते हैं। यह लोमड़ी और कुत्ते से मिलता जुलता दिखने वाला जानवर है। यह जंगलोंऔर गन्ने आदि के खेतों में आमतौर से पाया जाने वाला मध्यम आकार का पशु है। अधिकतर सियार गांव के निकट पाए जाते हैं। सियार खाने के लिए भेड़-बकरियों पर हमला करते हैं और कुत्ते के बच्चे को भी खा जाते हैं। वैसे सियार मनुष्य पर हमला नहीं करते, लेकिन कभी-कभी हमले की घटनाएं देखी गई हैं। सियार की तीन प्रजातियां मुख्य हैं, जो एशिया और अफ्रीका के शुष्क क्षेत्रों में रहती हैं।
16 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है सियार
सियार 8 से 15 किलोग्राम के होते है और यह 33 इंच आकार लम्बे होते है। इनकी पूंछ 10 इंच के लगभग होती है। इनकी उम्र लगभग 8 से 10 साल होती है। लक्कड़बग्घे, तेंदुए, शेर इनका शिकार करते हैं। ये खुले मैदान, घास मैदान और झाडियों वाले इलाको में रहना पसंद करते हैं। यह 16 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है। शिकार करने के लिए सियार के कैनाइन दांत होते हैं। सियार झुंड में रहते हैं और एक झुंड में 5 से अधिक होते हैं। यह एक साथ मिलकर आवाज़ लगाते हैं। सियार शौच के माध्यम से रहने का क्षेत्र करते हैं चिह्नित सियार जोड़े में रहना पसंद करते हैं। माना जाता है कि नर सियार शौच के माध्यम से उस क्षेत्र को चिह्नित करते हैं। सियार काफी डरपोक होता है, यह मनुष्य को देखकर भाग जाता है। सियार को आम बोलचाल में 'गीदड़' भी कहते हैं।
..तो पंचतंत्र जैसे कथा ग्रंथों में ही रह जाएगा सियार
माना जाता है कि विष्णु शर्मा ने राजकुमारों को नीति की शिक्षा देने के लिए आज से लगभग ढाई हजार साल पहले इस ग्रंथ की रचना की थी। नीलवर्ण शृंगाल कहानी काफी मशहूर है। इसमें एक सियार नील के टब में गिर जाता है। उसके बाद जब वह जंगल में जाता है कि तो जंगल के जानवर उसे अनोखा जीव समझकर भयभीत हो जाते हैं। इसी भय का लाभ उठाते हुए वह जंगल के राजा शेर को सिंहासन से हटाकर खुद जंगल का राजा बन जाता है और सभी जानवरों पर हुक्म चलाने लगता है। एक बार दूसरे सियारों की बोली सुनकर आदत से मजबूर होकर वह भी हुआं-हुआं करने लगता है तो उसकी पोल खुल जाती है। पर्यावरणविद कहते हैं कि जिस तरह इसकी तादाद घटती जा रही है। उससे तो यही लगता है कि एक दिन सियार भी किस्से-कहानियों की किताबों में ही कैद हो कर रह जाएगा।