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अलिफ से अल्लाह पढ़ेंगे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई बच्चे
Updated Fri, 19 Jan 2018 01:48 AM IST
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इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलिफ से अल्लाह और बे से बिस्मिल्लाह अब मुस्लिम बच्चे नहीं, बल्कि हिंदू, सिख और ईसाई बच्चे भी पढ़ेंगे, वो भी साथ-साथ। इस अनूठी पहल की सूत्रधार हैं पूर्व उप राष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी। शुक्रवार से मदरसा चाचा नेहरू में कुरान हिफ्ज कराने की शुरुआत होने जा रही है। इससे अलीगढ़ की गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूती मिलेगी।
इस पहल को उस समय और ताकत मिल गई, जब मदरसा में पढ़ रहे एक हिंदू छात्र ने कुरान हिफ्ज (कंठस्थ) करने की इच्छा जाहिर की। फिर, क्या था सलमा अंसारी ने अपनी सोच को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया और बुला ली आलिम-ए-दीन की बैठक।
सबने ने सलमा अंसारी की सोच को जमीन पर उतारने के लिए हामी भर दी। अब बच्चों को पहले कायदा पढ़ाया जाएगा, जिससे उनका तलफ्फुज (उच्चारण) ठीक हो सके। अलनूर चैरिटेबल सोसाइटी के तहत यह मदरसा चल रहा है, जिसकी संस्थापक व चेयरपर्सन सलमा अंसारी हैं। बैठक में चौधरी इफराहीम हुसैन, डॉ. अब्दुल फजल, डॉ. अजहर, डॉ. जाकिर, शाहनवाज खान, काजी जिया उल इस्लाम आदि मौजूद रहे।
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रिसर्च करने के बाद मैंने पाया कि कुरान हिफ्ज करने वाले शख्स का जेहन बहुत तेज हो जाता है। कुरान एक ब्रेन टॉनिक है। सो, इसे मदरसा में शुरू कराने का फैसला लिया। नई टेक्नोलॉजी आने से दिमाग का भी शॉर्प होना जरूरी है। चूंकि इन बच्चों के खान-पान में वह बात नहीं है, जो अमीर बच्चों में होते हैं। जो भी चाहे वह कुरान हिफ्ज करने की कक्षा में शामिल हो सकता है। दरअसल, कुरान किसी एक मजहब का नहीं है, बल्कि सारी इंसानियत के लिए यह किताब है। इसके साथ बच्चों को आदाब भी सिखाए जाएंगे। कैसे उन्हें बड़ों और छोटों से बातचीत करनी है।
- सलमा अंसारी, संस्थापक व चेयरपर्सन अलनूर चैरिटेबल सोसाइटी
वाकई में यह फैसला काबिल-ए-तारीफ है। कुरान शरीफ किसी एक मजहब की किताब नहीं है, बल्कि इंसानियत के लिए किताब है। मैडम सलमा अंसारी को इसके लिए मुबारकबाद है।
- चौधरी इफराहीम हुसैन, इस्लामिक धर्मगुरु
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अलिफ से अल्लाह और बे से बिस्मिल्लाह अब मुस्लिम बच्चे नहीं, बल्कि हिंदू, सिख और ईसाई बच्चे भी पढ़ेंगे, वो भी साथ-साथ। इस अनूठी पहल की सूत्रधार हैं पूर्व उप राष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी। शुक्रवार से मदरसा चाचा नेहरू में कुरान हिफ्ज कराने की शुरुआत होने जा रही है। इससे अलीगढ़ की गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूती मिलेगी।
इस पहल को उस समय और ताकत मिल गई, जब मदरसा में पढ़ रहे एक हिंदू छात्र ने कुरान हिफ्ज (कंठस्थ) करने की इच्छा जाहिर की। फिर, क्या था सलमा अंसारी ने अपनी सोच को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया और बुला ली आलिम-ए-दीन की बैठक।
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सबने ने सलमा अंसारी की सोच को जमीन पर उतारने के लिए हामी भर दी। अब बच्चों को पहले कायदा पढ़ाया जाएगा, जिससे उनका तलफ्फुज (उच्चारण) ठीक हो सके। अलनूर चैरिटेबल सोसाइटी के तहत यह मदरसा चल रहा है, जिसकी संस्थापक व चेयरपर्सन सलमा अंसारी हैं। बैठक में चौधरी इफराहीम हुसैन, डॉ. अब्दुल फजल, डॉ. अजहर, डॉ. जाकिर, शाहनवाज खान, काजी जिया उल इस्लाम आदि मौजूद रहे।
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रिसर्च करने के बाद मैंने पाया कि कुरान हिफ्ज करने वाले शख्स का जेहन बहुत तेज हो जाता है। कुरान एक ब्रेन टॉनिक है। सो, इसे मदरसा में शुरू कराने का फैसला लिया। नई टेक्नोलॉजी आने से दिमाग का भी शॉर्प होना जरूरी है। चूंकि इन बच्चों के खान-पान में वह बात नहीं है, जो अमीर बच्चों में होते हैं। जो भी चाहे वह कुरान हिफ्ज करने की कक्षा में शामिल हो सकता है। दरअसल, कुरान किसी एक मजहब का नहीं है, बल्कि सारी इंसानियत के लिए यह किताब है। इसके साथ बच्चों को आदाब भी सिखाए जाएंगे। कैसे उन्हें बड़ों और छोटों से बातचीत करनी है।
- सलमा अंसारी, संस्थापक व चेयरपर्सन अलनूर चैरिटेबल सोसाइटी
वाकई में यह फैसला काबिल-ए-तारीफ है। कुरान शरीफ किसी एक मजहब की किताब नहीं है, बल्कि इंसानियत के लिए किताब है। मैडम सलमा अंसारी को इसके लिए मुबारकबाद है।
- चौधरी इफराहीम हुसैन, इस्लामिक धर्मगुरु