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डिफेंस कॉरीडोर में भविष्य तलाश रहे उद्योगपतियों के बच्चे

Sun, 12 Aug 2018 02:08 AM IST
Updated Sun, 12 Aug 2018 02:08 AM IST
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डिफेंस कॉरीडोर में भविष्य तलाश रहे उद्योगपतियों के बच्चे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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एएमयू से इंजीनियरिंग में दो गोल्ड मेडल हासिल करने वाले शुभम अग्रवाल के पिता प्रवीण गुप्ता निर्यातक हैं। शुभम अपने पिता के हार्डवेयर इंडस्ट्री में मदद करते हैं। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना की घोषणा एवं अलीगढ़ में कार्यक्रम आयोजित होने के बाद वह बहुत उत्साहित हैं। रॉयल रेजीडेंसी में प्रदर्शनी देखने के बाद डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भविष्य तलाश कर रहे हैं।

कारण यह है कि प्रदर्शनी में ऐसी बहुत सी चीजें दिखी जो वह अपने यहां बहुत आसानी से बना सकते हैं। उनका कहना है कि ब्रॉस एवं कॉपर के स्माल कंपोनेंट आसानी से बना सकते हैं। थोड़ी कोशिश के बाद रक्षा मंत्रालय के लिए कुछ अन्य कलपुर्जे भी बना सकते हैं।
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शुभम अग्रवाल की तरह ही औद्योगिक आस्थान के निर्यातक सुभाष चंद्र गोयल के पुत्र अंशुल गोयल भी डिफेंस कॉरिडोर में भविष्य तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। रक्षा मंत्रालय के लिए काम करना रोमांचक भी हैं।
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शुभम एवं अंशुल की तरह यहां के बहुत युवा तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा हासिल किये हुए हैं, जो नए आइडिया से लैस हैं और ताला-हार्डवेयर की परंपरागत इंडस्ट्री से हटकर कुछ नया करने की सोच रहे हैं। भारत में ब्रांड बन चुके हिक्स थर्मामीटर के हरि प्रसाद गुप्ता कहते हैं कि बिजनेस में मोड़ देने के लिए डिफेंस कॉरिडोर अच्छा अवसर है। ताला बना रहे परिवार के नए बच्चे इसमें आ सकते हैं। वह न सिर्फ रक्षा बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रोडक्ट बनाएंगे।


औद्योगिक आस्थान उत्पादन समिति के महामंत्री दिनेश शास्त्री एवं संयुक्त सचिव जितेंद्र शर्मा के बच्चे इंजीनियरिंग कर परंपरागत ताला-हार्डवेयर व्यवसाय में हाथ बंटा रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि लीक से हटकर कुछ काम करने को मिल रहा है। हमारे बच्चों के भविष्य के लिए अच्छा अवसर है। उच्च शिक्षित बच्चे है। उनके व्यक्तित्व और क्षमता के अनुरूप सुविधा मिल रही है तो उसका लाभ जरूर उठाएंगे। उल्लेखनीय है कि एक दौड़ चला था जब महानगर के उद्योगपति के बच्चे बड़ी संख्या में शिक्षा के क्षेत्र कूदे थे। करोड़ों रुपये का निवेश कर यहां कई स्कूल-कॉलेज एवं अन्य शैक्षणिक संस्थाएं शुरू हुई थी।
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